{"_id":"5c5b66c3bdec22736f4a7e74","slug":"strong-evidence-and-advocacy-gives-justice-in-kawal-massacre","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कवाल हत्याकांड: पुख्ता साक्ष्य और मजबूत पैरोकारी से मिला इंसाफ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कवाल हत्याकांड: पुख्ता साक्ष्य और मजबूत पैरोकारी से मिला इंसाफ
Thu, 07 Feb 2019 04:29 AM IST
Dimple Sirohi
जगेंद्र उज्ज्वल, मेरठ
जगेंद्र उज्ज्वल, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Thu, 07 Feb 2019 04:29 AM IST
विज्ञापन
कवाल कांड
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन और गौरव हत्याकांड में सातों अभियुक्तों को अदालत ने पुख्ता साक्ष्यों, वादी की मजबूत पैरोकारी तथा हत्या के वीभत्स तरीके की वजह से दोषी माना है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पत्थर, सरिये और लाठी डंडों के बेहिसाब जख्मों ने भी घटना की बर्बरता जाहिर की। अदालत में करीब पांच साल चली सुनवाई के दौरान मामले में दोनों पक्ष की तरफ से 16 गवाहों की गवाही हुई।
कवाल कांड में अपर सत्र न्यायाधीश हिमांशु भटनागर की कोर्ट संख्या-सात ने सचिन और गौरव के कत्ल में जिन सात अभियुक्तों को दोषी करार दिया है, उनके खिलाफ केस में वादी पक्ष की इंसाफ के लिए पैरवी भी मुख्य वजह है। गौरव के पिता रविंद्र सिंह ने 27 अगस्त, 2013 को दोपहर 2.45 पर जानसठ कोतवाली में इस दोहरे हत्याकांड की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
मृतकों का पोस्टमार्टम तीन डाक्टरों के पैनल ने किया था। एसआई शाहिद अली ने उनका पंचनामा भरा था। घटना के समय जानसठ के प्रभारी निरीक्षक रहे शैलेंद्र शर्मा ने केस की विवेचना शुरू की। उसके बाद एसआईसी के विवेचक संपूर्णानंद तिवारी ने हत्याकांड की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। 15 अप्रैल, 2014 को चर्चित केस में कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम किया। कवाल निवासी मुजम्मिल एवं मुजस्सिम, फुरकान, जहांगीर, नदीम, मृतक शाहनवाज, अफजाल और इकबाल पर हत्या के मुकदमे का परीक्षण हुआ।
विज्ञापन
वादी पक्ष के 10 तथा बचाव पक्ष के छह गवाह पेश हुए। सरेआम वीभत्स तरीके से मारे गए सचिन और गौरव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट दिल दहलाने वाली थी। डाक्टरों के पैनल को सचिन के शरीर पर 17 तथा गौरव के जिस्म पर 15 निर्मम हत्या के घाव मिले। गोली और धारदार हथियार का हत्यारोपियों ने कोई प्रयोग नहीं किया था, बल्कि लाठी-डंडों, सिर और मुंह को पत्थरों से कुचलने के साथ सरिये से मार-मारकर मौत के घाट उतार दिया था। कई जख्मों में मल्टीपिल घाव मिले थे। पीएम रिपोर्ट पुख्ता साक्ष्य साबित हुआ।
वारदात में दूसरे पक्ष के मृतक शाहनवाज के पिता सलीम का अदालत में दिया बयान भी नामित आरोपियों को संदेह को दायरे में ले आया। सलीम ने जो कोर्ट में बयान दिया था, उसमें सचिन और गौरव की कवाल में मौजूदगी दिन के 12 बजे दिखाई थी। वादी पक्ष की ओर से कोर्ट में भारतीय इंटर कॉलेज नंगला मंदौड़ के शिक्षक दिनेश कुमार की गवाही कराई गई। उनके मुताबिक कक्षा 12 का छात्र गौरव घटना के दिन 12.30 बजे तक क्लासरूम में था।
