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मेडिकल कॉलेज में शव बदलने का मामला: छह स्टाफ नर्स और चार वार्ड ब्वॉय पर गिरी गाज

Tue, 08 Sep 2020 12:33 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Tue, 08 Sep 2020 12:33 PM IST
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Six staff nurses and four ward buoys were fired in negligence case of medical college at Meerut
लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला

मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में शव बदलने के मामले में छह स्टाफ नर्स और चार वार्ड ब्वॉय पर गाज गिर गई है। उन्हें ड्यूटी से हटा दिया गया है। सिस्टर इंचार्ज पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक को पत्र लिखा गया है, जबकि सात चिकित्सकों को भी चेतावनी दी गई है। चेतावनी में कहा गया है कि इस तरह की पुनरावृति हुई तो उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।  

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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि चिकित्सकों की तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर सोमवार को यह कार्रवाई की गई है। सिस्टर इंचार्ज रंजना बंसवाल को रात में ही हटा दिया गया था, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति कर चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक को लिखा गया है। पूरे मामले के दौरान ड्यूटी पर रहीं सेवा प्रदाता कंपनी अवनी परिधि की छह स्टाफ नर्स को हटाकर दूसरी स्टाफ नर्स तैनात करने के लिए भी लिखा गया है। 
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वहीं चार वार्ड ब्वाय जो विश्वा कंपनी के हैं, उनको हटाकर दूसरे वार्ड ब्वाय तैनात करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा ड्यूटी पर रहे सात जूनियर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को चेतावनी दी गई है कि वे सजगता और निष्ठा से कार्य करें। अगर इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति होती है तो उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। 
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जांच रिपोर्ट दे रही गवाही... हर कदम पर हुई लापरवाही   
मेडिकल कॉलेज में शव बदलने के मामले में जांच रिपोर्ट से साफ है कि हर कदम पर लापरवाही बरती गई है। चिकित्सीय स्टाफ और कर्मचारी अपनी-अपनी जिम्मेदारी से बचते रहे और लापरवाही होती रही। किसी ने भी शवों की सुध नहीं ली और वार्ड ब्वाय ने गलत चिट चिपका दी। नतीजतन, दो परिवारों को तमाम परेशानियों से गुजरना पड़ा। डॉ. विनय अग्रवाल, डॉ. विभु साहनी और और डॉ. तुंगवीर सिंह आर्य की तीन सदस्य जांच समिति ने 18 लोगों के लिखित और मौखिक बयान लिए और सीसीटीवी फुटेज देखी। इसके बाद रिपोर्ट प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार को दी। प्राचार्य ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में घोर लापरवाही हुई है। जांच में भी यही आया है। कोरोना मरीजों के शवों के प्रोटोकॉल का सही से पालन नहीं किया गया है।

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लापरवाही - 1
सिस्टर इंचार्ज रंजना बंसवाल की ड्यूटी सुबह 9:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक थी लेकिन वह 2:00 बजे ही वहां से चली गईं। मरीजों की मृत्यु उन्हीं की ड्यूटी के दौरान हुई थी। उन्हें उसका निस्तारण कराने के बाद चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

लापरवाही - 2
शव मृत्यु के 30 से 45 मिनट के भीतर मोर्चरी पहुंच जाना चाहिए था लेकिन गुरुवचन और यशपाल के शव दो घंटे तक मोर्चरी पहुंचाए गए। दूसरी पाली के लोगों ने शवों को पैक किया। इस दौरान एक-दूसरे के शव पर वार्ड ब्वाय ने गलत चिट लगा दी।

लापरवाही - 3
शवों की पैकिंग के दौरान टीम लीडर डॉक्टर आईसीयू में मरीज देखने में व्यस्त थे। उन्होंने भी इस तरफ ध्यान नहीं दिया, जबकि वार्ड ब्वाय के चिट लगाने के दौरान सिस्टर इंचार्ज, स्टाफ नर्स या फिर ड्यूटी इंचार्ज चिकित्सक को वहां मौजूद होना चाहिए था। 

लापरवाही - 4
यशपाल की परिजनों को उनकी मौत का पता चला तो उन्होंने कहा कि वह शव को अभी लेने आ रहे हैं। शव को मोर्चरी मत भेजिए। लेकिन वह दो घंटे के बाद आए। इस दौरान शव को मोर्चरी में रखने के बजाय होल्डिंग एरिया में ही रखा गया।

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