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पानी बचाने के लिए आना होगा साथ
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save water for future
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मेरठ। जल ही जीवन है। अगर इसका सदुपयोग करने के साथ इसके संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में मानव जाति को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। पानी बचाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। एमडीए सभागार में बुधवार को जल संरक्षण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर आयोजित गोष्ठी में ये विचार इंडियन वाटर रिसोर्स मेरठ चैप्टर के संयोजक बीडी शर्मा ने व्यक्त किए। उन्होंने कमिश्नरी या एमडीए में जल शक्ति सूचना केंद्र बनाने का सुझाव रखा। इस केंद्र से शहरवासी पानी बचाने की विधि जान सकेंगे।
बीडी शर्मा ने कहा कि जल शक्ति सूचना केंद्र बननेे के बाद मेरठ के लोग घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना सीख सकेेंगे। यदि हमें पानी बचाना है तो इसके लिए हमें लोगों को एक मंच पर बुलाकर समझाना होगा। उन्होंने बताया कि वे अब तक कई स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा चुके हैं। उन्हीं के द्वारा डिजाइन किए गए रेन वाटर हार्र्र्वेस्टिंग सिस्टम को एमडीए भी उपयोग में लाने पर विचार कर रहा है। गोष्ठी में ‘मेरा शहर मेरी पहल’ सहित प्रमुख स्कूलों के मैनेजर और प्रधानाचार्य भी मौजूद रहे।
एमडीए वीसी राजेश पांडेय ने कहा कि वर्ष-2008 में 300 वर्ग मीटर के आवासों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लगाने का आदेश जारी किया गया था। इस शासनादेश पर कोई अमल नहीं किया गया। अगले एक सप्ताह में शहर के 15 स्थानों पर एमडीए रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाने जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्कूलों को भी इस मुहिम में आगे आकर काम करना होगा। जिससे हमारा कल बिना जल के न हो।
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स्कूलों को सरकारी कार्यालयों का दिया जिम्मा
गोष्ठी में सभी प्राइवेट स्कूलों को सरकारी कार्यालयों में एक-एक रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाने का सुझाव भी दिया गया। जिससे सभी स्कूल एक-एक सरकारी कार्यालय को गोद ले सकें। मेरा शहर मेरी पहल के सचिव विशाल जैन ने कहा कि हम घरों में भी छोटा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की तरफ बढ़ चुके हैं। इसकी शुरुआत अगले कुछ दिनों में हो जाएगी। जल्द ही इस विषय पर मेरठ सिटी पब्लिक स्कूल में कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें कमिश्नर अनीता मेश्राम भी मौजूद रहेंगी।
छोटे सिस्टम से बड़ी मुहिम पर जोर
गोष्ठी में ऐसे सिस्टम पर जोर दिया गया, जिससे हर कोई पानी बचाने की मुहिम में आगे आ सके। यह सिस्टम मात्र दो से ढाई हजार में लग जाएगा। यह सिर्फ तीन दिन में बनकर तैयार हो जाता है। इसके लिए मेरा शहर मेरी पहल से संपर्क कर सकते हैं।
यह रखे सुझाव
1. सभी पार्षद अपने क्षेत्रों में कम से कम पांच रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाएं।
2. पानी की सप्लाई मीटर के माध्यम से होनी चाहिए।
3. सरकारी भवनों की सूची तैयार हो। जहां सिस्टम खराब हैं, वहां शुरू कराने चाहिए।
4. स्कूलों में बच्चों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के बारे में पढ़ाना होगा। जिससे जागरूकता बढ़े।
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बीडी शर्मा ने कहा कि जल शक्ति सूचना केंद्र बननेे के बाद मेरठ के लोग घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना सीख सकेेंगे। यदि हमें पानी बचाना है तो इसके लिए हमें लोगों को एक मंच पर बुलाकर समझाना होगा। उन्होंने बताया कि वे अब तक कई स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा चुके हैं। उन्हीं के द्वारा डिजाइन किए गए रेन वाटर हार्र्र्वेस्टिंग सिस्टम को एमडीए भी उपयोग में लाने पर विचार कर रहा है। गोष्ठी में ‘मेरा शहर मेरी पहल’ सहित प्रमुख स्कूलों के मैनेजर और प्रधानाचार्य भी मौजूद रहे।
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एमडीए वीसी राजेश पांडेय ने कहा कि वर्ष-2008 में 300 वर्ग मीटर के आवासों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लगाने का आदेश जारी किया गया था। इस शासनादेश पर कोई अमल नहीं किया गया। अगले एक सप्ताह में शहर के 15 स्थानों पर एमडीए रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाने जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्कूलों को भी इस मुहिम में आगे आकर काम करना होगा। जिससे हमारा कल बिना जल के न हो।
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स्कूलों को सरकारी कार्यालयों का दिया जिम्मा
गोष्ठी में सभी प्राइवेट स्कूलों को सरकारी कार्यालयों में एक-एक रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाने का सुझाव भी दिया गया। जिससे सभी स्कूल एक-एक सरकारी कार्यालय को गोद ले सकें। मेरा शहर मेरी पहल के सचिव विशाल जैन ने कहा कि हम घरों में भी छोटा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की तरफ बढ़ चुके हैं। इसकी शुरुआत अगले कुछ दिनों में हो जाएगी। जल्द ही इस विषय पर मेरठ सिटी पब्लिक स्कूल में कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें कमिश्नर अनीता मेश्राम भी मौजूद रहेंगी।
छोटे सिस्टम से बड़ी मुहिम पर जोर
गोष्ठी में ऐसे सिस्टम पर जोर दिया गया, जिससे हर कोई पानी बचाने की मुहिम में आगे आ सके। यह सिस्टम मात्र दो से ढाई हजार में लग जाएगा। यह सिर्फ तीन दिन में बनकर तैयार हो जाता है। इसके लिए मेरा शहर मेरी पहल से संपर्क कर सकते हैं।
यह रखे सुझाव
1. सभी पार्षद अपने क्षेत्रों में कम से कम पांच रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाएं।
2. पानी की सप्लाई मीटर के माध्यम से होनी चाहिए।
3. सरकारी भवनों की सूची तैयार हो। जहां सिस्टम खराब हैं, वहां शुरू कराने चाहिए।
4. स्कूलों में बच्चों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के बारे में पढ़ाना होगा। जिससे जागरूकता बढ़े।