थाने की पैरोकारी भी अहम रही। पुलिस ने मुजस्सिम से लोहे की रॉड और नदीम, जहांगीर और फुरकान से लाठी की बरामदगी दिखाई थी। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त सामान को कोर्ट में प्रस्तुत किया। वीभत्स तरीके से की गई हत्या ने भी कातिलों को सजा का दोषी बना दिया।
विज्ञापन
कवाल कांड में अपर सत्र न्यायाधीश हिमांशु भटनागर की कोर्ट संख्या-सात ने सचिन और गौरव के कत्ल में जिन सात अभियुक्तों को दोषी करार दिया है, उनके खिलाफ केस में वादी पक्ष की इंसाफ के लिए पैरवी भी मुख्य वजह है। गौरव के पिता रविंद्र सिंह ने 27 अगस्त, 2013 को दोपहर 2.45 पर जानसठ कोतवाली में इस दोहरे हत्याकांड की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
विज्ञापन
मृतकों का पोस्टमार्टम तीन डाक्टरों के पैनल ने किया था। एसआई शाहिद अली ने उनका पंचनामा भरा था। घटना के समय जानसठ के प्रभारी निरीक्षक रहे शैलेंद्र शर्मा ने केस की विवेचना शुरू की। उसके बाद एसआईसी के विवेचक संपूर्णानंद तिवारी ने हत्याकांड की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। 15 अप्रैल, 2014 को चर्चित केस में कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम किया। कवाल निवासी मुजम्मिल एवं मुजस्सिम, फुरकान, जहांगीर, नदीम, मृतक शाहनवाज, अफजाल और इकबाल पर हत्या के मुकदमे का परीक्षण हुआ।
विज्ञापन
वादी पक्ष के 10 तथा बचाव पक्ष के छह गवाह पेश हुए। सरेआम वीभत्स तरीके से मारे गए सचिन और गौरव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट दिल दहलाने वाली थी। डाक्टरों के पैनल को सचिन के शरीर पर 17 तथा गौरव के जिस्म पर 15 निर्मम हत्या के घाव मिले। गोली और धारदार हथियार का हत्यारोपियों ने कोई प्रयोग नहीं किया था, बल्कि लाठी-डंडों, सिर और मुंह को पत्थरों से कुचलने के साथ सरिये से मार-मारकर मौत के घाट उतार दिया था। कई जख्मों में मल्टीपिल घाव मिले थे। पीएम रिपोर्ट पुख्ता साक्ष्य साबित हुआ।
वारदात में दूसरे पक्ष के मृतक शाहनवाज के पिता सलीम का अदालत में दिया बयान भी नामित आरोपियों को संदेह को दायरे में ले आया। सलीम ने जो कोर्ट में बयान दिया था, उसमें सचिन और गौरव की कवाल में मौजूदगी दिन के 12 बजे दिखाई थी। वादी पक्ष की ओर से कोर्ट में भारतीय इंटर कॉलेज नंगला मंदौड़ के शिक्षक दिनेश कुमार की गवाही कराई गई। उनके मुताबिक कक्षा 12 का छात्र गौरव घटना के दिन 12.30 बजे तक क्लासरूम में था।
थाने की पैरोकारी भी अहम रही। पुलिस ने मुजस्सिम से लोहे की रॉड और नदीम, जहांगीर और फुरकान से लाठी की बरामदगी दिखाई थी। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त सामान को कोर्ट में प्रस्तुत किया। वीभत्स तरीके से की गई हत्या ने भी कातिलों को सजा का दोषी बना दिया।
एसआईसी ने दी थी क्लीनचिट, कोर्ट ने ठहराया दोषी
केस में हाईकोर्ट से जमानत पाए अफजाल और इकबाल पुत्र बुंदू भी कातिल ठहराए गए। वादी रविंद्र ने रिपोर्ट दर्ज कराते वक्त अफजाल को इकबाल का पुत्र लिखवा दिया था। एसआईसी ने इसी आधार पर मुकदमे से उनके नाम निकाल दिए थे। कोर्ट में गौरव के पिता रविंद्र के बयान ने स्पष्ट किया कि अफजाल और इकबाल सगे भाई हैं।
सचिन के पिता बिशन सिंह के भी कोर्ट में बयान हुए, तो दोनों को कोर्ट ने धारा सीआरपीसी 319 में तलब कर जेल भेजा था। दोषी ठहराए जाने के बाद दोनों फिर से कारागार में भेज दिए गए हैं।
