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बीएसयूपी योजना के भवन निर्माण में घोटाला
Fri, 14 Jun 2019 04:37 AM IST
Gaurav sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Gaurav sharma
Updated Fri, 14 Jun 2019 04:37 AM IST
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घोसीपुर में डीपीआर के विपरीत बना भवन
- फोटो : अमर उजाला
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मेरठ। बीएसयूपी योजना के तहत बनाए गए भवनों में डूडा अधिकारियों और कार्यदायी संस्था की साठगांठ से खेल हो गया। भवन निर्माण को जो डीपीआर तैयार की गई थी, उसके विपरीत जहां भवन तैयार कर दिए गए। वहीं देरी से काम करके बजट रिवाइज करके सरकार को अलग से चूना लगा दिया गया। इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई शिकायत पर जांच के आदेश हुए। लेकिन पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
जेएनएनयूआरएम के उपघटक बीएसयूपी योजना को जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) द्वारा संचालित किया जा रहा है। जिसकी कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम मेरठ है। इस योजना के तहत फेस 2 में 744 रिलोकेशन आवासों का निर्माण होना था। जिसमें चार मलिन बस्तियों डाबका में 264, दायमपुर में 312, घोसीपुर में 48 तथा शोभापुर में 120 आवास निर्माण होने थे। डीपीआर के अनुसार इन सभी का निर्माण फ्रेम स्ट्रक्चर के अनुसार किया जाना था। फ्रेम स्ट्रक्चर के तहत भूकंपरोधी भवन बनाये जाते हैं जो पिलर पर तैयार होते हैं। क्योंकि मेरठ शहर भूकंप सीजे श्रेणी 4 के तहत आता है, जो अतिसंवेदनशील श्रेणी है।
योजना को लगा दिया पलीता
कार्यदायी संस्था और डूडा के अधिकारियों ने साठगांठ कर व्यक्तिगत हित साधने के लिए आम जनता की जिंदगी को दांव पर लगाते हुए फ्रेम स्ट्रक्चर के बजाय सस्ते तैयार होने वाले लोडवियरिंग पद्धति के अनुसार भवन तैयार करा दिए। जो किसी भी तीव्र भूकंप के झटके को झेलने के लिए नाकाफी है। क्योंकि ये भवन दो से तीन मंजिला निर्मित हैं।
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भवन हो चुके हैं आवंटित
जो भवन तैयार हुए हैं, उनमें शोभापुर में 120 आवास गरीबों को आवंटित हो चुके हैं। घोसीपुर में 48 आवास कुष्ठ रोगियों को आवंटित किए गए हैं। ये कुष्ठ रोगी पूरी तरह असहाय हैं और ऐसे में कोई भी हादसा होने पर यह खुद की सहायता करने में असमर्थ हैं। लेकिन किसी को भी इसकी परवाह नहीं है।
एस्टीमेट रिवाइज, योजना अधर में
यह योजना वर्ष 2008-09 में शुरू हुई थी और वर्ष 2013-14 में इसका बजट भी रिवाइज कराया गया। लेकिन वह धनराशि भी अधिकारियों को द्वारा खर्च कर ली गई है, लेकिन योजना आज तक पूरी नहीं हुई है।
शिकायत पर नहीं कार्रवाई
इस योजना में हुए भ्रष्टाचार की विभागीय अधिकारियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक को शिकायत हुई। लेकिन कुछ नहीं हुआ। पिछले माह इस मामले में मुख्यमंत्री से की गई शिकायत पर प्रमुख सचिव आवास को जांच कर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है। लेकिन अभी तक इस मामले में कोई जांच शुरू नहीं हुई है।
प्रकरण की जांच होगी
इस प्रकरण की जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। - अनिल ढींगरा, जिलाधिकारी
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जेएनएनयूआरएम के उपघटक बीएसयूपी योजना को जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) द्वारा संचालित किया जा रहा है। जिसकी कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम मेरठ है। इस योजना के तहत फेस 2 में 744 रिलोकेशन आवासों का निर्माण होना था। जिसमें चार मलिन बस्तियों डाबका में 264, दायमपुर में 312, घोसीपुर में 48 तथा शोभापुर में 120 आवास निर्माण होने थे। डीपीआर के अनुसार इन सभी का निर्माण फ्रेम स्ट्रक्चर के अनुसार किया जाना था। फ्रेम स्ट्रक्चर के तहत भूकंपरोधी भवन बनाये जाते हैं जो पिलर पर तैयार होते हैं। क्योंकि मेरठ शहर भूकंप सीजे श्रेणी 4 के तहत आता है, जो अतिसंवेदनशील श्रेणी है।
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योजना को लगा दिया पलीता
कार्यदायी संस्था और डूडा के अधिकारियों ने साठगांठ कर व्यक्तिगत हित साधने के लिए आम जनता की जिंदगी को दांव पर लगाते हुए फ्रेम स्ट्रक्चर के बजाय सस्ते तैयार होने वाले लोडवियरिंग पद्धति के अनुसार भवन तैयार करा दिए। जो किसी भी तीव्र भूकंप के झटके को झेलने के लिए नाकाफी है। क्योंकि ये भवन दो से तीन मंजिला निर्मित हैं।
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भवन हो चुके हैं आवंटित
जो भवन तैयार हुए हैं, उनमें शोभापुर में 120 आवास गरीबों को आवंटित हो चुके हैं। घोसीपुर में 48 आवास कुष्ठ रोगियों को आवंटित किए गए हैं। ये कुष्ठ रोगी पूरी तरह असहाय हैं और ऐसे में कोई भी हादसा होने पर यह खुद की सहायता करने में असमर्थ हैं। लेकिन किसी को भी इसकी परवाह नहीं है।
एस्टीमेट रिवाइज, योजना अधर में
यह योजना वर्ष 2008-09 में शुरू हुई थी और वर्ष 2013-14 में इसका बजट भी रिवाइज कराया गया। लेकिन वह धनराशि भी अधिकारियों को द्वारा खर्च कर ली गई है, लेकिन योजना आज तक पूरी नहीं हुई है।
शिकायत पर नहीं कार्रवाई
इस योजना में हुए भ्रष्टाचार की विभागीय अधिकारियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक को शिकायत हुई। लेकिन कुछ नहीं हुआ। पिछले माह इस मामले में मुख्यमंत्री से की गई शिकायत पर प्रमुख सचिव आवास को जांच कर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है। लेकिन अभी तक इस मामले में कोई जांच शुरू नहीं हुई है।
प्रकरण की जांच होगी
इस प्रकरण की जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। - अनिल ढींगरा, जिलाधिकारी