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पांडवों ने की थी सरधना के पांडेश्वर मंदिर की स्थापना
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सरधना के महादेव मंदिर में पांडवों ने की थी शिवलिंग की स्थापना
- फोटो : SARDANA
पांडवों ने की थी सरधना के पांडेश्वर मंदिर की स्थापना
सरधना। सावन में सरधना नगर का ऐतिहासिक महाभारतकालीन महादेव मंदिर आस्था का केंद्र बन जाता हैं। महाशिवरात्रि पर मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की जाती है। बताया जाता है कि बरनावा जाते समय पांड़वाें ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी। मान्यता है कि इस मंदिर में जलाभिषेक करने वाले भक्तों की भोलेनाथ मन्नत जरूर पूरी करते हैं।
सरधना का ऐतिहासिक महाभारतकालीन महादेव मंदिर में समय समय पर धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। विशेषकर कृष्ण जन्माष्टमी एवं होली, दीपावली पर धार्मिक कार्यक्रमों के साथ महाशिवरात्रि पर मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की जाती हैं। मंदिर के पुजारी शंकर सिंह व अन्य बुजुुर्गों के अनुसार महाभारतकाल में युधिष्ठर ने धर्म युद्ध से पहले यहां पर शिवलिंग की स्थापना कर बाबा भोलेनाथ से युद्ध में विजय होने का आशीर्वाद लिया था। इसी मंदिर में पांडव द्रोपदी संग पूजा अर्चना करने आते थे। पांडवों के पूजा करने से ही इस मंदिर का नाम पांडेश्वर मंदिर भी पड़ा। हस्तिनापुर से बरनावा लाक्षागृह जाते हुए कुंती अपने पुत्रों के साथ इस वानखंडी घने जंगल में रात्रि में आराम के लिए रुकी तो कुंती को लाक्षागृह में होने वाली घटना स्वप्न में दिखाई दी। स्वन्न में बताया कि यदि इस जगह शिवलिंग की स्थापना कर मंजिल की तरफ बढ़ोगे तो तुम जिंदा बच सकते हो। कुंती ने पुत्रों को स्वप्न बताया तो उन्होंने रात्रि में ही हरिद्वार से शिवलिंग लाकर स्थापित करने के साथ ही जलाभिषेक किया। इसके बाद पांडव दुर्योधन द्वारा बनाए गए लाक्षागृह में जिंदा जलने से बच सके। वापस लौटते समय भी पांडवों ने इस मंदिर में जलाभिषेक किया। मान्यता है कि जो शिवभक्त सावन में प्रतिदिन पांडेश्वर मंदिर में शिवलिंग पर पंचामृत दुग्ध, घी, दही, शहद, गंगाजल से स्नान कराने के बाद पूजा-अर्चना करता है उसे मनवांछित फल प्राप्त होता है।
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सरधना। सावन में सरधना नगर का ऐतिहासिक महाभारतकालीन महादेव मंदिर आस्था का केंद्र बन जाता हैं। महाशिवरात्रि पर मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की जाती है। बताया जाता है कि बरनावा जाते समय पांड़वाें ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी। मान्यता है कि इस मंदिर में जलाभिषेक करने वाले भक्तों की भोलेनाथ मन्नत जरूर पूरी करते हैं।
सरधना का ऐतिहासिक महाभारतकालीन महादेव मंदिर में समय समय पर धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। विशेषकर कृष्ण जन्माष्टमी एवं होली, दीपावली पर धार्मिक कार्यक्रमों के साथ महाशिवरात्रि पर मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की जाती हैं। मंदिर के पुजारी शंकर सिंह व अन्य बुजुुर्गों के अनुसार महाभारतकाल में युधिष्ठर ने धर्म युद्ध से पहले यहां पर शिवलिंग की स्थापना कर बाबा भोलेनाथ से युद्ध में विजय होने का आशीर्वाद लिया था। इसी मंदिर में पांडव द्रोपदी संग पूजा अर्चना करने आते थे। पांडवों के पूजा करने से ही इस मंदिर का नाम पांडेश्वर मंदिर भी पड़ा। हस्तिनापुर से बरनावा लाक्षागृह जाते हुए कुंती अपने पुत्रों के साथ इस वानखंडी घने जंगल में रात्रि में आराम के लिए रुकी तो कुंती को लाक्षागृह में होने वाली घटना स्वप्न में दिखाई दी। स्वन्न में बताया कि यदि इस जगह शिवलिंग की स्थापना कर मंजिल की तरफ बढ़ोगे तो तुम जिंदा बच सकते हो। कुंती ने पुत्रों को स्वप्न बताया तो उन्होंने रात्रि में ही हरिद्वार से शिवलिंग लाकर स्थापित करने के साथ ही जलाभिषेक किया। इसके बाद पांडव दुर्योधन द्वारा बनाए गए लाक्षागृह में जिंदा जलने से बच सके। वापस लौटते समय भी पांडवों ने इस मंदिर में जलाभिषेक किया। मान्यता है कि जो शिवभक्त सावन में प्रतिदिन पांडेश्वर मंदिर में शिवलिंग पर पंचामृत दुग्ध, घी, दही, शहद, गंगाजल से स्नान कराने के बाद पूजा-अर्चना करता है उसे मनवांछित फल प्राप्त होता है।

सरधना स्थित महाभारतकालीन महादेव मंदिर-पांडवों ने की थी इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना- फोटो : SARDANA
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