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गंगा की धारा में बहती मिट्टी देख उड़ रही रातों की नींद
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गंगा नदी धारा स्रोत संवाद
- गंगा का जलस्तर हुआ कम कटान हो गया तेज
हस्तिनापुर। एक सप्ताह से लगातार खादर क्षेत्र के कई गांवों में तबाही मचाने के बाद गंगा का पानी वापस अपनी धारा में पहुंच गया है। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। आवागमन के रास्ते बहाल हो गए हैं, परंतु गंगा का कटान अभी भी उनकी नींद उड़ा रहा है।
कई दिनों तक बाढ़ से जूझने के बाद खादर क्षेत्र के लोगों को बाढ़ से राहत मिली है। परंतु गंगा की धारा उनके खेतों में कटान करते हुए गांव की ओर बढ़ रही है। क्षेत्र के गांव बस्तोरा नारंग में गंगा का खौफ इस कदर है कि लोगों ने गांव से पलायन कर दिया था। पांच दिन से लगातार गंगा का पानी बाहर निकल कर गांव की ओर पहुंच रहा था। साथ ही गंगा भी कटान करते हुए गांव की ओर बढ़ रही है।
ग्रामीण दहशत में थे और अपने परिवार को सुरक्षित बचाने के लिए गांव के सैकड़ों परिवारों ने गांव से पलायन कर दिया था, जो कि अभी गांव नहीं लौटे हैं। गंगा भले ही अपनी धारा में पहुंच गई हो, परंतु गंगा का कटान लगातार बस्तोरा नारंग गांव की ओर बढ़ रहा है। यहां सैकड़ो लोगों की रातों की नींद उड़ी हुई है। इस समय गंगा गांव से करीब 150 मीटर की दूरी पर बह रही है और गंगा की लहरें ग्रामीणों को भयभीत कर रही हैं। चारों ओर फैले पानी ने गांव की जिंदगी को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।
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खादर क्षेत्र इस समय दोहरी मार झेल रहा है एक ओर गंगा का उफनता पानी और दूसरी ओर रोजमर्रा की जरूरतों की कमी। गांव के लोगों ने हमेशा हर सामाजिक गतिविधि में योगदान दिया है। अब उनकी पुकार है कि सरकार और समाज उनकी मदद के लिए आगे आएं। जब तक गांव को बाढ़ से बचाने के लिए पुख्ता प्रबंध नहीं किए जाते उन्हें सहयोग की जरूरत है।
अब बीमारियों का बढ़ता खतरा
बाढ़ के बाद चारों ओर फैले गंदे पानी के कारण गांव में चर्म रोग, दस्त, बुखार और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। पशुओं में भी बीमारी फैल रही है। किसानों का कहना है कि इस बार की धान और अन्य खरीफ फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। खेतों में खड़ा चारा भी पानी में डूब गया है। किसानों को अब अगले सीजन तक इंतजार करना पड़ेगा। खेती पर ही निर्भर अधिकतर परिवारों की कमर टूट चुकी है।
प्रशासन और राहत टीमें सक्रिय
यहां बाढ़ के बाद हर स्थिति पर प्रशासन की पैनी नजर है। इसके लिए टीम लगाई गई है। एडीएम, एसडीएम स्थिति का जायजा ले रहे हैं। वहीं गांव में स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग भी तैनात किया गया है। लोगों को दवाइयों की किट वितरित की जा रही हैं।
जलस्तर कम होने पर होता है कटान
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले चार दिनों से गंगा नदी उफान पर थी तो कटान भी कम हो गया था परंतु रविवार को जैसे ही गंगा नदी वापस अपनी धारा में पहुंची। गांव के आसपास भरा पानी भी गंगा में पहुंच गया। जलस्तर कम होते ही गंगा ने कटान शुरू कर दिया है। एक ही दिन में करीब 20 मीटर तक कटान करते हुए गंगा गांव की ओर बढ़ रही है।