हत्याकांड क्रूरतम , मृत्युदंड भी दे सकती है कोर्ट: जिंदल
मुजफ्फरनगर। वादी पक्ष के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने कहा कि कवाल कांड में सचिन और गौरव की क्रूरतम तरीके से हत्या की गई थी। यह घटना मुजफ्फरनगर दंगे का कारण बनी, जिसमें 65 से ज्यादा बेगुनाहों की मौत हो गई। केस में दोषी कातिलों को न्यूनतम आजीवन कारावास की सजा के अलावा मृत्युदंड भी दिया जा सकता है।
सचिन के पिता बिशन सिंह के भी कोर्ट में बयान हुए, तो दोनों को कोर्ट ने धारा सीआरपीसी 319 में तलब कर जेल भेजा था। दोषी ठहराए जाने के बाद दोनों फिर से कारागार में भेज दिए गए हैं।
हत्याकांड क्रूरतम , मृत्युदंड भी दे सकती है कोर्ट: जिंदल
मुजफ्फरनगर। वादी पक्ष के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने कहा कि कवाल कांड में सचिन और गौरव की क्रूरतम तरीके से हत्या की गई थी। यह घटना मुजफ्फरनगर दंगे का कारण बनी, जिसमें 65 से ज्यादा बेगुनाहों की मौत हो गई। केस में दोषी कातिलों को न्यूनतम आजीवन कारावास की सजा के अलावा मृत्युदंड भी दिया जा सकता है।
डीएम ने ली कोर्ट के निर्णय की पल-पल की जानकारी
कवाल कांड के मुकदमे में फैसला आने की पल-पल की जानकारी डीएम राजीव शर्मा लेते रहे। फिलहाल डीएम जिले से बाहर प्रयागराज में है। उन्होंने डीजीसी से कोर्ट के निर्णय पर कई बार वार्ता की।
बुलंदशहर जेल में बंद मुजम्मिल को वीसी से दिया दोषी करार
मुजफ्फरनगर। बुलंदशहर जेल में बंद मुजम्मिल उर्फ बिल्ला को वीडियो कांफ्रेंसिंग (वीसी) के जरिये दोषी करार दिया गया। मुजफ्फरनगर जिला कारागार के वार्डन मथुरा निवासी चुन्नी लाल शर्मा हत्याकांड विक्की गैंग के इशारे पर अंजाम दिया गया था। उस वारदात में मुजम्मिल आरोपी है। आठ फरवरी को सजा के दिन एडीजे कोर्ट संख्या सात ने उसे तलब किया है।
बुलंदशहर जेल में बंद मुजम्मिल को वीसी से दिया दोषी करार
मुजफ्फरनगर। बुलंदशहर जेल में बंद मुजम्मिल उर्फ बिल्ला को वीडियो कांफ्रेंसिंग (वीसी) के जरिये दोषी करार दिया गया। मुजफ्फरनगर जिला कारागार के वार्डन मथुरा निवासी चुन्नी लाल शर्मा हत्याकांड विक्की गैंग के इशारे पर अंजाम दिया गया था। उस वारदात में मुजम्मिल आरोपी है। आठ फरवरी को सजा के दिन एडीजे कोर्ट संख्या सात ने उसे तलब किया है।
साढे़ पांच साल से कर रही थी न्याय का इंतजार : स्वाति
मलिकपुरा के मृतक सचिन की पत्नी स्वाति बोली कि वह साढे़ पांच साल से न्याय का इंतजार कर रही थी। उन्हें पूरा भरोसा था कि अदालत से हत्यारों को कड़ी सजा मिलेगी।
कलक्ट्रेट में कार्यरत मृत सचिन की पत्नी स्वाति कहती हैं कि न्याय के इंतजार में उनकी आंखें थक गई हैं। साढे़ पांच साल अदालत का फैसला आया। उसने कहा कि जिस तरह उसके पति सचिन और गौरव को घेरकर हत्या की गई थी, इस तरह की हिम्मत दोबारा कोई नहीं करेगा। हमें कानून पर पूरा यकीन है। कानून से ही पूरा परिवार आस लगाए हुए था।
आरोपियों को दोष सिद्ध होने की खबर सुनने के बाद भावुक हुई स्वाति ने कहा कि हमें कानून और भगवान दोनों पर भरोसा था। न्याय तेजी के साथ कम समय में मिले तो अपराधियों के अंदर खौफ होगा और अपराध कम होंगे। उधर, मृतक गौरव के पिता रविंद्र सिंह ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। अदालत हमें उचित न्याय दिलाएंगी।
