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शौक कहीं पड़ न जाए भारी: बिना टीके पाली जा रहीं बिल्लियां, हर महीने 900 से ज्यादा लोगों को खरोचने का दावा

Thu, 01 Oct 2026 03:24 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 01 Oct 2026 03:24 PM IST
सार

शामली में पालतू बिल्लियों के वैक्सीनेशन को लेकर लापरवाही सामने आई है। हर महीने 900 से ज्यादा लोग बिल्लियों के काटने या खरोंचने के बाद एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवा रहे हैं।

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Shamli: Unvaccinated Pet Cats Raise Rabies Concern, Over 900 People Reportedly Scratched or Bitten Every Month
बिल्ली पालने का शौक बन रहा खतरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शामली जिले में पालतू बिल्लियां रखने का शौक तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इनके टीकाकरण को लेकर लापरवाही लोगों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। सरकारी पशु चिकित्सालय में इलाज के लिए आने वाली बड़ी संख्या में बिल्लियों का वैक्सीनेशन नहीं हुआ है। चिकित्सकों ने बिना टीके वाली बिल्ली के काटने या खरोंचने पर रेबीज संक्रमण के खतरे को लेकर पशुपालकों को सतर्क किया है।

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बिना टीके की बिल्लियों से बढ़ रहा खतरा
शहर के सरकारी पशु चिकित्सालय की पड़ताल में सामने आया है कि इलाज के लिए आने वाली हर 10 में से करीब छह बिल्लियां यानी 60 प्रतिशत बिना वैक्सीन की हैं। पशु चिकित्सकों के मुताबिक, यदि बिल्ली को एंटी रेबीज का टीका नहीं लगा है और वह किसी व्यक्ति को काट ले या खरोंच मार दे तो संक्रमण का खतरा हो सकता है।
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पशु अस्पताल में रोजाना करीब 20 से 25 बिल्लियां इलाज के लिए पहुंचती हैं और इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की होती है, जिनका वैक्सीनेशन नहीं कराया गया है।
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हर महीने 900 से ज्यादा लोग हो रहे प्रभावित
जिला अस्पताल शामली में रोजाना 200 से अधिक लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं। इनमें औसतन 60 मरीज बिल्ली के काटने या खरोंचने के शिकार होते हैं। बाकी मामले कुत्तों और बंदरों के हमले से जुड़े हैं।

सीएचसी शामली में भी रोजाना 40 से 50 मरीज एंटी रेबीज टीका लगवाने पहुंचते हैं। इनमें करीब 10 मरीज बिल्ली और सात से आठ मरीज बंदर के काटने से प्रभावित होते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर हर महीने 900 से अधिक लोग बिल्लियों के काटने या खरोंचने के बाद एंटी रेबीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

ओपीडी में सामने आई वैक्सीनेशन की लापरवाही
कैराना रोड निवासी मनीष: बुखार से पीड़ित अपनी पालतू बिल्ली को पशु अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जब टीकाकरण के बारे में पूछा तो पता चला कि बिल्ली को आज तक एक भी टीका नहीं लगा था।

कैराना निवासी जावेद: बीमार बिल्ली की जांच के दौरान सामने आया कि उसे एंटी रेबीज की खुराक नहीं दी गई थी।

बामनौली निवासी बाबू: उनकी बिल्ली की जांच में भी वैक्सीनेशन नहीं कराया जाना सामने आया।

पशुपालक टीकाकरण को लेकर रहें गंभीर
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. चंद्रभानू कश्यप के अनुसार जिले में बिल्ली पालने का चलन बढ़ा है, लेकिन लोग वैक्सीनेशन को लेकर गंभीर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बिना टीके वाली बिल्ली के काटने या खरोंचने पर इंसानों में रेबीज का जानलेवा खतरा हो सकता है। पशुपालकों को बिल्ली घर लाने के बाद उसका नियमित टीकाकरण जरूर कराना चाहिए।

इन्होंने कहा
जिले में बिल्ली पालने का ट्रेंड बढ़ा है, लेकिन लोग वैक्सीनेशन को लेकर गंभीर नहीं हैं। बिना टीके वाली बिल्ली के काटने या खरोंचने पर इंसानों में रेबीज का जानलेवा खतरा हो सकता है। सभी पशुपालक बिल्ली लाते ही उसका नियमित टीकाकरण अवश्य कराएं।- डॉ. चंद्रभानू कश्यप, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, शामली

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