चर्चित महामंडलेश्वर हत्याकांड: छह साल में पुख्ता सुबूत पेश नहीं कर पाई पुलिस, आरोपी हुए दोषमुक्त
चर्चित महामंडलेश्वर हत्याकांड में पुलिस छह साल बाद भी हत्यारोपी को ढूंढ नहीं पाई है। वहीं कोर्ट में पुलिस द्वारा कोई पुख्ता सुबूत पेश नहीं किया गया, जिसके चलते उनको कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया।
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चर्चित महामंडलेश्वर हत्याकांड में मेरठ पुलिस की लापरवाही की पोल खुल गई। महामंडलेश्वर के हत्यारोपी नजाकत उर्फ पप्पू और ड्राइवर नटवर को छह साल बाद भी मेरठ पुलिस ढूंढ नहीं पाई है। नामजद छह आरोपियों के खिलाफ पुलिस कोर्ट में पुख्ता सुबूत पेश नहीं कर पाई, जिसके चलते गुरुवार को उनको कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया।
तीन मई 2016 में नौचंदी थाना क्षेत्र के फूलबाग कॉलोनी निवासी महामंडलेश्वर राजेंद्र स्वरूप का अपहरण हुआ था। अधिवक्ता अनुज कुमार शर्मा ने बताया कि राजेंद्र स्वरूप के बेटे पारस ने नौचंदी थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें बताया कि उसके पिता राजेंद्र स्वरूप महाराज रात्रि 9:30 बजे अपने ड्राइवर नटवर के साथ गए थे। नटवर गाड़ी लेकर चला तो पीछे से सफेद रंग की अल्टो आई और दुर्गा प्रोविजन पर रुकी। जिसमें दो अज्ञात लोग उतरे और अपने आप को एसटीएफ का बताकर हथियार दिखाकर महामंडलेश्वर को कार में बैठा लिया और बसपा कार्यालय की तरफ लेकर भाग गए। जिसके बाद वादी द्वारा थाने में अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
पांच मई 2016 को वादी मुकदमा को उसके पिता राजेंद्र स्वरूप की लाश थाना मवाना के ग्राम नगला गोसाई में मिलने की सूचना मिली। जिसके बाद वादी ने शव की शनाख्त की। पुलिस ने आरोपी धीरज गुर्जर, विशु अग्रवाल उर्फ आदर्श, संजय सिंह, दर्शन सिंह, परविंदर उर्फ राणा राहुल बैंसला, राहुल मोरल को गिरफ्तार किया था। विवेचक ने मुकदमे में आरोप पत्र दाखिल किया था। आरोपी पक्ष के अधिवक्ता अनुज शर्मा ने बताया कि न्यायालय में आरोपियों की ओर से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया जा रहा है। उनके खिलाफ कोई सबूत पत्रावली पर मौजूद नहीं है। न्यायालय विशेष न्यायाधीश यूपी मेरठ प्रमोद कुमार तृतीय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपियों को दोषमुक्त किया।
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नजाकत उर्फ पप्पू था मुख्य आरोपी
महामंडलेश्वर की अपहरण के बाद हत्या के मामले में पुलिस की जांच में कुख्यात नजाकत उर्फ पप्पू मुख्य आरोपी बताया था। पुलिस ने दावा किया था कि 2015 में नजाकत कचहरी से पुलिस कस्टडी से फरार हो गया था। फरारी के बाद वह सबसे पहले महामंडलेश्वर के पास पहुंचा। महामंडलेश्वर के ड्राइवर नटवर से नजाकत की सेटिंग थी। तत्कालीन एसएसपी दिनेश चंद दुबे ने बताया था कि दस लाख रुपये के लेनदेन को लेकर महामंडलेवर की हत्या हुई है। दर्शन गुर्जर का नाम भी सामने आया था।
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पुलिस की कमजोर विवेचना
पुलिस ने मामले में कमजोर विवेचना की। जिसके चलते आरोपियों को कोर्ट में राहत मिली है। बताया है कि पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ एक भी सुबूूत नहीं मिला। मुख्य आरोपियों को पुलिस नहीं ढूंढ पाई है, जिसके चलते कोर्ट ने उनको दोषमुक्त किया है।