{"_id":"639a4057293989558e638e11","slug":"sugarcane-prices-increased-by-rs-35-in-five-years-cost-increased-by-rs-41-city-news-mrt6177748173","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: पांच साल में गन्ने के दाम बढ़े 35...लागत बढ़ गई 41 रुपये","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: पांच साल में गन्ने के दाम बढ़े 35...लागत बढ़ गई 41 रुपये
विज्ञापन
पांच साल में गन्ने के दाम बढ़े 35...लागत बढ़ गई 41 रुपये
मेरठ। गन्ना उत्पादन की लागत पिछले पांच वर्ष लगातार बढ़ते हुए प्रति क्विंटल 41 रुपये बढ़ गई है जबकि गन्ने का दाम दो बार चुनाव के वक्त मात्र 35 रुपये क्विंटल ही बढ़ पाया है। वर्ष 2017 में 315 रुपये प्रति क्विंटल दाम थे जो अब 350 है। गन्ने में लगे रोग और महंगाई ने गन्ना किसान की कमर तोड़ दी है, लेकिन सरकार अभी तक गन्ना मूल्य बढ़ाने पर कोई विचार नहीं कर रही है और न ही निकट भविष्य में गन्ना मूल्य बढ़ने की कोई संभावना है। संवाद
पिछले साल बढ़े थे 25 रुपये दाम
वर्ष 2017 में गन्ने का मूल्य 315 रुपये क्विंटल था। उस दौरान चुनाव होने पर मात्र 10 रुपये प्रति क्विंटल दाम बढ़ाकर 325 कर दिए गए। इसके बाद वर्ष तीन वर्ष 2018, 2019 और 2020 में कोई वृद्धि नहीं की गई। पिछले वर्ष 2021 में भी चुनाव के वक्त ही 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़त की गई।
खाद के दाम बढ़े, वजन हुआ कम
डीएपी का 50 किलो का जो कट्टा वर्ष 2018 में 1050 रुपये का था, उसके दामों तो वृद्धि हुई है और वजन कम करके 45 किलो कर दिया है। 300 रुपये बढ़ने के बावजूद वजन 5 किग्रा घट गया है। यही हाल यूरिया का भी है। 50 किलो का 266 रुपये का था अब उसका वजन भी 5 किग्रा तक घटा दिया गया है। इसी प्रकार से कीटनाशकों के दामों में भी वृद्धि हुई है। इसी तरह डीजल के दाम जो पहले करीब 60 रुपये प्रति लीटर थे वह अब 86 रुपये के पास पहुंच चुके हैं।
विज्ञापन
रोग से घट गया गन्ना उत्पादन
पहले एक एकड़ में करीब 450 क्विंटल गन्ने का उत्पादन हो रहा था। वर्तमान में गन्ने में फिड़का रोग और लाल सड़न रोग के कारण गन्ने का उत्पादन कम हो गया है। इस समय एक एकड़ में करीब 350 क्विंटल तक ही गन्ने का उत्पादन हो रहा है। ऐसे में गन्ने का उत्पादन लगातार घट रहा है। महंगाई बढ़ रही है और गन्ने के दाम ज्यों के त्यों हैं।
इस तरह बढ़ी लागत
पांच वर्ष पहले एक बीघा गन्ने की बुवाई में 15000 रुपये सालाना खर्च आ रहा था। एक बीघा में करीब 60 क्विंटल गन्ना होता है। इस हिसाब से एक क्विंटल पर किसान की लागत करीब 250 रुपये थी। र्तमान में यह खर्च बढ़कर 17,500 प्रति बीघा हो चुका है। इस हिसाब से प्रति क्विंटल किसान को 291 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
गन्ना मूल्य बढ़े तो बने बात
पिछले पांच सालों से अपेक्षित गन्ना मूल्य नहीं बढ़ा है। खाद, कीटनाशकों पर महंगाई लगातार बढ़ रही है। गन्ना मूल्य बढ़े तभी कुछ बात बन सकती है। -विनेश तालियान, सरधना
तो बर्बाद हो जाएंगे किसान
अगर गन्ना मूल्य नहीं बढ़ा तो किसान बर्बाद हो जाएंगे। गन्ने का उत्पादन लगातार घट रहा है। लागत बढ़ती जा रही है और मूल्य बढ़ नहीं रहा है। -वरुण, ढिंढाला, मोहिउद्दीनपुर
घोषणा पत्र का वादा भी नहीं किया पूरा