कलक्ट्रेट में कार्यरत मृत सचिन की पत्नी स्वाति कहती हैं कि न्याय के इंतजार में उनकी आंखें थक गई हैं। साढे़ पांच साल अदालत का फैसला आया। उसने कहा कि जिस तरह उसके पति सचिन और गौरव को घेरकर हत्या की गई थी, इस तरह की हिम्मत दोबारा कोई नहीं करेगा। हमें कानून पर पूरा यकीन है। कानून से ही पूरा परिवार आस लगाए हुए था।
आरोपियों को दोष सिद्ध होने की खबर सुनने के बाद भावुक हुई स्वाति ने कहा कि हमें कानून और भगवान दोनों पर भरोसा था। न्याय तेजी के साथ कम समय में मिले तो अपराधियों के अंदर खौफ होगा और अपराध कम होंगे। उधर, मृतक गौरव के पिता रविंद्र सिंह ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। अदालत हमें उचित न्याय दिलाएंगी।
अल्लाह पर भरोसा है, एक दिन न्याय जरूर मिलेगा
कवाल कांड में दोहरे हत्याकांड की सुनवाई के दौरान न्यायालय के बाहर मौजूद दोषी करार दिए गए मुजस्सिम और मुजम्मिल के पिता हाजी नसीम अहमद ने शासन और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मेरे बेटों के साथ जो हुआ वह तो ठीक है, लेकिन शाहनवाज के हत्यारोपियों को अभी तक क्यों गिरफ्तार नहीं किया जा रहा। शासन-प्रशासन गैर जमानती वारंट जारी होने के बावजूद उन्हें न्यायालय में पेश नहीं कर रहा। उन्हें अल्लाह पर भरोसा है, एक न एक दिन न्याय जरूर मिलेगा। वह सुप्रीम कोर्ट तक भी इस मामले की लड़ाई लड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि शाहनवाज की हत्या में गौरव और सचिन के अलावा रविंद्र सिंह, प्रह्लाद, बिशन सिंह, तेंदू, देवेंद्र और जितेंद्र आरोपी हैं। पेश नहीं होने पर न्यायालय से उनके गैर जमानती वारंट जारी हो चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली है। इसके बावजूद शासन-प्रशासन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश नहीं कर रहा है।
इस मामले में 11 फरवरी की तारीख लगी है। आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। बुलंदशहर जेल में बंद मुजम्मिल के मेडिकल सर्टिफिकेट दिखाते हुए नसीम अहमद ने बताया कि वह दिव्यांग है। दोनों हाथ नहीं उठते। उसका दिल्ली एम्स में उपचार होना है, लेकिन वहां नहीं ले जाया जाता। जेल में उसका उपचार संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वह हार नहीं मानेंगे। भले ही उन्हें सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़नी पड़े।
अब सीजेएम कोर्ट में चल रहा है मामला
मुजफ्फरनगर। कवाल कांड में मरे शाहनवाज की हत्या के मामले में उसके पिता नसीम ने मृतक सचिन और गौरव के अलावा उनके पांच परिजनों को भी नामजद कराया था। शासन द्वारा मामले की जांच एसआईसी (स्पेशल इंवेस्टिगेशन सेल) को सौंपी थी। एसआईसी ने जांच उपरांत शाहनवाज हत्याकांड में यह तर्क देकर एफआर लगा दी थी कि झगडे़ में शाहनवाज की मौत हुई।
झगडे़े के दौरान मौके पर सचिन और गौरव ही थी, इन दोनों की भी उसी समय मौत हो गई थी। मृतक शाहनवाज के पिता सलीम की ओर से शाहनवाज हत्याकांड का निजी परिवाद 16 नवंबर 2015 को कोर्ट में दाखिल किया था, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए 30 मई 2018 को आरोपियों रविंद्र सिंह, बिशन, प्रहलाद, तेंदू, देवेंद्र और जितेंद्र को तलब किया था। आरोपियों को पेश नहीं होने पर कोर्ट से सभी आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो चुके हैं। इस मामले में सीजेएम कोर्ट में 11 फरवरी की तारीख लगी है।
