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कष्ट कर्म का परिणाम है : आचार्य सौरभ
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जैन बोर्डिंग हाउस में दिया धर्मलाभ, विजेताओं को मिले विशेष पुरस्कार
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। मुनि सौरभ सागर महाराज का वर्षायोग कार्यक्रम श्रद्धा से आगे बढ़ रहा है। जैन बोर्डिंग हाउस में प्रवचन करते हुए आचार्य सौरभ सागर जी महाराज ने कहा कि कष्ट कर्म का परिणाम है, जबकि संक्लेश बुद्धि की विकृति का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि कष्ट की स्थिति में यदि मनुष्य समता बनाए रखता है और स्वयं को संभाल लेता है तो वह कर्मों को नष्ट करने की दिशा में आगे बढ़ता है।
आचार्य ने कहा कि जीव के भीतर इतनी शक्ति है कि वह भक्ति, श्रद्धा और भावना के बल पर आत्मा को परमात्मा बना सकता है। इसलिए सांसारिक सुख-दुख और भौतिक उपलब्धियां उसके सामने छोटी हैं। आवश्यकता केवल अपने भीतर की शक्ति को जागृत करने, श्रद्धा रखने और प्रभु के प्रति समर्पित होने की है।
मेरठ जैन समाज के अध्यक्ष एवं पुष्प वर्षायोग समिति के अध्यक्ष सुरेश जैन रितुराज ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व की पूर्व संध्या पर आचार्य की गुरु भक्ति के समय राखी बनाओ प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। निर्णायकों द्वारा तीन विशेष पुरस्कार चुने गए। कार्यक्रम में समिति के सुरेंद्र जैन, अनिल जैन कक्कू, प्रेम चंद जैन, हंस कुमार जैन, रितेश जैन, अनिल जैन, संजय जैन धम्मो, अक्षय जैन, विजय जैन, अनुज जैन, श्रीकिशन जैन सहित अन्य श्रेष्ठीगण उपस्थित रहे।
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मेरठ। मुनि सौरभ सागर महाराज का वर्षायोग कार्यक्रम श्रद्धा से आगे बढ़ रहा है। जैन बोर्डिंग हाउस में प्रवचन करते हुए आचार्य सौरभ सागर जी महाराज ने कहा कि कष्ट कर्म का परिणाम है, जबकि संक्लेश बुद्धि की विकृति का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि कष्ट की स्थिति में यदि मनुष्य समता बनाए रखता है और स्वयं को संभाल लेता है तो वह कर्मों को नष्ट करने की दिशा में आगे बढ़ता है।
आचार्य ने कहा कि जीव के भीतर इतनी शक्ति है कि वह भक्ति, श्रद्धा और भावना के बल पर आत्मा को परमात्मा बना सकता है। इसलिए सांसारिक सुख-दुख और भौतिक उपलब्धियां उसके सामने छोटी हैं। आवश्यकता केवल अपने भीतर की शक्ति को जागृत करने, श्रद्धा रखने और प्रभु के प्रति समर्पित होने की है।
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मेरठ जैन समाज के अध्यक्ष एवं पुष्प वर्षायोग समिति के अध्यक्ष सुरेश जैन रितुराज ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व की पूर्व संध्या पर आचार्य की गुरु भक्ति के समय राखी बनाओ प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। निर्णायकों द्वारा तीन विशेष पुरस्कार चुने गए। कार्यक्रम में समिति के सुरेंद्र जैन, अनिल जैन कक्कू, प्रेम चंद जैन, हंस कुमार जैन, रितेश जैन, अनिल जैन, संजय जैन धम्मो, अक्षय जैन, विजय जैन, अनुज जैन, श्रीकिशन जैन सहित अन्य श्रेष्ठीगण उपस्थित रहे।
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