{"_id":"5864d22c4f1c1b8840eedeeb","slug":"secret-rajeshvarashram-ji-maharaj-shankaracharya-said-india-only-religious-country-in-world","type":"story","status":"publish","title_hn":"शंकराचार्य राज राजेश्वराश्रम जी महाराज ने कहा- विश्व में सिर्फ भारत ही धार्मिक देश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शंकराचार्य राज राजेश्वराश्रम जी महाराज ने कहा- विश्व में सिर्फ भारत ही धार्मिक देश
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Thu, 29 Dec 2016 03:08 PM IST
विज्ञापन
शंकराचार्य राज राजेश्वराश्रम जी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शंकराचार्य राज राजेश्वराश्रम जी महाराज ने कहा कि विश्व में केवल भारत ही धार्मिक देश है। धार्मिक होने का मतलब अनुशासन, मर्यादित होना है। धर्म का मतलब निश्चल, अनुशासन है। अधर्म लूट, चोरी, हत्या यानी अपराध सिखाता है। उन्होंने पाकिस्तान को अधर्मी देश बताया।
विज्ञापन
महाराज बुधवार को बेगमबाग स्थित शिव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शामिल होने आए थे। विपिन बंसल के आवास पर पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि मनुष्य बनो। मनुष्य वही होता है जो मनुष्य के लिए मरता है। अपने लिए जीने वाला मनुष्य पशु के समान होता है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम जन्म भूमि थी, है और रहेगी। नौ लाख वर्ष पहले भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। वहां पर रामलला का मंदिर है। केवल मंदिर को सुंदरता देना बाकी है। हमने मस्जिद नहीं तोड़ी थी, बल्कि मंदिर को तोड़ा गया था। हम मंदिर को सुंदर बनाने का काम कर रहे हैं। जिस दिन भगवान राम की मर्जी होगी, उस दिन सुंदर मंदिर का निर्माण हो जाएगा। उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों से युवा पीढ़ी दूरी बना रही है। जिसको लेकर संत, महात्मा, माता-पिता सभी को गंभीर होने की जरूरत है। विदेशी एजेंसियां मीडिया के माध्यम से अश्लीलता परोस रही हैं। खानपान दूषित हो गया है। माता पिता अपने बच्चों को संस्कार देना भूल गए हैं। अब युवाओं को सही दिशा देने की जरूरत है। युवा ही देश की नींव हैं।
विज्ञापन
जैन धर्म सिखाता है हंसते-हंसते मरना
मुनि सौरभ सागर महाराज ने कहा कि हंसते-हंसते जीना सभी धर्म संस्थापक सिखाते हैं। लेकिन हंसते- हंसते मरना जैन धर्म सिखाता है। जीवन की सबसे बड़ी पहेली जीवन नहीं, मृत्यु है। जिसने मृत्यु को नहीं जाना, वह जीवन से अपरिचित रह गया है। उन्होंने यह संदेश जैन बोर्डिंग हाउस में प्रवचन करते हुए दिया। कहा कि जीवन को जानने की कुंजी मृत्यु है। जीवन को सुधारने से जीवन नहीं सुधरता बल्कि मृत्यु को सुधारने से जीवन सुधरता है। संसार में जितने भी मनीषी हुए, उन्होंने जन्मोत्सव नहीं मृत्यु महोत्सव मनाया। उन्होंने कहा कि जब वृक्ष का पत्ता पीला होता है तो स्वयं गिर जाता है। दीपक का तेल खत्म होता है तो वह बुझ जाता है। जीव की आयु समाप्त होती है तो वह मर जाता है। इस अवसर पर सुनील जैन प्रवक्ता, योगेश जैन, अतुल जैन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन