सावन के शनिवार में बन रहे ये शुभ संयोग, ऐसा करने से मिलेगा लाभ, मिटेंगे कष्ट
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श्रावण मास का पहला शनिवार कष्ट निवारण करेगा तो तीसरा शनिवार नाग पंचमी के साथ विशेष योग में मनाया जाएगा। श्रावण के शनिवार पूरे वर्ष के शनिवार में सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलोजिकल साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स के अनुसार इस वर्ष श्रावण के दोनों प्रदोष शनिवार होंगे। साथ ही शनिप्रदोष अतिविशेष है।
नृसिंह, शनि, हनुमान व शिव की पूजा
स्कंदपुराण के अनुसार श्रावण मास के शनिवार को नृसिंह, शनि और अंजनी पुत्र हनुमान जी के साथ महादेव शिव शंकर की पूजा करनी चाहिए। आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि इस वर्ष श्रावण मास में दोनों प्रदोष पर शनिवार होने के कारण शनि प्रदोष या शनि त्रयोदशी व्रत पूजा का विशेष महत्व रहेगा।
अल्पकाल मृत्यु से निवारण
शिवपुराण के अनुसार शनैश्चर अल्पकाल में होने वाली मृत्यु का निवारण करने वाले हैं। आज के दिन बुद्धिमान पुरुष रुद्र आदि की पूजा करें। तिल के होम से, दान से देवताओं को संतुष्ट करके ब्राह्मणों को तिलमिश्रित अन्न भोजन कराएं। ज्योतिष वैज्ञानिक भारत ज्ञान भूषण ने बताया कि स्कंद पुराण के अनुसार श्रावण के शनिवार को हनुमान जी की पूजा बहुत ही शुभ फल देने वाली हैं। रुद्रमंत्र के द्वारा तेल से हनुमान जी का अभिषेक करना चाहिए। तेल में मिश्रित सिंदूर का लेप उन्हें समर्पित करना चाहिए। पुष्प की मालाओं, नैवेद्य से उनकी पूजा करनी चाहिए।
युवा पीढ़ी के लिए हनुमान चालीसा पढ़ना जरूरी
श्रावण में शनिवार के दिन वायु पुत्र हनुमानजी की आराधना करके मनुष्य वज्र तुल्य शरीर, निरोग और बलवान हो जाता है। महामंडलेश्वर शनि पीठाधीश्वर महेंद्र दास महाराज ने बताया कि युवा पीढ़ी को हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। अंजनी पुत्र की कृपा से कोई भी वेगवान और बुद्धि वैभव से युक्त हो जाता है। उसके शत्रु नष्ट हो जाते हैं। मित्रों की वृद्धि के साथ कीर्तिमान हो जाता है।
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श्रावण शनिवार को शनि पूजा जरूरी
श्रावण शनिवार तिल के तेल या सरसों तेल से शनि का अभिषेक करना चाहिए। भगवान शिव शनिदेव के गुरु हैं। शिव जी ने ही शनि देव को न्यायाधीश का पद सौंपा। इसके फलस्वरूप शनि देव मनुष्य, देव, पशु सभी को कर्मों के अनुसार फल देते हैं। आचार्य संजय त्रिपाठी के अनुसार श्रावण के महीने में जो भी भगवान शिव के साथ शनि की उपासना करता है उसे शुभ फल प्राप्त होते हैं। भगवान शिव के अवतार पिप्पलाद, भैरव और रुद्रावतार हनुमान जी की पूजा भी शनि के प्रकोप से रक्षा करती है।
आरंभ होंगे महामृत्युंजय मंत्र जाप
महामृत्युंजय मंत्र के सवा लाख जप शनिवार से ही आरंभ किए जाते है। पंडित चंडी प्रसाद ने बताया कि जो लोग खुद जप नहीं कर सकते वो किसी विद्वान ब्राह्मण से जप कराते हैं। जप खत्म होने के बाद रुद्र यज्ञ के साथ सात तरह के अनाज का दान करें। शनिदेव को लोहबान, बरगद का पत्ता चढ़ाएं। भोग स्वरूप इमरती चढ़ाएं।
नृसिंह पूजा में लगेगा खिचड़ी का भोग
स्तंभ पर नृसिंह की सुंदर प्रतिमा बनाकर हल्दी युक्त चंदन से और नीले लाल और पीले सुंदर पुष्पों से लक्ष्मी सहित जगतपति नृसिंह का भली भांति पूजन करके उन्हें खिचड़ी का नैवेद्य और कुंजर नामक शाक का भोग लगाएं। महामंडलेश्वर नीलिमानंद जी ने बताया कि प्रसाद स्वयं भी खाना चाहिए और ब्राह्मणों को खिलाना चाहिए। तिल का तेल और घृत स्नान भगवान नृसिंह को प्रिय है। शनिवार के दिन तिल सभी कार्यों के लिए प्रशस्त है। इस प्रकार श्रावण मास में चारों शनिवारों में इस व्रत को करना चाहिए। उसके घर में लक्ष्मी पूर्ण रुप से स्थित रहती हैं। धन-धान्य की समृद्धि होती है। पुत्रहीन व्यक्ति पुत्रवान हो जाता है और इस लोक में सुख भोग कर अंत में वैकुंठ को प्राप्त करता है।
श्रावण मास के शनिवार
11 जुलाई - प्रथम शनिवार
18 जुलाई - शनि प्रदोष व्रत
25 जुलाई - नाग पंचमी/कल्कि जयंती
1 अगस्त - शनि प्रदोष व्रत
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