शिवपाल यादव बोले- बेइज्जती की हद होती है, अब हम 2019 में सभी सीटों पर लड़ेंगे चुनाव
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समाजवादी सेक्युलर मोर्चे का गठन करने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव का दरकावदा गांव में अभिनंदन किया गया। उन्होंने कहा कि दो साल से से वह परिवार और समाजवादी परिवार को जोड़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें बेइज्जत किया गया। उन्होंने भाजपा के संपर्क में रहने की बातों को सिरे से खारिज किया।
यूपी में बागपत के दरकावदा गांव में मोर्चे के प्रदेश सचिव एवं सह प्रभारी पश्चिमी उत्तर प्रदेश इस्लाम प्रधान के आवास पर यादव का अभिनंदन किया गया। उन्होंने कहा कि नेताजी के साथ मिलकर सपा का गठन किया। इसके टूटने का दर्द है। पिछले दो साल से वह परिवार और समाजवादी परिवार को एक रखने की कोशिश करते चले आ रहे थे। लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया। सपा ही नहीं बल्कि अन्य राजनीतिक दलों में भी जो पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपेक्षित हैं, उनका मोर्चे में स्वागत किया जाएगा। हमारा लक्ष्य उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलना है। मोर्चा प्रदेश की सभी लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगा। उन्होंने कहा कि दबे कुचलों ओर वंचितों को उनका हक न्याय दिलाना ही मोर्चे का लक्ष्य है।
भाजपा से साठगांठ होने के आरोप को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया तथा उन्होंने कहा कि उनके सेक्युलर अभियान को बाधित करने का प्रचार है। वह आमजन की लड़ाई लड़ेंगे। किसान और मजदूरों की लड़ाई लड़ेंगे और पीछे नहीं हटेंगे। आचार्य प्रमोद कृष्णम, अंसार रजा, डाक्टर मरगूब त्यागी, इस्लाम प्रधान दरकावदा, फरहत हसन खान, अय्यूब सिद्दकी, हाजी अमीरुद्दीन, अनीस कुरैशी, मकसूद ठेकेदार और अनीस सिद्क्की मौजूद रहे।
हालांकि पूर्व मंत्री शिवपाल यादव को अपने नवगठित सेक्युलर मोर्चा के लिए राजनीतिक ताकत जुटाना आसान नहीं होगा। बागपत जिले में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अलावा उनके पिता मुलायम सिंह यादव और प्रोफेसर राम गोपाल यादव के करीबियों की संख्या ज्यादा है।
विधानसभा चुनाव 2017 से पहले विपक्ष के गठबंधन के लिए शिवपाल यादव ने कई बार पहल की। रालोद सुप्रीम चौधरी अजित सिंह के वह लगातार संपर्क में रहे।
सेक्युलर मोर्चा का भविष्य क्या होगा यह भी अभी किसी को नहीं पता। लेकिन लंबे समय से चल रही खींचतान से आखिरकार यादव परिवार के रास्ते अलग-अलग हो गए। बागपत में सपा की बात करें तो पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समर्थकों की संख्या अधिक है।
उनके पिता मुलायम सिंह यादव को मानने वाले भी पूर्व विधायक और दर्जा प्राप्त मंत्री है। जो लगातार मुलायम सिंह यादव के संपर्क में भी बने रहते हैं। प्रोफेसर राम गोपाल यादव के करीबियों की भी संख्या है। लेकिन पूर्व मंत्री शिवपाल यादव के समर्थकों की संख्या प्रभावशाली नहीं है। ऐसे में उन्हें ताकत जुटाने में ताकत झोंकनी होगी।
किसने क्या कहा
सपा जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी का कहना है कि मोर्चे से सपा पर कोई असर पड़ने वाला नहीं है। इससे उनकी हताशा जाहिर होती है। जनाधार पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ है। यही वजह है कि वह परेशान थे और मोर्चा बनाकर अपनी परेशानी को जगजाहिर भी कर दिया।
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