उन्होंने कहा कि शाहनवाज की हत्या में गौरव और सचिन के अलावा रविंद्र सिंह, प्रह्लाद, बिशन सिंह, तेंदू, देवेंद्र और जितेंद्र आरोपी हैं। पेश नहीं होने पर न्यायालय से उनके गैर जमानती वारंट जारी हो चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली है। इसके बावजूद शासन-प्रशासन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश नहीं कर रहा है।
इस मामले में 11 फरवरी की तारीख लगी है। आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। बुलंदशहर जेल में बंद मुजम्मिल के मेडिकल सर्टिफिकेट दिखाते हुए नसीम अहमद ने बताया कि वह दिव्यांग है। दोनों हाथ नहीं उठते। उसका दिल्ली एम्स में उपचार होना है, लेकिन वहां नहीं ले जाया जाता। जेल में उसका उपचार संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वह हार नहीं मानेंगे। भले ही उन्हें सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़नी पड़े।
अब सीजेएम कोर्ट में चल रहा है मामला
मुजफ्फरनगर। कवाल कांड में मरे शाहनवाज की हत्या के मामले में उसके पिता नसीम ने मृतक सचिन और गौरव के अलावा उनके पांच परिजनों को भी नामजद कराया था। शासन द्वारा मामले की जांच एसआईसी (स्पेशल इंवेस्टिगेशन सेल) को सौंपी थी। एसआईसी ने जांच उपरांत शाहनवाज हत्याकांड में यह तर्क देकर एफआर लगा दी थी कि झगडे़ में शाहनवाज की मौत हुई।
झगडे़े के दौरान मौके पर सचिन और गौरव ही थी, इन दोनों की भी उसी समय मौत हो गई थी। मृतक शाहनवाज के पिता सलीम की ओर से शाहनवाज हत्याकांड का निजी परिवाद 16 नवंबर 2015 को कोर्ट में दाखिल किया था, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए 30 मई 2018 को आरोपियों रविंद्र सिंह, बिशन, प्रहलाद, तेंदू, देवेंद्र और जितेंद्र को तलब किया था। आरोपियों को पेश नहीं होने पर कोर्ट से सभी आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो चुके हैं। इस मामले में सीजेएम कोर्ट में 11 फरवरी की तारीख लगी है।
छावनी में तब्दील रहा कचहरी परिसर
कवाल कांड में ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या के मामले के आरोपियों को दोषी करार दिए जाने से पूर्व कचहरी परिसर को पूरी तरह सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। भारी फोर्स के साथ अफसर खुद मुस्तैदी से मोर्चा संभाले रहे। दोषी करार दिए गए आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के लिए लाने के दौरान किसी को भी कचहरी परिसर में आने नहीं दिया गया।
जानसठ के गांव कवाल के मजरा मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन व गौरव की हत्या के मामले में एडीजे-7 की कोर्ट में बुधवार को सात अभियुक्तों को दोषी करार दिया गया। सुनवाई शुरू होने से पहले मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एहतियातन जिले में धारा-144 लागू करते हुए पुलिस फोर्स को मुस्तैद कर दिया गया था। सिविल लाइंस थाना प्रभारी इंस्पेक्टर डीके त्यागी पूरी टीम के साथ कचहरी परिसर में मौजूद रहकर सुबह से ही स्थिति पर नजर रखे रहे। इनके साथ ही पीएसी जवानों को भी सतर्क कर दिया गया था।
