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शब ए बरात पर रातभर की इबादत, नहीं हुए बड़े आयोजन
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शब-ए-बरात पर रातभर की इबादत, नहीं हुए बड़े आयोजन
मेरठ। शब-ए-बरात पर रविवार को रातभर इबादत की गई। कब्रिस्तानों और इबादतगाहों को रोशनी से सजाया गया। हालांकि बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण सड़कों पर बड़े आयोजन नहीं हुए। रात में ईशा की नमाज के बाद मस्जिदों में छोटे-छोटे कार्यक्रम जरूर हुए। पिछले साल लॉकडाउन के कारण शब ए बरात और रमजान में इबादत पर खलल जरूर पड़ा था।
लिसाड़ी रोड पर हर साल शब ए बरात पर सजावट के साथ ट्यूबवेल पर बड़े जसले का आयोजन होता था। लेकिन पिछले साल लॉकडाउन के कारण जलसा स्थगित हो गया था। इस बार उम्मीद थी कि अधिक बड़े आयोजन हो सकेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। फिर से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के कारण इस बार सड़कों पर निकलने तक की इजाजत नहीं थी। कोविड नियमों के तहत 50 लोगों तक ही आयोजन की इजाजत थी, ऐसे में आयोजकों ने अनुमति लेने से पहले ही हाथ खींच लिए।
नायब शहरकाजी जैनुर राशिद्दीन ने बताया कि गुदड़ी बाजार में हर साल बड़ा जलसा होता था, लेकिन कोविड नियमों का पालन भी जरूरी था। हालांकि रात ईशा की नमाज के बाद अधिकतर मस्जिदों में तकरीर हुई।
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इस्लामाबाद चाहरदिवारी स्थित मस्जिद में मौलाना सलमान कासमी ने जलसे को खिताब किया। गोलाकुआं स्थित मस्जिद में भी लोगों को शब ए बरात की फजीलत के बारे बताया गया। यहां लोगों ने अपने मरहूम बुजुर्गों के लिए मगफिरत की दुआ मांगी। लिसाड़ी रोड कब्रिस्तान, नौचंदी बालेमियां, विकासपुरी, कब्रिस्तान सहित अन्य जगहों पर लोगों ने फातिहा पढ़कर सुनाए।
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जश्न नहीं, इबादत की रात है शब-ए-बरात
मेरठ। गुदड़ी बाजार स्थित मदरसा नक्कारचियान में कुरान ए हाफिज करने वालों को सम्मान के लिए जलसे का आयोजन किया गया। इसमें उलमा ने युवाओं से शब-ए-बरात पर बाइक स्टंट और आतिशबाजी न करने के लिए कहा।
शेखुल हदीस दारुल उलूम के मौलाना खुर्शीद ने कहा कि शब-ए-बरात जश्न की नहीं, बल्कि इबादत की रात है। नायब शहरकाजी जैनुर राशिद्दीन ने कहा कि आतिशबाजी करना शरीयत के खिलाफ है। जलसे के अंत में कुरान हाफिज करने वाले छात्रों को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया। मौलाना खुर्शीद ने कोरोना के खात्मे की दुआ कराई। इस दौरान मदरसे के उस्ताद हाफिज जुबैर, मुतवल्ली हाफिज मामून हारुन, परवेज कुरैशी, अकबर कुरैशी, चौधरी अशरफ, चौ. वली मोहम्मद, हाजी सिराज रहमान, हाजी हनीफ कुरैशी मौजूद रहे।
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मेरठ। शब-ए-बरात पर रविवार को रातभर इबादत की गई। कब्रिस्तानों और इबादतगाहों को रोशनी से सजाया गया। हालांकि बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण सड़कों पर बड़े आयोजन नहीं हुए। रात में ईशा की नमाज के बाद मस्जिदों में छोटे-छोटे कार्यक्रम जरूर हुए। पिछले साल लॉकडाउन के कारण शब ए बरात और रमजान में इबादत पर खलल जरूर पड़ा था।
लिसाड़ी रोड पर हर साल शब ए बरात पर सजावट के साथ ट्यूबवेल पर बड़े जसले का आयोजन होता था। लेकिन पिछले साल लॉकडाउन के कारण जलसा स्थगित हो गया था। इस बार उम्मीद थी कि अधिक बड़े आयोजन हो सकेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। फिर से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के कारण इस बार सड़कों पर निकलने तक की इजाजत नहीं थी। कोविड नियमों के तहत 50 लोगों तक ही आयोजन की इजाजत थी, ऐसे में आयोजकों ने अनुमति लेने से पहले ही हाथ खींच लिए।
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नायब शहरकाजी जैनुर राशिद्दीन ने बताया कि गुदड़ी बाजार में हर साल बड़ा जलसा होता था, लेकिन कोविड नियमों का पालन भी जरूरी था। हालांकि रात ईशा की नमाज के बाद अधिकतर मस्जिदों में तकरीर हुई।
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इस्लामाबाद चाहरदिवारी स्थित मस्जिद में मौलाना सलमान कासमी ने जलसे को खिताब किया। गोलाकुआं स्थित मस्जिद में भी लोगों को शब ए बरात की फजीलत के बारे बताया गया। यहां लोगों ने अपने मरहूम बुजुर्गों के लिए मगफिरत की दुआ मांगी। लिसाड़ी रोड कब्रिस्तान, नौचंदी बालेमियां, विकासपुरी, कब्रिस्तान सहित अन्य जगहों पर लोगों ने फातिहा पढ़कर सुनाए।
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जश्न नहीं, इबादत की रात है शब-ए-बरात
मेरठ। गुदड़ी बाजार स्थित मदरसा नक्कारचियान में कुरान ए हाफिज करने वालों को सम्मान के लिए जलसे का आयोजन किया गया। इसमें उलमा ने युवाओं से शब-ए-बरात पर बाइक स्टंट और आतिशबाजी न करने के लिए कहा।
शेखुल हदीस दारुल उलूम के मौलाना खुर्शीद ने कहा कि शब-ए-बरात जश्न की नहीं, बल्कि इबादत की रात है। नायब शहरकाजी जैनुर राशिद्दीन ने कहा कि आतिशबाजी करना शरीयत के खिलाफ है। जलसे के अंत में कुरान हाफिज करने वाले छात्रों को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया। मौलाना खुर्शीद ने कोरोना के खात्मे की दुआ कराई। इस दौरान मदरसे के उस्ताद हाफिज जुबैर, मुतवल्ली हाफिज मामून हारुन, परवेज कुरैशी, अकबर कुरैशी, चौधरी अशरफ, चौ. वली मोहम्मद, हाजी सिराज रहमान, हाजी हनीफ कुरैशी मौजूद रहे।
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