फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Seeing sickness and deaths ... increasing stress-depression

बीमारी और मौतें देख... बढ़ रहा तनाव-अवसाद

Sat, 01 May 2021 02:40 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 01 May 2021 02:40 AM IST
विज्ञापन
Seeing sickness and deaths ... increasing stress-depression
बीमारी और मौतें देख... बढ़ रहा तनाव-अवसाद
विज्ञापन

मेरठ। कोरोना की दूसरी लहर लोगों के मन पर कहर ढा रही है। जो संक्रमित हैं वह और उनके परिवार अस्पताल में लड़ रहे हैं। जो ठीक हैं वो घर पर डर और अवसाद से जूझ रहे हैं। उन्हें डर है कहीं हमें भी कोरोना न हो जाए। कारोबार से लेकर लोगों को अपनों के खोने का डर सता रहा है। चारों ओर मौत, बीमारी की बातें सुनकर लोगों के मन में एक अदृश्य डर घर गया है। इससे तनाव, चिड़चिड़ापन, अकेलापन और अवसाद बढ़ा रहा है।
हर वर्ग, हर उम्र में है तनाव
कोरोना, लॉकडाउन से हर वर्ग, हर उम्र के लोगों में तनाव है। छात्र पढ़ाई, कॅरियर को लेकर चिंतित हैं। उद्यमी, कारोबारी, व्यापारी को कारोबार की चिंता है। गृहिणियों को परिवार, अपनों की चिंता है। इन सबसे बढ़कर हर किसी को अपनों, परिवार के सदस्यों, दोस्तों, रिश्तेदारों की चिंता सता रही है। सब ठीक रहे, सब स्वस्थ रहें, किसी को कुछ हो न जाए।
विज्ञापन

नुकसान पहुंचा रही अतिरिक्त सतर्कता
अतिरिक्त सतर्कता अब खतरा बनती जा रही है। एहतियात के नाम पर बेवजह या अधिक मात्रा में दवा, काढ़े का सेवन शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है। लोग डर के चलते सैनिटाजर, विटामिन सप्लीमेंट, काढ़ा, गरम मसाले का ज्यादा सेवन कर रहे हैं, जो दूसरी परेशानियां दे रहा है। बाजार में इन चीजों की किल्लत भी हो गई है। ऑक्सीजन सिलिंडर, पल्स ऑक्सीमीटर की भी शॉर्टेज इसी वजह से हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

केस एक
हर घंटे जांचती हैं नब्ज
शास्त्री नगर निवासी मनिका 30 साल की कामकाजी युवती हैं। कोरोना का डर उनके के मन में ऐसा बैठा है कि हर घंटे पल्स ऑक्सीमीटर लगाकर अपनी नब्ज जांचने लगती हैं। खाना भूल जाएं, लेकिन नब्ज देखना नहीं भूलतीं हैं।
केस दो
खाने से ज्यादा नुस्खे, दवाओं पर ध्यान
डिफेंस कॉलोनी निवासी पुनीत के दो बच्चे हैं। पुनीत 45 साल के हैं, जबसे कोरोना फैला है उन्हें खाने से ज्यादा नुस्खों और दवाओं की चिंता है। सुबह 6 बजे से दिन भर गर्म पानी पीना। खाने में प्याज, लहसुन, मिर्च और गर्म मसाला ज्यादा रखना। पांच बार काढ़ा पीना, साथ ही मल्टीविटामिन दिन में चार बार खाना। आलम यह कि घर के लोग पुनीत की इस हरकत से अब चिड़चिड़े हो चुके हैं।
केस तीन
गुमसुम रहना कहीं कोरोना तो नहीं
साकेत निवासी सुमनेश 50 साल के हैं। इन दिनों फैक्टरी बंद है तो वह घर पर हैं। कभी पासबुक देखते हैं तो कभी मोबाइल पर बैंक बैलेंस चेक करते हैं। जरा सी छींक आ जाए तो फौरन इलाज शुरू कर देते हैं। न किसी से बात करना न बोलना। सुमनेश के मन में भय ऐसे बैठा है कि हमेेशा यही लगता है कोरोना तो नहीं हो गया।
हर समय नकारात्मक माहौल है कारण
लोगों के मन में जो अवसाद बढ़ रहा है उसकी वजह चारों ओर से आ रही निगेटिविटी है। कोरोना संक्रमण इतना ज्यादा फैल रहा है कि हर वर्ग प्रभावित है। इसलिए लोगों का डर बढ़ा है कि कभी भी कुछ हो सकता है। डरें, घबराएं नहीं। सकारात्मक रहें योग, ध्यान करें। - डॉ. रवि राणा, मनोचिकित्सक

घर पर रहकर दूर करें अकेलापन
लोगों में बढ़ते डर, निगेटिविटी, तनाव का बड़ा कारण अकेलापन है। पिछले डेढ़ साल से यही हालात हैं। अपनों से मिलना, जुलना, मनोरंजन करना बंद है। केवल फोन पर बात हो रही है उसमें भी निगेटिव चीजें सामने आ रही हैं। इसलिए निगेटिव खबरें न देखें, न निगेटिव सोचें। न ही इन बातों पर बहुत गौर करें। घर पर रहकर अपनों से बात करें, वीडियोकॉल करें। साहित्य पढ़ें, घर पर खुद को अकेला न समझें। - डॉ. कशिका जैन, मनोविज्ञानी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed