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भव्यता और सुंदरता संजोए है सरधना का चर्च

Wed, 05 Oct 2022 01:42 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 05 Oct 2022 01:42 AM IST
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Sardhana's Church has cherished grandeur and beauty
भव्यता और सुंदरता संजोए है सरधना का चर्च
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सरधना। कस्बे का ऐतिहासिक रोमन कैथलिक चर्च पिछले दो सौ साल से अपनी भव्यता और कला के बेजोड़ नमूूने को संजोए हुए है। इसे बेगम समरू द्वारा बनवाया गया था। यह चर्च सौहार्द, आस्था और इतिहास का बेजोड़ नमूना है। चर्च को ईसाई धर्म के लोग कृपाओं की माता मरियम का तीर्थस्थान मानते हैं। मान्यता है कि माता मरियम श्रद्धालुओं पर कृपा बरसाती हैं। मां मरियम के दर्शन के लिए यहां देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। इस चर्च के कारण ही सरधना का नाम अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमकता है।
ये है चर्च का इतिहास
बेगम समरू द्वारा बनवाए गए इस चर्च को पोप जॉन 23वें ने 1961 में माइनर बसिलिका का दर्जा दिया था। बताना जरूरी होगा कि ऐतिहासिक और भव्य गिरिजाघरों को ही यह दर्जा प्राप्त होता है। बड़ी बात यह है कि इस चर्च को बनाने में करीब 11 साल लगे। चर्च के निर्माण का कार्य वर्ष 1809 में शुरू हुआ था। इस ऐतिहासिक चर्च के खास दरवाजे पर इमारत के बनने का वर्ष 1822 दशार्या गया है। इस चर्च के निर्माण में कई सौ लोग समेत कलाकार भी लगे थे। यहां हर वर्ष नवंबर माह के दूसरे शनिवार-रविवार को मेले का आयोजन होता है। 25 दिसंबर को लोग मां मरियम के दर्शन करने आते हैं।
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मेरठ मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर सरधना में ऐतिहासिक चर्च सौहार्द, आस्था और कलात्मक इतिहास का भव्य नमूना है। बागपत के कोताना गांव में लतीफ खां के परिवार में जन्मी फरजाना बेगम अपने सौतेले भाइयों के जुल्म से परेशान होकर मां के साथ दिल्ली चली गई थीं। उन्होंने नृत्य को अपना पेशा बनाया। उनकी मुलाकात सरधना रियासत के हुक्मरान वाल्टर रेनार्ड समरू से हुई। रेनार्ड समरू और फरजाना में प्रेम प्रसंग शुरू होने के बाद दोनों एक-दूसरे के हो गए। फरजाना नर्तकी से बेगम समरू बन गई।
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वाल्टर रेनार्ड समरू की मृत्यु के बाद बेगम समरू ने शासन किया और कैथोलिक ईसाई धर्म अपना लिया। चर्च में जिस स्थान पर प्रार्थना होती है, उसे अल्तार कहा जाता है। अल्तार के निर्माण के लिए सफेद संगमरमर जयपुर से लाया गया था। इसमें फूलों की पच्चीकारी खूबसूरत है। इसमें कौरनेलियन, जास्पर और मैलकाइट जैसे कई कीमती पत्थर जड़े हैं। निर्माण के दौरान चर्च की सुंदरता को नहीं, बल्कि कैथोलिक मजहब के रिवाज को ध्यान में रखा गया।

बड़े अल्तार के ऊपर और दाएं-बाएं तरफ बने अल्तारों पर तीन गुंबद हैं। बड़े अल्तार वाली गुंबद बड़ी और बाकी दोनों छोटी हैं। ये तीनों रोम में बने संत पेत्रुस के महागिरिजाघर की गुंबद से मिलती-जुलती हैं। इन सबके पीछे आसमान को छूती दिखाई देने वाली दो मीनार हैं। माता मरियम की पवित्र तस्वीर को जुलूस के रूप में सरधना लाकर चर्च में स्थापित किया गया।
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