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प्रकृति में नव उल्लास का प्रतीक वसंत : राजेश सेठी
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- आर्य समाज थापरनगर की ओर से हुआ सत्संग का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आर्य समाज थापरनगर में रविवारीय सत्संग में वसंत पंचमी पर्व के उपलक्ष्य में साप्ताहिक सत्संग हुआ। इसमें वक्ता राजेश सेठी ने कहा कि वसंत ऋतु प्रकृति में नव उल्लास और परिवर्तन का प्रतीक है। वसंत पंचमी पर्व बाल हकीकत राय के बलिदान को भी याद दिलाता है। यह धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए सर्वस्व अर्पण करने की प्रेरणा देता है।
राजेश सेठी ने बताया कि मात्र 14 वर्ष की आयु में बाल हकीकत राय ने मुगल सल्तनत के अत्याचारों का विरोध करते हुए धर्म परिवर्तन से इनकार कर दिया और अपने प्राणों का बलिदान दिया। सेठी ने कहा कि ऋषियों के ज्ञान को आत्मसात कर जीवन में उतारना ही सच्ची सरस्वती पूजा है। वेद ज्ञान भी सरस्वती का ही रूप है।
इस अवसर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को स्मरण करते हुए उन्होंने बताया कि नेताजी ने अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को प्राथमिकता दी और अनेक बार जेल गए। विदेश जाकर आजाद हिंद फौज का गठन कर देश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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कार्यक्रम में प्रीति सेठी, मंजु वासुदेवा, सुनीता, सुमन आनंद, सुधा सिंह, अपर्णा, चांद ग्रोवर और धर्मवीर ने भजन प्रस्तुत किए। आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ संपन्न हुआ। यजमान सुनीता व मुकेश कन्नौजिया रहे। इस अवसर पर चंद्र वासुदेवा, करुणा सागर बाली, अवधेश, संजय मदान, धर्म वीर, भानु बत्रा, प्रमोद कुमार सिंह, विकास शर्मा रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आर्य समाज थापरनगर में रविवारीय सत्संग में वसंत पंचमी पर्व के उपलक्ष्य में साप्ताहिक सत्संग हुआ। इसमें वक्ता राजेश सेठी ने कहा कि वसंत ऋतु प्रकृति में नव उल्लास और परिवर्तन का प्रतीक है। वसंत पंचमी पर्व बाल हकीकत राय के बलिदान को भी याद दिलाता है। यह धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए सर्वस्व अर्पण करने की प्रेरणा देता है।
राजेश सेठी ने बताया कि मात्र 14 वर्ष की आयु में बाल हकीकत राय ने मुगल सल्तनत के अत्याचारों का विरोध करते हुए धर्म परिवर्तन से इनकार कर दिया और अपने प्राणों का बलिदान दिया। सेठी ने कहा कि ऋषियों के ज्ञान को आत्मसात कर जीवन में उतारना ही सच्ची सरस्वती पूजा है। वेद ज्ञान भी सरस्वती का ही रूप है।
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इस अवसर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को स्मरण करते हुए उन्होंने बताया कि नेताजी ने अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को प्राथमिकता दी और अनेक बार जेल गए। विदेश जाकर आजाद हिंद फौज का गठन कर देश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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कार्यक्रम में प्रीति सेठी, मंजु वासुदेवा, सुनीता, सुमन आनंद, सुधा सिंह, अपर्णा, चांद ग्रोवर और धर्मवीर ने भजन प्रस्तुत किए। आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ संपन्न हुआ। यजमान सुनीता व मुकेश कन्नौजिया रहे। इस अवसर पर चंद्र वासुदेवा, करुणा सागर बाली, अवधेश, संजय मदान, धर्म वीर, भानु बत्रा, प्रमोद कुमार सिंह, विकास शर्मा रहे।