ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के निकाहनामे को आगे बढ़ाए सुन्नी उलमा काउंसिल : उलमा
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अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि निकाह के वक्त औरत अपने तहाफ्फुज (हिफाजत) के लिए होने वाले शौहर के सामने कोई भी शर्त रख सकती है। बहुत सी ऐसी चीजें हैं जिसे निकाहनामे में पहले से जगह दी गई है।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जो मॉडल निकाहनामा तैयार किया हुआ है उसी के मुताबिक निकाह हो रहे हैं और लोग उसे पसंद भी कर रहे हैं। इसलिए ऑल इंडिया सुन्नी उलमा काउंसिल को चाहिए कि वह नये मॉडल निकाहनामा तैयार करने के बजाए पर्सनल लॉ बोर्ड के निकाहनामे को आगे बढ़ाए।
फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि कोई भी निकाहनामा तैयार किया जाता है तो उसमें बुनियादी चीजों को जगह देकर उनका खुले तौर पर जिक्र किया जाता है। कुछ शर्तें और पाबंदियां भी होती हैं।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का मॉडल निकाहनामा पहले से तैयार है और उसमें महिला की हिफाजत को लेकर तमाम चीजों को लिखा गया है। जिसको सुनने, पढ़ने और बताने के बाद ही निकाह कराए जा रहे हैं। मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि जब पहले से निकाहनामा तैयार है तो फिर ऐसे में सुन्नी उलमा काउंसिल अपने निकाहनामे में क्या नया करने जा रही है।
बता दें कि ऑल इंडिया सुन्नी उलमा काउंसिल मॉडल निकाहनामा तैयार कर रहा है। इसमें ऐसे प्रावधान किए जाएंगे जिससे तीन तलाक की नौबत न आए और पारिवारिक कलह के मामलों पर अंकुश लगाया जा सके। इस निकाहनामे को तैयार करने में ऑल इंडिया मुस्लिम ख्वातिन बोर्ड, पर्सनल लॉ बोर्ड (महिला) और महिला शहर काजियों की राय ली जा रही है।