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लॉक डाउन में ऐसा उजाड़ की रोटियों के लाले पड़ गए

Sun, 03 May 2020 01:27 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 03 May 2020 01:27 AM IST
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Speak to the police, kill me brother or do anything, but let me go home
पुलिस से बोलते हैं भैया मार लो या कुछ भी कर लो, पर घर जाने दो
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मेरठ। कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन ने कुछ परिवारों को ऐसा दर्द दिया है, जिसे वह शायद ही भूल सकें। ऐसे भी मजबूर लोग हैं, जिनके पास अब पेट भरने के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं। कामकाज सब ठप हैं। ऐसे में वह अपने पैतृक स्थान पर लौटना ही उचित मान रहे हैं। लॉकडाउन में कमाई का जरिया बंद होने के बाद वह इसके खुलने का इंतजार करते रहे, लेकिन शुक्रवार शाम लॉकडान 17 मई तक बढ़ाए जाने के बाद वह अपने जुगाड़ वाहनों पर हरिद्वार से राजस्थान के लिए निकल पडे़। मेरठ से गुजर रहे इन परिवारों ने अमर उजाला संवाददाता से अपना दर्द साझा किया।
राजस्थान के उदयपुर निवासी 20 से अधिक परिवार हरिद्वार में मूर्ति बनाने का काम करते हैं। इनमें परिवार के मुखिया के अलावा महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। जो हरिद्वार में अलग-अलग स्थानों पर सड़क किनारे रहते थे। लेकिन लॉकडाउन के चलते मूर्ति बनाने का काम बंद हो चुका है। शनिवार को 10 से अधिक परिवार जुगाड़ वाहनों से हरिद्वार से अपने घर उदयपुर जा रहे थे। एक-एक जुगाड़ वाहन में कई-कई लोग शामिल थे। 50 वर्षीय रामजीवन ने बताया कि वह पिछले 28 साल से हरिद्वार में मूर्ति बनाने का काम करता है। इसी से रोजी-रोटी चलती है। पत्नी के अलावा बच्चे, भाई और अन्य लोग भी यही कार्य करते हैं। भगवान की मूर्तियां ऑन डिमांड के साथ ही ठेले और अन्य वाहनों में रखकर बेचने का कार्य करते हैं। 40 दिन से ज्यादा हो गए हैं, कुछ काम नहीं है। न खाने के लिए अनाज है और न ही रहने के लिए कोई जगह। जहां झोपड़ियां थी, अब उनमें रहकर भी क्या करें। भूखा ही मरना है, छोटे-छोटे बच्चे हैं। लॉकडान बार-बार बढ़ने के कारण वह किसी तरह अपने घर के लिए चल पड़े।
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महिला लतेश ने बताया कि उसके पांच बच्चे हैं। कांवड़ यात्रा या अन्य किसी भी त्यौहार पर हरिद्वार में मूर्तियों की बहुत मांग रहती है। अब रोज मांग कर खाना पड़ रहा है। हरिद्वार में सब कुछ बंद है। ऐसे में बच्चों और पति के साथ गांव में जाना ही उचित समझा। पता नहीं कि इतनी दूर कैसे पहुंचा जाएगा। जो पैसे थे, वह भी डेढ़ महीने में खत्म हो चुके हैं।
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जग मालती और उसके पति किरन ने बताया कि बचपन से ही सिर्फ मूर्ति बनाने का काम किया है। लेकिन अब और क्या काम करें। रहने की समस्या। भूख से कब तक ऐसे ही रहते रहेंगे। पुलिस मिलती है तो हाथ जोड़ लेते हैं कि भैया मार लो या कुछ भी कर लो, पर घर जाने के लिए यह जुगाड़ ही साधन है।
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