भाजपा की ओर से चुनावी घोषणा पत्र में 370 रुपये प्रति क्विंटल दाम करने की बात कही थी लेकिन सरकार दोबारा बनने अपना वादा भी पूरा नहीं किया। इसे लेकर आंदोलन किया जाएगा। -अनुराग चौधरी, भाकियू युवा जिलाध्यक्ष।
गन्ना मूल्य को लेकर अभी तक शासन से कोई निर्णय नहीं लिया गया है। -दुष्यंत कुमार, जिला गन्ना अधिकारी मेरठ
विज्ञापन
मेरठ। गन्ना उत्पादन की लागत पिछले पांच वर्ष लगातार बढ़ते हुए प्रति क्विंटल 41 रुपये बढ़ गई है जबकि गन्ने का दाम दो बार चुनाव के वक्त मात्र 35 रुपये क्विंटल ही बढ़ पाया है। वर्ष 2017 में 315 रुपये प्रति क्विंटल दाम थे जो अब 350 है। गन्ने में लगे रोग और महंगाई ने गन्ना किसान की कमर तोड़ दी है, लेकिन सरकार अभी तक गन्ना मूल्य बढ़ाने पर कोई विचार नहीं कर रही है और न ही निकट भविष्य में गन्ना मूल्य बढ़ने की कोई संभावना है। संवाद
पिछले साल बढ़े थे 25 रुपये दाम
वर्ष 2017 में गन्ने का मूल्य 315 रुपये क्विंटल था। उस दौरान चुनाव होने पर मात्र 10 रुपये प्रति क्विंटल दाम बढ़ाकर 325 कर दिए गए। इसके बाद वर्ष तीन वर्ष 2018, 2019 और 2020 में कोई वृद्धि नहीं की गई। पिछले वर्ष 2021 में भी चुनाव के वक्त ही 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़त की गई।
विज्ञापन
खाद के दाम बढ़े, वजन हुआ कम
डीएपी का 50 किलो का जो कट्टा वर्ष 2018 में 1050 रुपये का था, उसके दामों तो वृद्धि हुई है और वजन कम करके 45 किलो कर दिया है। 300 रुपये बढ़ने के बावजूद वजन 5 किग्रा घट गया है। यही हाल यूरिया का भी है। 50 किलो का 266 रुपये का था अब उसका वजन भी 5 किग्रा तक घटा दिया गया है। इसी प्रकार से कीटनाशकों के दामों में भी वृद्धि हुई है। इसी तरह डीजल के दाम जो पहले करीब 60 रुपये प्रति लीटर थे वह अब 86 रुपये के पास पहुंच चुके हैं।
विज्ञापन
रोग से घट गया गन्ना उत्पादन
पहले एक एकड़ में करीब 450 क्विंटल गन्ने का उत्पादन हो रहा था। वर्तमान में गन्ने में फिड़का रोग और लाल सड़न रोग के कारण गन्ने का उत्पादन कम हो गया है। इस समय एक एकड़ में करीब 350 क्विंटल तक ही गन्ने का उत्पादन हो रहा है। ऐसे में गन्ने का उत्पादन लगातार घट रहा है। महंगाई बढ़ रही है और गन्ने के दाम ज्यों के त्यों हैं।
इस तरह बढ़ी लागत
पांच वर्ष पहले एक बीघा गन्ने की बुवाई में 15000 रुपये सालाना खर्च आ रहा था। एक बीघा में करीब 60 क्विंटल गन्ना होता है। इस हिसाब से एक क्विंटल पर किसान की लागत करीब 250 रुपये थी। र्तमान में यह खर्च बढ़कर 17,500 प्रति बीघा हो चुका है। इस हिसाब से प्रति क्विंटल किसान को 291 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
गन्ना मूल्य बढ़े तो बने बात
पिछले पांच सालों से अपेक्षित गन्ना मूल्य नहीं बढ़ा है। खाद, कीटनाशकों पर महंगाई लगातार बढ़ रही है। गन्ना मूल्य बढ़े तभी कुछ बात बन सकती है। -विनेश तालियान, सरधना
तो बर्बाद हो जाएंगे किसान
अगर गन्ना मूल्य नहीं बढ़ा तो किसान बर्बाद हो जाएंगे। गन्ने का उत्पादन लगातार घट रहा है। लागत बढ़ती जा रही है और मूल्य बढ़ नहीं रहा है। -वरुण, ढिंढाला, मोहिउद्दीनपुर
घोषणा पत्र का वादा भी नहीं किया पूरा
भाजपा की ओर से चुनावी घोषणा पत्र में 370 रुपये प्रति क्विंटल दाम करने की बात कही थी लेकिन सरकार दोबारा बनने अपना वादा भी पूरा नहीं किया। इसे लेकर आंदोलन किया जाएगा। -अनुराग चौधरी, भाकियू युवा जिलाध्यक्ष।
गन्ना मूल्य को लेकर अभी तक शासन से कोई निर्णय नहीं लिया गया है। -दुष्यंत कुमार, जिला गन्ना अधिकारी मेरठ