विश्व निद्रा दिवस: नींद के लिए हर साल दो करोड़ रुपये की दवाएं गटक रहे मेरठवासी, सर्वे में हुआ बड़ा खुलासा
विश्व निद्रा (नींद) दिवस आज: अनिद्रा के शिकार लोगों का मन बीमार हो रहा। 49 प्रतिशत को निकली नींद न आने की बीमारी, कम सोने के पीछे मोबाइल भी बड़ा कारण।
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मेरठ खैरनगर के विजय दिन में निजी कंपनी में नौकरी करते हैं और रात में ओटीटी पर वेब सीरीज देखते हैं। नतीजतन, उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती और काफी समय से ऐसा कर रहे हैं तो अब चाहकर भी पूरी नींद नहीं ले पा रहे। चिड़चिड़े हो गए हैं और सोने के लिए नींद की गोलियां ले रहे हैं। अपनी परेशानी लेकर जिला अस्पताल के मनोरोग विभाग में आए विजय ऐसे अकेले नहीं हैं। एक जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2022 तक यहां आए 11 हजार मरीजों पर किए गए अवलोकन में 49 फीसदी लोग मानसिक बीमारी के साथ साथ नींद न आने की बीमारी इनसोम्निया के भी शिकार निकले हैं।
इस संबंध में जागरूकता फैलाने के लिए साल 2008 से मार्च के हर तीसरे शुक्रवार को विश्व निद्रा दिवस मनाया जा रहा है। जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ कमलेंद्र किशोर ने बताया कि स्टडी में पता चला है कि इनमें काफी संख्या में ऐसे मरीज हैं, जो किसी न किसी कारण से तनाव में रहते थे, जिस कारण उन्हें नींद नहीं आती थी या नींद आने के समय मोबाइल-टीवी या किसी अन्य वजह से सोते नहीं थे।
इनमें ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने नींद के लिए लंबे समय तक स्लीपिंग पिल्स (नींद की गोलियां) ली थीं। इनमें डिप्रेशन के शिकार 40 प्रतिशत थे। माइग्रेन के 35, स्कीजोफ्रेनिया के पांच, अल्जाइमर के पांच, अत्यधिक गुस्सा आने के तीन, मिर्गी के चार, हिस्टीरिया तीन व नशे की लत के पांच फीसदी मरीज निकले। उन्होंने बताया कि इन सभी में से करीब 49 प्रतिशत को नींद न आने की भी बीमारी थी। 10 फीसदी के मन में आत्महत्या का विचार आया। 15 फीसदी में घबराहट या फोबिया मिला। दो फीसदी के व्यवहार में दिक्कत थी।
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नींद के लिए हर साल दो करोड़ रुपये की दवाएं गटक रहे मेरठी
जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल ने बताया कि जिले में करीब पांच हज़ार मेडिकल स्टोर हैं। एक अनुमान के मुताबिक हर साल करीब दो करोड़ रुपये से ज्यादा की नींद से संबंधित गोलियां लोग खाते हैं।
6 से 8 घंटे की नींद न लेने से शरीर हो जाता है बीमार
जिला अस्पताल की क्लिनिकल साइकलोजिस्ट (नैदानिक मनोविज्ञानी) डॉ विभा नागर ने बताया कि अगर छह से 8 घन्टे की नींद रोजाना लंबे समय तक न ली जाए तो शरीर बीमारियों से घिर सकता है। अनिद्रा की वजह से उच्च रक्तचाप, दिल के दौरे और मस्तिष्क आघात जैसी जानलेवा समस्याओं से ग्रस्त भी हो सकते हैं।
कम सोने का सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य पर
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि राणा बताते हैं कि कम सोने का सीधा असर मानसिक स्थिति पर पड़ता है। नींद पूरी नहीं होने पर दिमाग तरोताजा नहीं हो पाता है। जिस समय हम सोते हैं, हमारे कई अंग शरीर के विषाक्त पदार्थों को साफ करने का काम करते हैं। इससे हम तरोताजा रहते हैं। नींद पूरी न होने से ये विषाक्त पदार्थ नहीं निकलते।
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बदल गई दिनचर्या, बढ़ गई बीमारियां
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही ने बताया कि नींद न आने की सबसे बड़ी वजहों में बदला हुआ लाइफ स्टाइल है। पहले लोग शारीरिक मेहनत करते थे। पसीना निकलता था, सूरज की रोशनी में रहते थे। रात में छतों पर सोते थे। शाम को जल्दी खाना खा लेते थे। अब सब उल्टा है, लोजी मोबाइल की लत के शिकार हो गए हैं, जिसका असर नींद और सेहत पर पड़ रहा है।
गहरी नींद चाहिए तो यह बरतें एहतियात
- सोने और जागने का समय तय करें।
- सोते समय मोबाइल से दूर रहें।
- नींद नहीं आ रही तो गुनगुने पानी से पैर धो लें।
- दिन में ज्यादा न सोएं, रात में ही पूरी नींद लें।
- चाय-कॉफी का ज्यादा इस्तेमाल न करें।
- रोजाना छह से आठ घंटे की नींद जरूरी लें।
- बिना चिकित्सक की सलाह के नींद की गोली न लें।