नवरात्रि 2026: गज पर सवार मां दुर्गा, देंगी सुख-समृद्धि का संदेश; दस दिन होगी आराधना, दो दिन रहेगी अष्टमी तिथि
शारदीय नवरात्र इस बार दस दिनों तक चलेगा और अष्टमी तिथि दो दिन रहेगी। मान्यता है कि रविवार से नवरात्र शुरू होने पर मां दुर्गा गज यानी हाथी पर सवार होकर आती हैं, जिसे सुख-समृद्धि और अन्न-धन का प्रतीक माना गया है।
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मां भगवती की आराधना का पावन पर्व शारदीय नवरात्र इस बार विशेष धार्मिक संयोग लेकर आ रहा है। मान्यता के अनुसार रविवार से नवरात्र का शुभारंभ होने पर मां दुर्गा गज यानी हाथी पर सवार होकर आती हैं। गज को वर्षा, अन्न-धन, सुख और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। इस बार दस दिनों तक नवरात्र की आराधना होगी, जबकि अष्टमी तिथि दो दिन रहने से पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
दस दिन होगी मां भगवती की आराधना
ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि इस बार भक्तों को नौ के बजाय दस दिन तक मां भगवती की आराधना और व्रत का अवसर मिलेगा। अष्टमी तिथि भी दो दिन रहने के कारण नवरात्रि का यह संयोग विशेष माना जा रहा है।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की भी आराधना की जाती है। 19 अक्टूबर को श्री दुर्गाष्टमी, 20 अक्टूबर को महानवमी और इसी दिन विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा।
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आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार द्विस्वभाव लग्न में घटस्थापना करना शुभ माना गया है। कन्या लग्न में सूर्योदय से सुबह 6:51 बजे तक घटस्थापना का समय रहेगा। इसके बाद वृश्चिक स्थिर लग्न में सुबह 9:15 से 11:30 बजे तक शुभ समय बताया गया है।
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 से दोपहर 12:38 बजे तक रहेगा। इस दौरान घटस्थापना करना विशेष शुभ माना गया है।
जौ को माना जाता है ब्रह्म स्वरूप
आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि नवरात्रि में जौ बोने की भी परंपरा है। जौ को ब्रह्म स्वरूप और पृथ्वी की पहली फसल माना गया है। वहीं घटस्थापना में कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है।
पूजा में इन सामग्री की होगी आवश्यकता
घटस्थापना और पूजा के लिए कलश, गंगाजल, रोली, मौली, सुपारी, लौंग-इलायची, पान, दूर्वा, सिक्के, पंचरत्न, आम या अशोक के पत्ते, नारियल, लाल कपड़ा, फूल-माला, फल और पंचमेवा सहित अन्य सामग्री की आवश्यकता होगी। पूजा के दौरान अखंड ज्योति भी जलाई जाएगी। घी का दीपक जलाकर उसका विधि-विधान से पूजन किया जाता है।