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एक्सक्लूसिव : पीवीवीएनएल में घोटाला, खरीदे गए मीटरों का खुद ही कर लिया निरीक्षण, थर्ड पार्टी से करानी चाहिए जांच

Tue, 13 Jul 2021 01:43 AM IST
Dimple Sirohi राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 13 Jul 2021 01:43 AM IST
सार

टेंडर के बाद मीटरों की जांच का जिम्मा टेंडर अधिकारी से इतर थर्ड पार्टी को दिया जाना था। लेकिन मनीष कुशवाह ने अधीक्षण अभियंता वाणिज्य की गैरमौजूदगी में उनके नाम से पत्र बनवाकर अपने हस्ताक्षर किए।

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Scam in PVVNL: Inspected the meters purchased by themselves, should be investigated by third party
बिजली मीटर रीडिंग करते हुए - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पीवीवीएनएल में खरीदे गए करीब तीन करोड़ रुपये के 33 हजार सिंगल फेस मीटरों में बड़ा खेल किया गया है। मीटरों के टेंडर करने वाले अधिशासी अभियंता (वाणिज्य) ने खुद ही इन मीटरों का निरीक्षण/परीक्षण भी कर लिया है। नियमानुसार मीटरों का निरीक्षण टेंडर कराने वाले अधिकारी नहीं कर सकते।
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इतना ही नहीं, सामग्री निरीक्षण की जिम्मेदारी मुख्य अभियंता (एमएम) की तरफ से दी जाती है। लेकिन इस मामले में चर्चित अधिशासी अभियंता ने अधीक्षण अभियंता की गैरमौजूदगी में स्वयं हस्ताक्षर करके अपना निरीक्षण ऑर्डर कर लिया। यह पूरा मामला जहां ऊर्जा भवन में चर्चा का विषय बना हुआ है, वहीं इस काम को अंजाम देने वाले अधिकारी इसे दबाने में लगे हैं। 
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पावर कारपोरेशन में मीटर से संबंधित टेंडरों को वाणिज्य अनुभाग देखता है। इसके चलते अधिशासी अभियंता वाणिज्य मनीष कुशवाह ने 33 हजार सिंगल फेस मीटरों की खरीद के टेंडर किए थे। टेंडर के बाद मीटरों की जांच का जिम्मा टेंडर अधिकारी से इतर थर्ड पार्टी को दिया जाना था। लेकिन मनीष कुशवाह ने अधीक्षण अभियंता वाणिज्य की गैरमौजूदगी में उनके नाम से पत्र बनवाकर अपने हस्ताक्षर किए। इसके बाद अधिशासी अभियंता विद्युत परीक्षण खंड-2 महेंद्र प्रसाद का आर्डर मीटर निरीक्षण/परीक्षण के लिए कर लिया।
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पहला आदेश 27 अप्रैल को 10 हजार मीटरों के लिए मैसर्स मॉडर्न ट्रांसफार्मर्स गाजियाबाद के लिए था। दूसरा आदेश 28 अप्रैल को 10 हजार मीटरों के लिए मैसर्स जीनस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड जयपुर के लिए किया गया। इसके अलावा तीसरा आदेश 11 मई को 13 हजार मीटरों के लिए मैसर्स मॉडर्न ट्रांसफार्मर्स प्राइवेट लिमिटेड गाजियाबाद के लिए था। इन सभी 33 हजार मीटरों की खरीद से लेकर निरीक्षण तक के काम को मनीष कुशवाह ने अंजाम दिया। 
 
मुख्य अभियंता को है निरीक्षण की जिम्मेदारी देने का अधिकार
- यूपीपीसीएल चेयरमैन ने खरीदी गई सामग्री का निरीक्षण/परीक्षण कराने की जिम्मेदारी देने का अधिकार मुख्य अभियंता (सामग्री प्रबंधन) को दिया हुआ है। 11 अप्रैल 2018 के आदेश में स्पष्ट है कि डिस्कॉम द्वारा गठित पैनल में रोस्टर अनुसार अधिकारियों को नामित करने का उत्तरदायित्व मुख्य अभियंता सामग्री प्रबंधन को होगा।

सामग्री के निरीक्षण के कार्यों का अनुश्रवण करने का उत्तरदायित्व संबंधित अधीक्षण अभियंता का होगा। इसके अलावा सामग्री के डिस्पेच से पूर्व फर्म के परिसर पर थर्ड पार्टी निरीक्षण कराने का प्रावधान है। इस टीम के साथ विभाग का भी एक अधिकारी रोस्टर के अनुसार नामित किया जाता है, लेकिन इस मामले आदेश का पालन ही नहीं किया गया।
 
ये मामला वाकई गंभीर है। टेंडर करने वाला अधिकारी खरीदी गई सामग्री का निरीक्षण नहीं कर सकता है। वे इस मामले की जांच कराएंगे। जो भी अधिकारी इसमें दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी। विभाग में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा। - अरविंद मल्लप्पा बंगारी, एमडी पीवीवीएनएल मेरठ 

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