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विश्व बाजार में गिर रहे चीनी के दाम, सीएम ने की है जरूरत के मुताबिक चीनी का उत्पादन कराने की घोषणा

Sat, 24 Nov 2018 11:08 AM IST
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Updated Sat, 24 Nov 2018 11:08 AM IST
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Sugar price falling in the world market CM has said to produce sugar according to need
चीनी

देश में लगातार बढ़ रहे चीनी के उत्पादन और विश्व बाजार में गिरते दामों ने सरकार से लेकर शुगर इंडस्ट्री तक सबकी नींद उड़ा रखी है। इस बीच  सीएम योगी आदित्यनाथ के अगले साल से जरूरत के हिसाब से चीनी उत्पादन वाले बयान ने किसानों के बीच बहस छेड़ दी है। शुगर इंडस्ट्री से लेकर किसान नेता भी इस बयान के निहितार्थ निकालने लगे हैं। वहीं विपक्षी दलों ने इसे लोकसभा चुनाव से पहले सियासी शिगूफा बताया है। 

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शुगर इंडस्ट्री से मिले आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में चीनी की घरेलू खपत 245 से 255 लाख टन है, लेकिन लगातार बढ़ रहे गन्ना उत्पादन से चीनी का उत्पादन 315 लाख टन तक पहुंच गया है। 60 लाख टन से ज्यादा चीनी का सरप्लस स्टॉक न केवल सरकार के लिए सरदर्द बन चुका है, बल्कि शुगर इंडस्ट्री को भी गन्ना पेरने में पसीना आ रहा है। 

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हाल ये है कि प्रदेश की शुगर मिलों ने अभी तक पिछले पेराई सत्र का भी शत प्रतिशत बकाया भुगतान नहीं किया है। प्रदेश की मिलों पर 6 हजार करोड़ रुपये बकाया चल रहा है। हालांकि केंद्र सरकार ने इंडस्ट्री को राहत देते हुए जहां चीनी का रेट 2900 रुपये प्रति कुंतल फिक्स कर दिया है वहीं आयात पर शत प्रतिशत आयात शुल्क बढ़ाने और चीनी निर्यात पर सब्सिडी देने का काम किया है। सीएम ने बागपत रैली में किसानों से दूसरी फसल भी उगाने के लिए अपील की थी। 

एथनॉल उत्पादन पर भी फोकस 
बढ़ते गन्ना रकबे और चीनी उत्पादन से निपटने के लिए केंद्र, प्रदेश सरकार ने कसरत करनी शुरू कर दी है। खांडसारी की नई नीति के साथ ही एथनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। इसके लिए जहां एथनॉल का प्रति लीटर रेट बढ़ाया गया है, वहीं शीरे की बजाय सीधे गन्ना जूस से एथनॉल की स्वीकृति दे दी है। 

तेल कंपनियों पर हैं निर्भर   
एथनॉल का प्रयोग ईंधन (पेट्रोल-डीजल) को छोड़कर अन्य कहीं नहीं होता है। तेल में ही एथनॉल की मिक्सिंग होती है। इसलिए एथनॉल का उत्पादन तेल कंपनियों पर निर्भर है। नई नीति के अंतर्गत यूपी में इस साल 81 करोड़ लीटर एथनॉल के टेंडर हुए हैं। प्रदेश में करीब 37 मिले एथनॉल का उत्पादन कर रही हैं। तेल कंपनियां 10 फीसदी एथनॉल का मिश्रण तेल में कर रही हैं। ब्राजील की तर्ज पर इसे 25 फीसदी तक ले जाएं तो गन्ने की समस्या खत्म हो सकती है। 

Sugar price falling in the world market CM has said to produce sugar according to need
sugarcane farmers

बी हैवी शीरे से केवल दो मिलें बनाएंगी एथनॉल 
देश में सी हैवी शीरे से ही एथनॉल बनाया जा रहा है। सरकार ने ब्राजील की तर्ज पर अब बी हैवी शीरे और सीधे गन्ना रस से एथनॉल बनाने की छूट दे दी है। बी हैवी शीरा वह स्टेज है जिसमें शीरे के अंदर चीनी का काफी अंश होता है। प्रदेश में सिंभावली और बिजनौर जनपद की धामपुर मिल बी हैवी शीरे से एथनॉल बनाने जा रही हैं। 

सरकारी मदद मिले तो एथनॉल उत्पादन करने को तैयार 
यूपी इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी दीपक गुप्ता का कहना है कि सरकार चीनी का उत्पादन संतुलित करने के लिए एथनॉल उत्पादन बढ़ाने पर बल दे रही है। सरकार मिल मालिकों को मदद दे तो बी हैवी शीरे के अलावा गन्ना जूस से भी एथनॉल बनाया जा सकता है। फिलहाल एथनॉल बनाना महंगा है।

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ये है स्थिति 
देश में चीनी की घरेलू खपत    245 से 255 लाख टन 
पिछले साल हुआ चीनी उत्पादन    315 लाख टन 
जरूरत से ज्यादा चीनी    60 लाख टन 
तेल में एथनॉल की मिक्सिंग     10 फीसदी
प्रदेश में एथनॉल बना रही मिलें     37
बी हैवी शीरे से एथनॉल तैयार करेंगी मिलें     02
प्रदेश में पिछले साल के मुकाबले इस साल गन्ना रकबा     15 फीसदी ज्यादा
पिछले साल का बकाया गन्ना मूल्य भुगतान    06 हजार करोड़ 

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