मेरठ में सौरभ हत्याकांड में दोषी पत्नी मुस्कान को फांसी की सजा सुनाई गई है। जिला कारागार के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी महिला बंदी को मृत्युदंड से दंडित किया गया है। जेल प्रशासन ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए मुस्कान को उन महिला कैदियों के साथ शिफ्ट कर दिया है जो पहले से संगीन जुर्मों में जेल में बंद हैं।
सौरभ हत्याकांड: जेल में मुस्कान की बदली बैरक, 17 उम्रकैद की सजा काट रहीं महिला कैदियों संग रहेगी, कड़ी निगरानी
सौरभ राजपूत हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाए मुस्कान और साहिल की मेरठ जिला जेल में बैरक बदली गई है। जेल प्रशासन के मुताबिक, मुस्कान को उम्रकैद की सजा काट रहीं 17 महिला कैदियों के साथ रखा गया है।
मुस्कान और साहिल की बदली बैरक
मृत्युदंड की सजा पाए साहिल और मुस्कान रस्तोगी को जेल नियमों के तहत अब कैदियों के सामान्य कपड़े दे दिए गए हैं। साहिल को बैरक नंबर 395 और मुस्कान को बैरक नंबर 396 में तन्हाई (कड़ी निगरानी) में शिफ्ट किया गया है।
बुधवार की पूरी रात इन दोनों को भी नींद नहीं आई। जेल प्रशासन इन पर तीसरी आंख यानी सीसीटीवी कैमरों से 24 घंटे पैनी नजर रख रहा है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक के मुताबिक, दोनों दोषियों की मानसिक स्थिति को देखते हुए एक बार फिर उनकी काउंसलिंग कराई जाएगी।
सेंट्रल जेलों में जगह नहीं, जिला जेल पर बढ़ा बोझ
जेल प्रशासन ने बताया कि सजायाफ्ता कैदियों को रखने वाली सेंट्रल जेलों में जगह (क्षमता) न होने के कारण मेरठ जिला कारागार में वर्तमान में 278 ऐसे पुरुष व महिला कैदी बंद हैं, जिन्हें अदालत से उनके गुनाहों की अंतिम सजा मिल चुकी है।
मेरठ। सौरभ राजपूत हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाए मुस्कान रस्तोगी को मेरठ जिला कारागार में दूसरी महिला कैदियों के साथ शिफ्ट किया गया है। जेल रिकॉर्ड के मुताबिक, यहां पहले से 17 महिला कैदी ऐसी हैं जिन्हें अदालत उम्रकैद की सजा सुना चुकी है। जेल प्रशासन के अनुसार, मुस्कान को भी इन्हीं महिला कैदियों के साथ रखा गया है।
मुस्कान को बाराबंकी जेल में शिफ्ट किए जाने की चर्चा भी रही, लेकिन जेल अधीक्षक के मुताबिक, ऐसी कोई जानकारी नहीं है। फिलहाल मुस्कान मेरठ जिला कारागार में ही बंद है। सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। फैसले के बाद जेल में दोनों की व्यवस्था और निगरानी को लेकर बदलाव किए गए हैं।
साहिल और मुस्कान की बैरक बदली, सीसीटीवी से निगरानी
जेल प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, मृत्युदंड की सजा पाए साहिल और मुस्कान को जेल नियमों के तहत सामान्य कैदी कपड़े दिए गए हैं। दोनों की बैरक बदली गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, साहिल को बैरक नंबर 395 और मुस्कान को बैरक नंबर 396 में रखा गया है। दोनों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
जेल प्रशासन के मुताबिक, सीसीटीवी कैमरों के जरिए दोनों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि दोनों की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उनकी काउंसलिंग दोबारा कराई जाएगी।
जेल प्रशासन की ओर से यह भी बताया गया कि सजा सुनाए जाने के बाद दोनों की निगरानी की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि, उनकी मानसिक स्थिति के बारे में कोई स्वतंत्र चिकित्सीय जानकारी उपलब्ध नहीं है।
सेंट्रल जेलों में जगह की कमी, जिला जेल में 278 सजायाफ्ता बंदी
जेल प्रशासन के अनुसार, सेंट्रल जेलों में क्षमता के अनुरूप जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण मेरठ जिला कारागार में 278 ऐसे पुरुष और महिला बंदी हैं, जिन्हें अदालत से सजा मिल चुकी है। नियमों के मुताबिक, ऐसे बंदियों को सेंट्रल जेल भेजा जाना था, लेकिन जगह की कमी के चलते उनका स्थानांतरण नहीं हो सका है।
जेल प्रशासन के दिए आंकड़ों के मुताबिक, मेरठ जिला कारागार में इस समय कुल 1,950 बंदी निरुद्ध हैं। इनमें 64 महिला बंदी शामिल हैं। सेंट्रल जेलों में जगह की कमी के कारण जिला जेल पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।
सौरभ राजपूत हत्याकांड में सजा के बाद मुस्कान और साहिल की जेल में व्यवस्था में हुए बदलाव भी इसी मामले के नए घटनाक्रम का हिस्सा हैं। आगे की कानूनी प्रक्रिया और जेल प्रशासन के फैसलों के अनुसार उनकी स्थिति में बदलाव हो सकता है।