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परमानेंट डीएल के लिए सारथी का ‘वीआईपी कोटा’ बना वरदान, जानें कैसे हो रहा कारगर साबित
राजदीप जाखड़ , अमर उजाला, मेरठ
Updated Thu, 13 Dec 2018 11:15 AM IST
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डीएल व्यवस्था को पारदर्शी बनाने में कारगर साबित हुआ परिवहन विभाग का सारथी 4.0 सिस्टम अब परमानेंट डीएल के लिए भी वरदान साबित हो रहा है। डीएल बनवाने की ड्यू डेट से तीन चार दिन पहले जाने वालों का अब वीआईपी कोटे के तहत डीएल बनाया जा रहा है। पहले लंबा टाइम स्लॉट मिलने के चलते अभ्यर्थियों की डीएल की डेट निकल जाती थी और उन्हें दोबारा से लर्निंग लाइसेंस बनवाना पड़ता था। वीआईपी कोटे ने अब इस समस्या को खत्म कर दिया है।
आरटीओ में बढ़ते दलाल राज को खत्म करने के लिए परिवहन विभाग ने डीएल के लिए सारथी-4.0 और वाहनों के रजिस्ट्रेशन आदि के लिए वाहन-4.0 सिस्टम लागू किया था। सारथी सिस्टम के तहत डीएल के लिए अब आनलाइन आवेदन होता है। आवेदक को परिवहन डॉट गव डॉट इन साइट पर जाकर आवेदन करना होता है। इसके बाद आवेदक को उसके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर टाइम स्लॉट आवंटित किया जाता है। जिस दिन का टाइम स्लॉट होता है, उस दिन आफिस जाकर आवेदक को डीएल प्रक्रिया में भाग लेना पड़ता है। लर्निंग के लिए आनलाइन परीक्षा होती है और परमानेंट डीएल के लिए वाहन चलाकर दिखाया जाता है।
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आरटीओ में बढ़ते दलाल राज को खत्म करने के लिए परिवहन विभाग ने डीएल के लिए सारथी-4.0 और वाहनों के रजिस्ट्रेशन आदि के लिए वाहन-4.0 सिस्टम लागू किया था। सारथी सिस्टम के तहत डीएल के लिए अब आनलाइन आवेदन होता है। आवेदक को परिवहन डॉट गव डॉट इन साइट पर जाकर आवेदन करना होता है। इसके बाद आवेदक को उसके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर टाइम स्लॉट आवंटित किया जाता है। जिस दिन का टाइम स्लॉट होता है, उस दिन आफिस जाकर आवेदक को डीएल प्रक्रिया में भाग लेना पड़ता है। लर्निंग के लिए आनलाइन परीक्षा होती है और परमानेंट डीएल के लिए वाहन चलाकर दिखाया जाता है।
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ड्यू डेट निकलने के बाद दोबारा बनवाना पड़ता था लर्निंग लाइसेंस
आवेदक का पहले छह महीने के लिए लर्निंग लाइसेंस बनाया जाता है। लर्निंग लाइसेंस के बनने वाली डेट के एक महीने के बाद और छह महीने वाली डेट के अंदर अभ्यर्थी को परमानेंट लाइसेंस बनवाना होता है। अगर कोई अभ्यर्थी ड्यू डेट से दो चार दिन पहले आवेदन करता था, तो उसे लंबा टाइम स्लॉट मिलने के चलते उसका लर्निंग लाइसेंस खत्म हो जाता था। लेकिन अब विभाग ने ऐसे केस को हैंडल करने के लिए सॉफ्टवेयर में वीआईपी कोटे की व्यवस्था कर दी है। इसके तहत ऐसे लोगों को तुरंत ही अगले दिन की डेट मिल जाती है और उसका परमानेंट डीएल बन जाता है।
वीआईपी कोटे की संख्या 150
