{"_id":"6a42857cd933bab788008423","slug":"sit-in-protest-by-advocates-and-document-writers-continues-meerut-news-c-44-1-smrt1055-112834-2026-06-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: अधिवक्ताओं व दस्तावेज लेखकों का धरना जारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: अधिवक्ताओं व दस्तावेज लेखकों का धरना जारी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- ई-पंजीकरण और निजीकरण का कर रहे विरोध
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। उत्तर प्रदेश सरकार की ई-पंजीकरण और निजीकरण व्यवस्था के विरोध में बार एसोसिएशन सरधना एवं दस्तावेज लेखक एसोसिएशन का धरना सोमवार को भी जारी रहा। अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों ने रजिस्ट्री कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर सरकार से आदेश वापस लेने की मांग की।
वक्ताओं ने कहा कि ई-पंजीकरण और निजीकरण की व्यवस्था लागू होने से आम लोगों के साथ-साथ अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों को भी कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। इस व्यवस्था से पारंपरिक कार्यप्रणाली प्रभावित होगी और रोजगार पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार कर आदेश निरस्त करने की मांग की।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट आरिफ अली, महामंत्री संजीव पंवार, मोहम्मददीन, शबाना मलिक और पोयम चंदेल ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। दस्तावेज लेखक एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश गुप्ता, सचिव छोटन लाल जैन, रामप्रसाद, राजकमल, प्रदीप त्यागी, राजेंद्र सैनी, संजय शर्मा, कैलाश पाल और सुरेंद्र शर्मा सहित बड़ी संख्या में दस्तावेज लेखक भी धरने में शामिल रहे।
विज्ञापन
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही आदेश वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। उत्तर प्रदेश सरकार की ई-पंजीकरण और निजीकरण व्यवस्था के विरोध में बार एसोसिएशन सरधना एवं दस्तावेज लेखक एसोसिएशन का धरना सोमवार को भी जारी रहा। अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों ने रजिस्ट्री कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर सरकार से आदेश वापस लेने की मांग की।
वक्ताओं ने कहा कि ई-पंजीकरण और निजीकरण की व्यवस्था लागू होने से आम लोगों के साथ-साथ अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों को भी कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। इस व्यवस्था से पारंपरिक कार्यप्रणाली प्रभावित होगी और रोजगार पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार कर आदेश निरस्त करने की मांग की।
विज्ञापन
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट आरिफ अली, महामंत्री संजीव पंवार, मोहम्मददीन, शबाना मलिक और पोयम चंदेल ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। दस्तावेज लेखक एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश गुप्ता, सचिव छोटन लाल जैन, रामप्रसाद, राजकमल, प्रदीप त्यागी, राजेंद्र सैनी, संजय शर्मा, कैलाश पाल और सुरेंद्र शर्मा सहित बड़ी संख्या में दस्तावेज लेखक भी धरने में शामिल रहे।
विज्ञापन
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही आदेश वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।