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श्रावण मास 2019: इस बार बन रहे दुर्लभ संयोग, ऐसे करें भगवान शिव को प्रसन्न

Wed, 17 Jul 2019 01:58 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Wed, 17 Jul 2019 01:58 AM IST
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Sawan 2019: This time rare coincidence is happening and please such Lord Shiva
भगवान शिव - फोटो : अमर उजाला

भगवान शंकर का अति प्रिय श्रावण मास आज से शुरू हो गया। इस बार श्रावण मास में कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, जो भक्तों को उनके कष्टों से छुटकारा दिलाएंगे। इसके साथ ही भगवान शंकर की विधिपूर्वक पूजा अर्चना करना अति फलदायी होगा।

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सहारनपुर में पेपर मिल रोड की ब्रह्मपुरी कॉलोनी स्थित सिद्धपीठ श्री बगलामुखी मंदिर के अधिष्ठाता और ज्योतिषाचार्य पंडित रोहित वशिष्ठ ने बताया कि दक्ष के यज्ञ में अपने शरीर को दग्ध करके भगवान शिव की अर्धांगिनी भगवती सती हिमालय की पुत्री बनकर प्रकट हुई थी।
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पूरे श्रावण मास व्रत पूजन करके भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था। नौ प्रकार की भक्ति में भगवान को पाने का पहला साधन श्रवण ही है। श्रवण अर्थात सुनना है, जब हम अपने कानों से भगवान के नामों को सुनते हैं, उसके पश्चात मुख से भगवान के नामों का कीर्तन करते हैं और फिर भगवान का स्मरण करते हैं। इसी तरह नौ चरणों में भक्ति से भगवान शिव को प्राप्त करते हैं। 
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श्रावण माह में इस बार कई शुभ संयोग बने हैं। हरियाली अमावस्या पर 125 साल बाद पंच महायोग का दुर्लभ संयोग है। बुधवार को सूर्य प्रधान उत्तराषाढ़ा नक्षत्र से सावन माह की शुरुआत हो रही है। इस दिन वज्र और विष कुंभ योग तभी बना है। एक अगस्त को हरियाली अमावस्या पर पंच महायोग का संयोग भी बन रहा है।

इस दिन पहला सिद्धि योग, दूसरा शुभ योग, तीसरा गुरु पुष्यामृत योग, चौथा सर्वार्थ सिद्धि योग और पांचवां अमृत सिद्धि योग है। पंच महायोग के संयोग में कुल देवी-देवता और शिव-पार्वती की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी।

सावन के तीसरे सोमवार को नागपंचमी का शुभ संयोग बना है। सोमवार और नागपंचमी दोनों ही दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है। इसलिए इस बार नागपंचमी का विशेष महत्व होगा।

ऐसे करें भगवान शिव को प्रसन्न 
भगवान शिव के भक्त इस पूरे महीने में भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए अनेक प्रकार से प्रयत्न करते हैं। इसके लिए भक्त व्रत, जप, शिव अभिषेक, शिव पूजन, शिव पुराण, कथा श्रवण करते हैं। आचार्य रोहित वशिष्ठ और तहसील शिव मंदिर के अधिष्ठाता पंडित अभिषेक कृष्णात्रेय का कहना है कि समस्त देवी देवताओं में भगवान शिव को प्रसन्न करना बेहद आसान है। श्रावण मास में व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। भगवान शिव की पूजा करने के लिए सबसे सरल विधि है कि प्रातकाल स्नान कर भगवान शंकर के मंदिर में जाकर शिवलिंग के समक्ष बैठकर पूजा अर्चना करें। भगवान शिव की पूजा से पहले शिव के गणों की पूजा करनी चाहिए। इनमें श्री गणेश जी, माता पार्वती, श्री कार्तिक भगवान, श्री नंदीश्वर, सर्प, गंगा शामिल है। 

पूजा में कम से कम पांच वस्तुओं का करें इस्तेमाल 
भगवान शिव की पूजा ऊं नम: शिवाय मंत्र से की जाती है। अत: कोई भी पूजन सामग्री भगवान शिव को अर्पण करते हुए ऊं नम: शिवाय का जप अवश्य करना चाहिए। भोलेनाथ की पूजा कम से कम पांच वस्तुओं से करनी चाहिए। इनमें चंदन, पुष्प, बेलपत्र, धूप, दीपक और भोग शामिल है। यह पांच वस्तुएं भगवान को अवश्य अर्पण करनी चाहिए। सर्वप्रथम भगवान शिव और उनके गणों को प्रणाम करना चाहिए। उसके बाद भगवान शिव को शुद्ध जल से स्नान कराना चाहिए। गाय का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर को मिलाकर पंचामृत से भगवान का अभिषेक करना चाहिए। प्रभु को स्नान कराने के बाद उन्हें गंगाजल से दोबारा स्नान कराएं। उसके पश्चात चंदन का तिलक लगाएं। बेलपत्र भगवान को चढ़ाए, धूप-दीप दिखाएं, भोग लगाएं। इसके साथ ही एकांत स्थान में बैठकर 1080 बार  ऊं नम: शिवाय का जाप करें।

सोमवार को विशेष महत्व, 30 जुलाई की शिवरात्री 
श्रावण मास के सोमवारों का अत्यधिक महत्व है। सावन के महीने में सोमवार के दिन भगवान शंकर की पूजा अर्चना करने पर कई गुणा लाभ मिलता है और भक्त को कष्टों से छुटकारा मिलता है। इस बार पहला सोमवार 22 जुलाई और आखिरी चौथा सोमवार 12 अगस्त को पड़ रहा है। श्रावण 17 जुलाई से शुरू होकर 15 अगस्त वाले दिन रक्षा बंधन पर्व तक चलेगा। 30 जुलाई को शिवरात्री मनाई जाएगी। 

आज से निकल पड़ेंगे कांवड़िए 
श्रावण मास शुरू होने के साथ ही बुधवार से कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाएगी। सहारनपुर के रास्ते पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी और आसपास के जिलों के लाखों कांवड़िएं हर वर्ष हरिद्वार और ऋषिकेश गंगाजल लेने जाते हैं और इसी रास्ते से लौटते हैं। शिवरात्री से तीन पूर्व बड़ी संख्या में डाक कांवड़ चलती है। इस बार भी पूरे कांवड़ मार्ग पर हर वर्ष की तरह 20 से अधिक शिविर संस्थाओं द्वारा लगाए जाएंगे।

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