सीसीएसयू : अब राजनीति विज्ञान में चौधरी चरण सिंह और बाबू जगजीवन राम की विचारधारा पढ़ेंगे छात्र-छात्राएं
छात्र-छात्राएं अब पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और उपप्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की विचारधारा बीए राजनीति विज्ञान में पढ़ सकेंगे। पढ़िए सिलेबस में और क्या-क्या शामिल किया गया है।
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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में चौधरी चरण सिंह को नहीं पढ़ने का मलाल अब छात्र-छात्राओं को नहीं रहेगा। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और उपप्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की विचारधारा अब छात्र-छात्राएं बीए राजनीति विज्ञान में पढ़ सकेंगे। कई और चिंतकों को भी सिलेबस में शामिल किया गया है। बीए संस्कृत में अब आयुर्वेद, कर्मकांड, वास्तु और योग विषय को शामिल कर इसे रोजगारक बनाया गया है।
सोमवार को राजनीति विज्ञान की बोर्ड ऑफ स्टडीज में बीए के सिलेबस पर मुहर लग गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अब सभी विषयों का यूजी में सिलेबस अपग्रेड किया जा रहा है। प्रदेश के सभी विवि में 70 फीसदी सिलेबस समान होगा और 30 फीसदी सिलेबस विवि स्तर पर बदला जा सकता है।
सीसीएसयू के राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. पवन कुमार शर्मा ने बताया कि जो सिलेबस बनाया गया है, उसमें देश के निर्माण में बड़ा कार्य करने वाले राजनीतिक चिंतकों को शामिल किया है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह और उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रहे बाबू जगजीवन राम की विचारधारा के साथ देवी अहिल्या बाई, पंडित दीन दयाल उपाध्याय, मौलाना अबुल कलाम आजाद, एनी बेसेंट सरोजिनी नायडू, दक्षिण से ताल्लुक रखने वाले दलित चिंतक एमसी राजा, संविधान सभा के सदस्य एवं शायर मौलाना हसरत मोहानी, पूर्व राज्यपाल कन्हैया लाल, मनिकलाल मुंशी के राजनीतिक चिंतन को भी सिलेबस में शामिल किया गया है।
विभागाध्यक्ष प्रो. पवन कुमार शर्मा ने बताया कि 1757 से 1857 के बीच भारत में 38 स्वतंत्रता आंदोलन हुए। मध्यकाल में मराठा और सिख चिंतन को भी सिलेबस से जोड़ा गया है। भारतीय संविधान और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को प्रथम वर्ष से ही छात्र-छात्राएं पढ़ना शुरू कर देंगे। सभी पेपरों में भारतीय परिपेक्ष्य को रखा गया है।
संस्कृत में अब हर विषय में होगा प्रैक्टिकल
बीए संस्कृत में मुख्य विषयों के साथ माइनर विषय के रूप में स्किल डेवलेपमेंट की दृष्टि से कई विषय जोड़े गए हैं। इनमें आयुर्वेद, कर्मकांड, ज्योतिष, वास्तु और योग को सिलेबस में शामिल किया गया है। चरक संहिता और वागभट रचित पुस्तक अस्टांग हृदय को भी सिलेबस में जोड़ा गया है। संस्कृत विद्वान बिल्वेश्वर महाविद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य प्रभु दत्त स्वामी की रचना, एनएएस कॉलेज के शिक्षक रहे डॉ. गणेश दत्त शर्मा की विवेकानंद पर लिखी पुस्तक एवं दिल्ली में शिक्षक रमांकात शुक्ल की पुस्तक को भी सिलेबस में शामिल किया गया है। नए सिलेबस में 25 फीसदी प्रैक्टिकल के विषय होंगे। संस्कृत में हर विषय में प्रैक्टिकल होगा।
विश्वविद्यालय का सराहनीय कदम
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक विचारों को बहुत पहले ही कोर्स में शामिल किया जाना चाहिए था। नए कोर्स में शामिल कर विश्वविद्यालय ने यह सराहनीय कदम उठाया है। - डॉ. राजकुमार सांगवान, संगठन महामंत्री, रालोद