{"_id":"5b6c949e4f1c1ba33e8b6097","slug":"shiv-bhakto-ne-kiya-jalaabhishek","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाबा औघड़नाथ पर साढ़े चार लाख शिव भक्तों ने किया जलाभिषेक ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाबा औघड़नाथ पर साढ़े चार लाख शिव भक्तों ने किया जलाभिषेक
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 10 Aug 2018 12:53 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिवरात्रि पर बाबा औघड़नाथ मंदिर में 24 घंटे तक जलाभिषेक हुआ। मंदिर में साढ़े चार लाख शिवभक्तों ने भगवान आशुतोष को गंगाजल से नहलाया। बम-बम भोले के उद्घोष से मंदिर गूंजता रहा। मंदिर परिसर और बाहर सड़कों पर केसरियां रंग छाया रहा। बिल्लवेश्वर महादेव मंदिर, झारखंडी महादेव मंदिर, नागेश्वर महादेव मंदिर, मनोहरनाथ मंदिर, धर्मेश्वर नाथ महादेव मंदिर भी दिनभर भोले के जयकारों से गूंजते रहे।
साय 7:30 से कांवड़ियों ने चढ़ाया जल
बाबा औघड़नाथ मंदिर में आरती के बाद शाम 7.30 बजे मंदिर के कपाट केवल कांवड़ियों के लिए ही खोले गए। कांवड़ियों ने शिवरात्रि का जल चढ़ाया। लाइन में लगे कांवड़ियां बाबा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे।
समय को लेकर रहे अलग-अलग मत
त्रयोदशी और शिवरात्रि के जलाभिषेक के मुहूर्त को लेकर इस बार अलग-अलग मत रहे। जहां कुछ ज्योतिषों ने बुधवार रात्रि 2.15 मिनट से सुबह चार बजे तक त्रयोदशी और बृहस्पतिवार सुबह चार बजे से शिवरात्रि का जलाभिषेक मुहूर्त होने की बात कही। वहीं मंदिरों के पुजारियों ने शिवरात्रि का जलाभिषेक अपने तरीके से कराया। बाबा औघड़नाथ मंदिर के पुजारी श्रीधर त्रिपाठी के अनुसार बुधवार रात्रि से बृहस्पतिवार शाम सात बजे तक त्रयोदशी रही। शाम साढ़े सात बजे से शिवरात्रि का जलाभिषेक मुहूर्त रहा।
विज्ञापन
गरुड़ द्वार से हुआ मंदिर में प्रवेश
नैंसी मार्ग, एमएच और अन्नपूर्णा मंदिर मार्ग पर शिवभक्त और कांवड़ियों की लाइनें लगी। मंदिर कमेटी ने महिला और पुरुष शिवभक्तों की अलग-अलग लाइनों की व्यवस्था की हुई थी।
दंडवत कांवड़ लेकर पहुंचे शिव भक्त
हरिद्वार से कांवड़ लेकर आने वाले शिवभक्तों में काफी ऐसे भी कांवड़ियां देखने को मिले जो एक निर्धारित सीमा से लेटकर शिवालय की तरफ बढ़ रहे थे। लेटकर मंदिर में प्रवेश करने वाले शिवभक्तों के लिए अलग से लाइन बनाई गई।
मंदिरों के पास लगे मेले
बिल्लवेश्वर महादेव मंदिर, बाबा मनोहरनाथ मंदिर, सनातन धर्म धर्मेश्वर महादेव मंदिर, नागेश्वर महादेव मंदिर, झारखंडी महादेव मंदिर आदि के आसपास प्रसाद, चाट पकोड़ी, झूले, खेल खिलौने आदि सामान की दुकानें लगने से मेले जैसा माहौल रहा।
विज्ञापन
साय 7:30 से कांवड़ियों ने चढ़ाया जल
बाबा औघड़नाथ मंदिर में आरती के बाद शाम 7.30 बजे मंदिर के कपाट केवल कांवड़ियों के लिए ही खोले गए। कांवड़ियों ने शिवरात्रि का जल चढ़ाया। लाइन में लगे कांवड़ियां बाबा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे।
विज्ञापन
समय को लेकर रहे अलग-अलग मत
त्रयोदशी और शिवरात्रि के जलाभिषेक के मुहूर्त को लेकर इस बार अलग-अलग मत रहे। जहां कुछ ज्योतिषों ने बुधवार रात्रि 2.15 मिनट से सुबह चार बजे तक त्रयोदशी और बृहस्पतिवार सुबह चार बजे से शिवरात्रि का जलाभिषेक मुहूर्त होने की बात कही। वहीं मंदिरों के पुजारियों ने शिवरात्रि का जलाभिषेक अपने तरीके से कराया। बाबा औघड़नाथ मंदिर के पुजारी श्रीधर त्रिपाठी के अनुसार बुधवार रात्रि से बृहस्पतिवार शाम सात बजे तक त्रयोदशी रही। शाम साढ़े सात बजे से शिवरात्रि का जलाभिषेक मुहूर्त रहा।
विज्ञापन
गरुड़ द्वार से हुआ मंदिर में प्रवेश
नैंसी मार्ग, एमएच और अन्नपूर्णा मंदिर मार्ग पर शिवभक्त और कांवड़ियों की लाइनें लगी। मंदिर कमेटी ने महिला और पुरुष शिवभक्तों की अलग-अलग लाइनों की व्यवस्था की हुई थी।
दंडवत कांवड़ लेकर पहुंचे शिव भक्त
हरिद्वार से कांवड़ लेकर आने वाले शिवभक्तों में काफी ऐसे भी कांवड़ियां देखने को मिले जो एक निर्धारित सीमा से लेटकर शिवालय की तरफ बढ़ रहे थे। लेटकर मंदिर में प्रवेश करने वाले शिवभक्तों के लिए अलग से लाइन बनाई गई।
मंदिरों के पास लगे मेले
बिल्लवेश्वर महादेव मंदिर, बाबा मनोहरनाथ मंदिर, सनातन धर्म धर्मेश्वर महादेव मंदिर, नागेश्वर महादेव मंदिर, झारखंडी महादेव मंदिर आदि के आसपास प्रसाद, चाट पकोड़ी, झूले, खेल खिलौने आदि सामान की दुकानें लगने से मेले जैसा माहौल रहा।