दोपहर करीब 2.20 बजे जैसे ही कवाल कांड के आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच लाया गया, अफसरों ने टीम के साथ कचहरी के मुख्य गेट पर मोर्चा संभाल लिया। हत्यारोपियों के कोर्ट में लाने के बाद किसी को भी बिना वजह के कचहरी परिसर में एंट्री नहीं दी गई। यहां तक कि हत्याभियुक्तों के परिजनों व ग्रामीणों को भी मुख्य गेट के बाहर ही रोक दिया गया।
कचहरी परिसर में हर आने-जाने वाले व्यक्ति और उसके सामान की चेकिंग की गई। न्यायाधीश द्वारा आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद हत्याभियुक्तों को कड़ी सुरक्षा में फिर से जेल भेज दिया गया। अब शुक्रवार को हत्यारोपियों की सजा पर सुनवाई के लिए पुलिस-प्रशासन फिर से सुरक्षा बंदोबस्त की तैयारी में जुट गया है।
जानसठ के गांव कवाल के मजरा मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन व गौरव की हत्या के मामले में एडीजे-7 की कोर्ट में बुधवार को सात अभियुक्तों को दोषी करार दिया गया। सुनवाई शुरू होने से पहले मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एहतियातन जिले में धारा-144 लागू करते हुए पुलिस फोर्स को मुस्तैद कर दिया गया था। सिविल लाइंस थाना प्रभारी इंस्पेक्टर डीके त्यागी पूरी टीम के साथ कचहरी परिसर में मौजूद रहकर सुबह से ही स्थिति पर नजर रखे रहे। इनके साथ ही पीएसी जवानों को भी सतर्क कर दिया गया था।
दोपहर करीब 2.20 बजे जैसे ही कवाल कांड के आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच लाया गया, अफसरों ने टीम के साथ कचहरी के मुख्य गेट पर मोर्चा संभाल लिया। हत्यारोपियों के कोर्ट में लाने के बाद किसी को भी बिना वजह के कचहरी परिसर में एंट्री नहीं दी गई। यहां तक कि हत्याभियुक्तों के परिजनों व ग्रामीणों को भी मुख्य गेट के बाहर ही रोक दिया गया।
कचहरी परिसर में हर आने-जाने वाले व्यक्ति और उसके सामान की चेकिंग की गई। न्यायाधीश द्वारा आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद हत्याभियुक्तों को कड़ी सुरक्षा में फिर से जेल भेज दिया गया। अब शुक्रवार को हत्यारोपियों की सजा पर सुनवाई के लिए पुलिस-प्रशासन फिर से सुरक्षा बंदोबस्त की तैयारी में जुट गया है।
पीड़ित परिजनों से मिले सांसद बालियान
कवाल कांड में मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन और गौरव के हत्याकांड में कोर्ट के निर्णय को लेकर पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान भी कचहरी पहुंचे। उन्होंने केस के अधिवक्ता अनिल जिंदल से भेंट की। मलिकपुरा से आए सचिन और गौरव के परिजनों, रिश्तेदारों और अन्य लोगों से बातचीत की। हालांकि कोर्ट द्वारा दोहरे हत्याकांड में सभी सात आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के निर्णय पर डॉ बालियान ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इस दौरान गौरव के पिता रविंद्र सिंह, पूर्व ब्लाक प्रमुख विरेंद्र सिंह कुतुबपुर, किसान नेता उद्यम सिंह आदि मौजूद रहे।
कवाल व मलिकपुरा में भी मुस्तैद रही फोर्स