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हस्तिनापुर। एक सप्ताह से लगातार खादर क्षेत्र के कई गांवों में तबाही मचाने के बाद गंगा का पानी वापस अपनी धारा में पहुंच गया है। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। आवागमन के रास्ते बहाल हो गए हैं, परंतु गंगा का कटान अभी भी उनकी नींद उड़ा रहा है।
कई दिनों तक बाढ़ से जूझने के बाद खादर क्षेत्र के लोगों को बाढ़ से राहत मिली है। परंतु गंगा की धारा उनके खेतों में कटान करते हुए गांव की ओर बढ़ रही है। क्षेत्र के गांव बस्तोरा नारंग में गंगा का खौफ इस कदर है कि लोगों ने गांव से पलायन कर दिया था। पांच दिन से लगातार गंगा का पानी बाहर निकल कर गांव की ओर पहुंच रहा था। साथ ही गंगा भी कटान करते हुए गांव की ओर बढ़ रही है।
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ग्रामीण दहशत में थे और अपने परिवार को सुरक्षित बचाने के लिए गांव के सैकड़ों परिवारों ने गांव से पलायन कर दिया था, जो कि अभी गांव नहीं लौटे हैं। गंगा भले ही अपनी धारा में पहुंच गई हो, परंतु गंगा का कटान लगातार बस्तोरा नारंग गांव की ओर बढ़ रहा है। यहां सैकड़ो लोगों की रातों की नींद उड़ी हुई है। इस समय गंगा गांव से करीब 150 मीटर की दूरी पर बह रही है और गंगा की लहरें ग्रामीणों को भयभीत कर रही हैं। चारों ओर फैले पानी ने गांव की जिंदगी को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।
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खादर क्षेत्र इस समय दोहरी मार झेल रहा है एक ओर गंगा का उफनता पानी और दूसरी ओर रोजमर्रा की जरूरतों की कमी। गांव के लोगों ने हमेशा हर सामाजिक गतिविधि में योगदान दिया है। अब उनकी पुकार है कि सरकार और समाज उनकी मदद के लिए आगे आएं। जब तक गांव को बाढ़ से बचाने के लिए पुख्ता प्रबंध नहीं किए जाते उन्हें सहयोग की जरूरत है।
अब बीमारियों का बढ़ता खतरा
बाढ़ के बाद चारों ओर फैले गंदे पानी के कारण गांव में चर्म रोग, दस्त, बुखार और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। पशुओं में भी बीमारी फैल रही है। किसानों का कहना है कि इस बार की धान और अन्य खरीफ फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। खेतों में खड़ा चारा भी पानी में डूब गया है। किसानों को अब अगले सीजन तक इंतजार करना पड़ेगा। खेती पर ही निर्भर अधिकतर परिवारों की कमर टूट चुकी है।
प्रशासन और राहत टीमें सक्रिय
यहां बाढ़ के बाद हर स्थिति पर प्रशासन की पैनी नजर है। इसके लिए टीम लगाई गई है। एडीएम, एसडीएम स्थिति का जायजा ले रहे हैं। वहीं गांव में स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग भी तैनात किया गया है। लोगों को दवाइयों की किट वितरित की जा रही हैं।
जलस्तर कम होने पर होता है कटान
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले चार दिनों से गंगा नदी उफान पर थी तो कटान भी कम हो गया था परंतु रविवार को जैसे ही गंगा नदी वापस अपनी धारा में पहुंची। गांव के आसपास भरा पानी भी गंगा में पहुंच गया। जलस्तर कम होते ही गंगा ने कटान शुरू कर दिया है। एक ही दिन में करीब 20 मीटर तक कटान करते हुए गंगा गांव की ओर बढ़ रही है।

गंगा नदी धारा स्रोत संवाद

गंगा नदी धारा स्रोत संवाद

गंगा नदी धारा स्रोत संवाद

गंगा नदी धारा स्रोत संवाद