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सूरत-ए-हाल: रोडवेज ट्रैफिक इंस्पेक्टर दर्ज नहीं करा पा रहे रिपोर्ट, रजिस्टर्ड डाक से तहरीर भेजेंगे एआरएम

Sat, 25 Mar 2023 01:55 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 25 Mar 2023 01:55 PM IST
सार

रोडवेज के ट्रैफिक इंस्पेक्टरों को बसों में यात्रियों से वसूला किराया हड़पने वाले कंडक्टर की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थाने के चक्कर पर चक्कर काटने पड़ रहे हैं।  अब मेडिकल थाना पुलिस को रजिस्टर्ड डाक से तहरीर भेजी जाएगी। 

 

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Surat-e-Hal: Roadways traffic inspector is not able to register report, ARM will send Tahrir by registered pos
रोडवेज की बसें - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साहब! यह मेडिकल थाना पुलिस है, जो अफसरों की शिकायत पर भी रिपोर्ट नहीं लिखती। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम पीड़ित की सुनवाई कैसे की जाती होगी।

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दरअसल रोडवेज के ट्रैफिक इंस्पेक्टर बसों में यात्रियों से वसूला किराया हड़पने वाले कंडक्टर की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थाने के चक्कर पर चक्कर काट रहे हैं मगर पुलिस रिपोर्ट नहीं लिख रही। थाना प्रभारी का कहना है कि विभागीय जांच करके रोडवेज अफसर कार्रवाई करें। एआरएम (वित्त) का कहना है कि अब तहरीर रजिस्टर्ड डाक से भेजेंगे। रिपोर्ट दर्ज नहीं होने पर शासन को अवगत कराया जाएगा। 
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मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड की चेयरपर्सन मंडलायुक्त सेल्वा कुमारी जे. और प्रबंध निदेशक रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक केके शर्मा हैं। ये बसें शहरवासियों को इधर से उधर आवागमन की सहूलियत देती हैं। खचाखच सवारियों से लेकर चलने वाली सिटी बसें घाटे का सौदा साबित हो रही हैं।
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इस पर उच्चाधिकारियों के आदेश पर गुरुवार को रोडवेज के ट्रैफिक इंस्पेक्टर रामगोपाल वर्मा ने सिटी स्टेशन से सवारियां लेकर रवाना हुई बस संख्या यूपी15एफटी-4701 को सीसीएसयू के पास चेक किया। चेकिंग के समय बस में 35 सवारियां थी, जिनमें 23 के पास टिकट नहीं मिला। कंडक्टर कृष्णवीर ने पहले बताया कि सवारियों ने किराया नहीं दिया। जब सवारियों से पूछा तो सभी ने बताया कि 25-25 रुपये किराया देने पर भी परिचालक ने टिकट नहीं दिया है।

उच्चाधिकारियों के आदेश पर ट्रैफिक इंस्पेक्टर रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए मेडिकल थाने पहुंचे। थाना प्रभारी ने तहरीर में खामियां बताकर वापस कर दिया। दोबारा पहुंचे तो कहा परिचालक का पूरा विवरण लिखकर लाएं।

शुक्रवार को तीसरी बार परिचालक का विवरण लिखकर पहुंचे तो फिर टरका दिया। अफसरों के कहने पर ट्रैफिक इंस्पेक्टर फिर थाने पहुंचे तो थाना प्रभारी ने तहरीर ही लेने से मना कर दिया और तर्क दिया कि विभागीय मामला है, बेहतर होगा कि अफसर जांच करके कार्रवाई करें। उन्होंने स्वयं का परिचय भी दिया मगर थाना प्रभारी ने नहीं सुनी। 

-मेडिकल थाना प्रभारी दिनेश कुमार उपाध्याय का कहना है कि रोडवेज अफसर विभागीय जांच करके दोषी पर कार्रवाई करें। रिपोर्ट दर्ज करवानी है तो विभाग के माध्यम से पत्र भेजा जाए। 
-एआरएम (वित्त) मुकेश अग्रवाल का कहना है कि मामला गंभीर है और उच्चाधिकारियों तक पहुंच गया है। अब मेडिकल थाना पुलिस को रजिस्टर्ड डाक से तहरीर भेजी जाएगी। 

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