विभाग ने परमानेंट डीएल मामले में वीआईपी कोटे के तहत 150 स्लॉट जारी करने की व्यवस्था दी है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे 150 लोगों को वीआईपी कोटे की सुविधा दी जाती है जो परमानेंट लाइसेंस बनवाने की ड्यू डेट से दो चार दिन पहले ही पहुंचते हैं।
आवेदक का पहले छह महीने के लिए लर्निंग लाइसेंस बनाया जाता है। लर्निंग लाइसेंस के बनने वाली डेट के एक महीने के बाद और छह महीने वाली डेट के अंदर अभ्यर्थी को परमानेंट लाइसेंस बनवाना होता है। अगर कोई अभ्यर्थी ड्यू डेट से दो चार दिन पहले आवेदन करता था, तो उसे लंबा टाइम स्लॉट मिलने के चलते उसका लर्निंग लाइसेंस खत्म हो जाता था। लेकिन अब विभाग ने ऐसे केस को हैंडल करने के लिए सॉफ्टवेयर में वीआईपी कोटे की व्यवस्था कर दी है। इसके तहत ऐसे लोगों को तुरंत ही अगले दिन की डेट मिल जाती है और उसका परमानेंट डीएल बन जाता है।
वीआईपी कोटे की संख्या 150
विभाग ने परमानेंट डीएल मामले में वीआईपी कोटे के तहत 150 स्लॉट जारी करने की व्यवस्था दी है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे 150 लोगों को वीआईपी कोटे की सुविधा दी जाती है जो परमानेंट लाइसेंस बनवाने की ड्यू डेट से दो चार दिन पहले ही पहुंचते हैं।
बैकलॉग भी घटा, अब पांच से सात दिन आगे का मिल रहा स्लॉट
दलाल राज के चलते लर्निंग लाइसेंसों का टाइम स्लॉट आवेदन डेट से एक महीने से डेढ़ महीने बाद तक का मिलता था। लेकिन अब सख्ती होने के चलते यह स्लॉट पांच से सात दिन के अंदर का मिल रहा है। इससे विभाग में डीएल का बैकलॉग भी घट गया है।
40 डीएल बनते हैं रोजाना
आरटीओ में रोजाना करीब 400 डीएल बनाए जाते हैं। इसमें 150-150 लर्निंग और परमानेंट लाइसेंस के स्लॉट जारी होते है और 100 स्लॉट डुप्लीकेट और संशोधन आदि वाले डीएल के होते हैं।
दलाल राज के चलते लर्निंग लाइसेंसों का टाइम स्लॉट आवेदन डेट से एक महीने से डेढ़ महीने बाद तक का मिलता था। लेकिन अब सख्ती होने के चलते यह स्लॉट पांच से सात दिन के अंदर का मिल रहा है। इससे विभाग में डीएल का बैकलॉग भी घट गया है।
40 डीएल बनते हैं रोजाना
आरटीओ में रोजाना करीब 400 डीएल बनाए जाते हैं। इसमें 150-150 लर्निंग और परमानेंट लाइसेंस के स्लॉट जारी होते है और 100 स्लॉट डुप्लीकेट और संशोधन आदि वाले डीएल के होते हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
लोगों की सुविधा के लिए टाइम स्लॉट बढ़ाने के साथ वीआईपी कोटा प्रणाली भी लागू की गई है। यह प्रणाली उन लोगों के लिए कारगर साबित हो रही है जो तय समय के अंदर परमानेंट लाइसेंस बनवाना भूल जाते हैं और डयू डेट से दो चार दिन पहले ही आवेदन करते हैं। -डॉ. विजय कुमार, आरटीओ मेरठ
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लोगों की सुविधा के लिए टाइम स्लॉट बढ़ाने के साथ वीआईपी कोटा प्रणाली भी लागू की गई है। यह प्रणाली उन लोगों के लिए कारगर साबित हो रही है जो तय समय के अंदर परमानेंट लाइसेंस बनवाना भूल जाते हैं और डयू डेट से दो चार दिन पहले ही आवेदन करते हैं। -डॉ. विजय कुमार, आरटीओ मेरठ
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