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शुभकामना अस्पताल : धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने पांच को हिरासत में लिया
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मेरठ। आरटीओ कार्यालय के पास स्थित शुभकामना अस्पताल में मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर धोखाधड़ी करने के मामले में नौचंदी पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पांच लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें अस्पताल के एक पार्टनर समेत पांच पूर्व कर्मचारी शामिल हैं जिनसे पुलिस पूछताछ कर रही है।
मंगलपांडे नगर स्थित बजाज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड कार्यालय के रीजनल हेड सुधीर मिश्रा ने नौचंदी थाने में शुभकामना अस्पताल के संचालक मोहम्मद अख्तर, पार्टनर मीनू चौधरी, डाॅ. रचना और डाॅ. अनिल लोधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। सुधीर मिश्रा ने एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह को बताया कि शुभकामना अस्पताल से तीन मरीज राजीव अरोड़ा, कपिल जैन और नेहा के कैशलेस इंश्योरेंस क्लेम की फाइल कंपनी ऑफिस पहुंची थी। जांच में तो सामने आया कि मरीज अस्पताल में भर्ती नहीं हुए। उनका क्लेम फर्जी तरीके से लेने की साजिश रचकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी की गई।
इस मामले में एसओजी टीम और नौचंदी पुलिस जांच पड़ताल कर रही है। अब नौचंदी पुलिस ने चार पूर्व कर्मचारी समेत पांच लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें एक अस्पताल में पार्टनर भी है। सभी से पूछताछ की जा रही है। वर्तमान में यह कर्मचारी गढ़ रोड स्थित एक दूसरे अस्पताल में नौकरी कर रहे हैं। एसएसपी डाॅ. विपिन ताडा ने बताया कि सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। वहीं दूसरी ओर सीएमओ कार्यालय की एक टीम अस्पताल पहुंची और फाइलों की पड़ताल की।
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मरीज की मिलभगत तो नहीं?
पुलिस इस मामले में मरीजों की भूमिका की भी जांच कर रही है। दरअसल मरीज कह रहे है कि वह भर्ती नहीं हुए। ऐसे में उनके आधार कार्ड से जुड़े मोबाइल पर एसएमएस कैसे पहुंचा। वहीं कंपनी ईमेल वेरिफिकेशन भी करती है। ऐसे में पुलिस मरीजों की मिलीभगत की भी जांच कर रही है।
कंपनी के आडिट में पकड़ गया फर्जीवाड़ा
सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी ने बताया कि हर साल कंपनी का ऑडिट होता है। ऑडिट में ही यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है। सीओ ने बताया कि जब भी कोई मरीज भर्ती होता है तो जांच के लिए कंपनी की टीम जाती है इसके बाद ही क्लेम पास होता है। ऐसे में कंपनी के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
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दस महीने पुराना मामला है। टीपीए में कार्यरत कर्मचारियों ने पॉलिसी कंपनी से रुपये लेने की साजिश रची थी। मेरी जानकारी में यह मामला आने के बाद कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया था। पुलिस ने सभी को दूसरे अस्पताल से पकड़ा है। डाक्टर और अस्पताल संचालक की इसमें कोई गलती नहीं है। पुलिस की जांच में पूरी मदद की जाएगी। पॉलिसी कंपनी की टीम की भूमिका भी संदिग्ध लग रही है। - मीनू चौधरी, अस्पताल संचालक
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मंगलपांडे नगर स्थित बजाज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड कार्यालय के रीजनल हेड सुधीर मिश्रा ने नौचंदी थाने में शुभकामना अस्पताल के संचालक मोहम्मद अख्तर, पार्टनर मीनू चौधरी, डाॅ. रचना और डाॅ. अनिल लोधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। सुधीर मिश्रा ने एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह को बताया कि शुभकामना अस्पताल से तीन मरीज राजीव अरोड़ा, कपिल जैन और नेहा के कैशलेस इंश्योरेंस क्लेम की फाइल कंपनी ऑफिस पहुंची थी। जांच में तो सामने आया कि मरीज अस्पताल में भर्ती नहीं हुए। उनका क्लेम फर्जी तरीके से लेने की साजिश रचकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी की गई।
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इस मामले में एसओजी टीम और नौचंदी पुलिस जांच पड़ताल कर रही है। अब नौचंदी पुलिस ने चार पूर्व कर्मचारी समेत पांच लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें एक अस्पताल में पार्टनर भी है। सभी से पूछताछ की जा रही है। वर्तमान में यह कर्मचारी गढ़ रोड स्थित एक दूसरे अस्पताल में नौकरी कर रहे हैं। एसएसपी डाॅ. विपिन ताडा ने बताया कि सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। वहीं दूसरी ओर सीएमओ कार्यालय की एक टीम अस्पताल पहुंची और फाइलों की पड़ताल की।
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मरीज की मिलभगत तो नहीं?
पुलिस इस मामले में मरीजों की भूमिका की भी जांच कर रही है। दरअसल मरीज कह रहे है कि वह भर्ती नहीं हुए। ऐसे में उनके आधार कार्ड से जुड़े मोबाइल पर एसएमएस कैसे पहुंचा। वहीं कंपनी ईमेल वेरिफिकेशन भी करती है। ऐसे में पुलिस मरीजों की मिलीभगत की भी जांच कर रही है।
कंपनी के आडिट में पकड़ गया फर्जीवाड़ा
सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी ने बताया कि हर साल कंपनी का ऑडिट होता है। ऑडिट में ही यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है। सीओ ने बताया कि जब भी कोई मरीज भर्ती होता है तो जांच के लिए कंपनी की टीम जाती है इसके बाद ही क्लेम पास होता है। ऐसे में कंपनी के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
दस महीने पुराना मामला है। टीपीए में कार्यरत कर्मचारियों ने पॉलिसी कंपनी से रुपये लेने की साजिश रची थी। मेरी जानकारी में यह मामला आने के बाद कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया था। पुलिस ने सभी को दूसरे अस्पताल से पकड़ा है। डाक्टर और अस्पताल संचालक की इसमें कोई गलती नहीं है। पुलिस की जांच में पूरी मदद की जाएगी। पॉलिसी कंपनी की टीम की भूमिका भी संदिग्ध लग रही है। - मीनू चौधरी, अस्पताल संचालक