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Meerut News: मेडिकल कॉलेज में कॉर्डियक रीसिंक्रोनाइजेशन थेरेपी से हृदय का सफल ऑपरेशन, ऑपरेशन में 3 घंटे का समय लगा, हृदय के तीन हिस्सों में पेसमेकर लगाए
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मेडिकल कॉलेज में कॉर्डियक रीसिंक्रोनाइजेशन थेरेपी से हृदय का सफल ऑपरेशन, ऑपरेशन में 3 घंटे का समय लगा, हृदय के तीन हिस्सों में पेसमेकर लगाए
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में बुधवार को 76 वर्षीय जगसोरन का कॉर्डियक रीसिंक्रोनाइजेशन थेरेपी द्वारा हृदय का सफल ऑपरेशन हुआ। वह हृदय की कई बीमारी के कारण गंभीर रूप से बीमार थे। जिनमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज की वजह से हृदय की काम करने की क्षमता मात्र 20 प्रतिशत शेष रह गई थी।
कॉलेज के मीडिया प्रभारी डॉ. वीडी पांडेय ने बताया कि जगसोरन हार्ट फेलियर की स्थिति में थे तथा गंभीर रूप से बीमार थे। मरीज के हृदय के कंडक्शन सिस्टम में अवरोध होने की वजह से हृदय की खून पंप करने की क्षमता काफी कम हो गई थी। मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग के सहायक आचार्य डॉ. शशांक पांडेय से परामर्श लिया। डॉ. पांडेय ने मरीज को कॉर्डियक रीसिंक्रोनाइजेशन थेरेपी के विषय में बताया। स्वीकृति के बाद मरीज को सफल थेरेपी दी गई। हृदय के तीन हिस्सों में सफलतापूर्वक पेसमेकर लगाया गया।
डॉ. शशांक पांडेय तथा डॉ. सीबी पांडेय ने बताया कि मरीज मेडिकल कॉलेज आने से पूर्व दिल्ली, गुरुग्राम तथा एनसीआर क्षेत्र के प्रतिष्ठित सरकारी व गैर सरकारी नामी अस्पतालों में खुद को दिखाते रहे। यह थेरेपी निजी अस्पतालों में 9-10 लाख रुपये में उपलब्ध हो पाती है, जो कि मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग में लगभग आधे खर्च पर उपलब्ध है।
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प्रधानाचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि यह थेरेपी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेज में पहली बार दी गई है। यह एक जटिल ऑपरेशन था, जिसमें 3 घंटे का समय लगा। डॉ. आरसी गुप्ता ने हृदय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. धीरज सोनी, डॉ. सीबी पांडेय, डॉ. शशांक पांडेय सहित पूरी टीम को बधाई दी।
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मेरठ। मेडिकल कॉलेज में बुधवार को 76 वर्षीय जगसोरन का कॉर्डियक रीसिंक्रोनाइजेशन थेरेपी द्वारा हृदय का सफल ऑपरेशन हुआ। वह हृदय की कई बीमारी के कारण गंभीर रूप से बीमार थे। जिनमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज की वजह से हृदय की काम करने की क्षमता मात्र 20 प्रतिशत शेष रह गई थी।
कॉलेज के मीडिया प्रभारी डॉ. वीडी पांडेय ने बताया कि जगसोरन हार्ट फेलियर की स्थिति में थे तथा गंभीर रूप से बीमार थे। मरीज के हृदय के कंडक्शन सिस्टम में अवरोध होने की वजह से हृदय की खून पंप करने की क्षमता काफी कम हो गई थी। मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग के सहायक आचार्य डॉ. शशांक पांडेय से परामर्श लिया। डॉ. पांडेय ने मरीज को कॉर्डियक रीसिंक्रोनाइजेशन थेरेपी के विषय में बताया। स्वीकृति के बाद मरीज को सफल थेरेपी दी गई। हृदय के तीन हिस्सों में सफलतापूर्वक पेसमेकर लगाया गया।
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डॉ. शशांक पांडेय तथा डॉ. सीबी पांडेय ने बताया कि मरीज मेडिकल कॉलेज आने से पूर्व दिल्ली, गुरुग्राम तथा एनसीआर क्षेत्र के प्रतिष्ठित सरकारी व गैर सरकारी नामी अस्पतालों में खुद को दिखाते रहे। यह थेरेपी निजी अस्पतालों में 9-10 लाख रुपये में उपलब्ध हो पाती है, जो कि मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग में लगभग आधे खर्च पर उपलब्ध है।
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प्रधानाचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि यह थेरेपी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेज में पहली बार दी गई है। यह एक जटिल ऑपरेशन था, जिसमें 3 घंटे का समय लगा। डॉ. आरसी गुप्ता ने हृदय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. धीरज सोनी, डॉ. सीबी पांडेय, डॉ. शशांक पांडेय सहित पूरी टीम को बधाई दी।