गांव कवाल के सचिन-गौरव हत्याकांड में कोर्ट के फैसला आने के मद्देनजर कवाल व मलिकपुरा में बुधवार को एहतियातन भारी फोर्स मौजूद रही। एसडीएम व सीओ जानसठ खुद पांच थानों की फोर्स व पीएसी के साथ गांव में डेरा डाले रहे। पूरे गांव के साथ ही दोनों मुख्य मार्गों को भी इस दौरान कड़ी निगरानी में रखा गया।
जानसठ कोतवाली क्षेत्र का पानीपत-खटीमा राजमार्ग स्थित गांव कवाल व उसके मजरे मलिकपुरा में बुधवार का माहौल बदला-बदला रहा। सुबह से ही भारी पुलिस बल व पीएसी ने दोनों गांवों के मुख्य मार्गों के साथ ही प्रमुख स्थलों को अपनी निगरानी में ले लिया। जानसठ कोतवाली के साथ ही मीरापुर, रामराज, ककरौली व सिखेड़ा थाना पुलिस के साथ ही पीएसी ने भी दिन निकलते ही गांव में डेरा डाल दिया था। कवाल के मुख्यमार्ग के साथ ही स्कूल वाले दूसरे मार्ग पर भी फोर्स तैनात रही। शाहनवाज के पिता सलीम के घर पर पुलिस बल के साथ ही गांव के मुख्य चौराहे पर पीएसी मौजूद रही। वहीं, गांव मलिकपुरा में एसडीएम जानसठ विजय कुमार और सीओ सोमेंद्र सिंह नेगी खुद फोर्स के साथ मौजूद रहे।
मुख्य चौराहे पर लगी पैंठ, गांव रहा सुनसान
जानसठ। गांव कवाल में सचिन-गौरव हत्याकांड का फैसला आने के मद्देनजर बरती गई ऐहतियात के दौरान जहां भारी पुलिस फोर्स मौजूद रहा। वहीं, गांव में आम दिनों के बजाय सन्नाटा पसरा रहा। शाहनवाज के पिता सलीम के घर समेत सभी मुख्य मार्ग सुनसान रहे। हालांकि, मुख्य चौराहे पर पीएसी की मौजूदगी में ही साप्ताहिक पैंठ लगीं, लेकिन खरीदार हर बार से अलग बेहद कम तादाद में ही नजर आए। कुछ स्थानों पर ग्रामीण पांच-छह की संख्या में बैठकर हृदयविदारक वारदात और इसे लेकर आने वाले कोर्ट के संभावित फैसले को लेकर चर्चा में भी मशगूल दिखाई दिए। यह बात ओर रही, कि कोई भी ग्रामीण इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं दिखा।
जानसठ कोतवाली क्षेत्र का पानीपत-खटीमा राजमार्ग स्थित गांव कवाल व उसके मजरे मलिकपुरा में बुधवार का माहौल बदला-बदला रहा। सुबह से ही भारी पुलिस बल व पीएसी ने दोनों गांवों के मुख्य मार्गों के साथ ही प्रमुख स्थलों को अपनी निगरानी में ले लिया। जानसठ कोतवाली के साथ ही मीरापुर, रामराज, ककरौली व सिखेड़ा थाना पुलिस के साथ ही पीएसी ने भी दिन निकलते ही गांव में डेरा डाल दिया था। कवाल के मुख्यमार्ग के साथ ही स्कूल वाले दूसरे मार्ग पर भी फोर्स तैनात रही। शाहनवाज के पिता सलीम के घर पर पुलिस बल के साथ ही गांव के मुख्य चौराहे पर पीएसी मौजूद रही। वहीं, गांव मलिकपुरा में एसडीएम जानसठ विजय कुमार और सीओ सोमेंद्र सिंह नेगी खुद फोर्स के साथ मौजूद रहे।
मुख्य चौराहे पर लगी पैंठ, गांव रहा सुनसान
जानसठ। गांव कवाल में सचिन-गौरव हत्याकांड का फैसला आने के मद्देनजर बरती गई ऐहतियात के दौरान जहां भारी पुलिस फोर्स मौजूद रहा। वहीं, गांव में आम दिनों के बजाय सन्नाटा पसरा रहा। शाहनवाज के पिता सलीम के घर समेत सभी मुख्य मार्ग सुनसान रहे। हालांकि, मुख्य चौराहे पर पीएसी की मौजूदगी में ही साप्ताहिक पैंठ लगीं, लेकिन खरीदार हर बार से अलग बेहद कम तादाद में ही नजर आए। कुछ स्थानों पर ग्रामीण पांच-छह की संख्या में बैठकर हृदयविदारक वारदात और इसे लेकर आने वाले कोर्ट के संभावित फैसले को लेकर चर्चा में भी मशगूल दिखाई दिए। यह बात ओर रही, कि कोई भी ग्रामीण इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं दिखा।