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खगोल विज्ञान और भौतिकी के बीच अंतर दर्शाया
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- सुभारती विश्वविद्यालय में खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी का परिचय विषय पर हुआ ऑनलाइन व्याख्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में मंगलवार को ‘खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी का परिचय’ विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान किया गया। मुख्य वक्ता एआईएसएसएमएस कॉलेज पुणे के एसोसिएट प्रोफेसर और खगोल भौतिकी के शिक्षाविद डॉ. प्रमोद मुसरिफ ने खगोल विज्ञान (आकाशीय पिंडों का अवलोकनात्मक अध्ययन) और खगोल भौतिकी (ब्रह्मांड को समझने के लिए भौतिकी का अनुप्रयोग) के बीच मूलभूत अंतर समझाते हुए व्याख्यान दिया। उन्होंने खगोल विज्ञान के इतिहास पर अंतर्दृष्टि प्रदान की। डॉ. मुसरिफ ने खगोल भौतिकी के भविष्य के दायरे, कॅरिअर के अवसरों और अंतरिक्ष अनुसंधान में कम्प्यूटेशनल विधियों की भूमिका से संबंधित प्रश्नों के उत्तर दिए। व्याख्यान का समन्वय केरल वर्मा सुभारती सांइस कॉलेज के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. अश्विनी कुमार ने किया। डॉ. अनु चौहान ने वक्ता का परिचय देते हुए स्वागत किया और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को व्यापक बनाने में अंतः विषयक शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। इस सत्र से छात्रों की खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी के क्षेत्र में न केवल रुचि बढ़ेगी, वरन उनमें वैज्ञानिक ज्ञान का विस्तार भी होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में मंगलवार को ‘खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी का परिचय’ विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान किया गया। मुख्य वक्ता एआईएसएसएमएस कॉलेज पुणे के एसोसिएट प्रोफेसर और खगोल भौतिकी के शिक्षाविद डॉ. प्रमोद मुसरिफ ने खगोल विज्ञान (आकाशीय पिंडों का अवलोकनात्मक अध्ययन) और खगोल भौतिकी (ब्रह्मांड को समझने के लिए भौतिकी का अनुप्रयोग) के बीच मूलभूत अंतर समझाते हुए व्याख्यान दिया। उन्होंने खगोल विज्ञान के इतिहास पर अंतर्दृष्टि प्रदान की। डॉ. मुसरिफ ने खगोल भौतिकी के भविष्य के दायरे, कॅरिअर के अवसरों और अंतरिक्ष अनुसंधान में कम्प्यूटेशनल विधियों की भूमिका से संबंधित प्रश्नों के उत्तर दिए। व्याख्यान का समन्वय केरल वर्मा सुभारती सांइस कॉलेज के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. अश्विनी कुमार ने किया। डॉ. अनु चौहान ने वक्ता का परिचय देते हुए स्वागत किया और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को व्यापक बनाने में अंतः विषयक शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। इस सत्र से छात्रों की खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी के क्षेत्र में न केवल रुचि बढ़ेगी, वरन उनमें वैज्ञानिक ज्ञान का विस्तार भी होगा।