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सपा सरकार के करम को भाजपा शासन की हरी झंडी, यह है प्रकरण
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Sun, 11 Jun 2017 02:17 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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करीब सौ करोड़ रुपये की जमीन को अधिग्रहण मुक्त कर सूबे की पिछली सपा सरकार ने जाते-जाते करम किया था, जिसे अब भाजपा सरकार ने भी हरी झंडी दे दी है। एमडीए का दावा है कि प्राधिकरण ने इस जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जंग जीती थी और इस बाबत प्रदेश सरकार में आपत्ति दर्ज कराई थी। लेकिन वर्तमान सरकार ने एमडीए की आपत्तियां खारिज कर दीं। एमडीए को इससे तगड़ा झटका लगा है और अधिकारी इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाने पर मंथन कर रहे हैं।
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यह है प्रकरण
गंगानगर एक्सटेंशन के लिए ग्राम अब्दुल्लापुर में कुल 5.703 हेक्टेयर यानी करीब पचास हजार वर्ग मीटर से ज्यादा भूमि के खसरा नंबर 755, 756, 757, 758, 759, 760, 767, 768, 769 को अधिग्रहण में शामिल किया गया। इसी गांव की भूमि खसरा नंबर 535, 538, 552, 556 तथा 560 जिसका कुल क्षेत्रफल 5.576 हेक्टेयर है, को भी अधिग्रहण में शामिल किया गया था। दोनों के लिए विवाद चला और प्रतिकर की मांग को लेकर किसानों ने विरोध दर्ज कराया। एमडीए अधिकारियों के मुताबिक इस जमीन का मुआवजा कोषागार में जमा कर दिया गया था। यदि वर्तमान में इन जमीनों का बाजार भाव देखा जाए तो तो यह सौ करोड़ रुपये से भी ज्यादा है।
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सुप्रीम कोर्ट से मिली थी जीत
इस बाबत मामला सुप्रीम कोर्ट में गया। दो बार तो सुप्रीम कोर्ट से ही एमडीए के पक्ष में फैसला हो चुका है। सुदर्शन जैन की तरफ से इस प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की गई थी, जिसमें सीनियर एडवोकेट सलमान खुर्शीद ने पैरवी की थी। एमडीए की तरफ से एटार्नी जनरल भारत सरकार मुकुल रोहतगी ने पैरवी की और इस एसएलपी को खारिज कर दिया गया। किसानों का कहना था कि इस जमीन पर एमडीए का कब्जा नही है और उन्होंने मुआवजा भी नहीं उठाया है। नई भू अधिग्रहण नीति के अनुसार अब इस जमीन को अधिग्रहण मुक्त किया जाए। अदालत ने माना कि एक्सटेंशन की 204 एकड़ जमीन पर एमडीए का कब्जा है। वहां एमडीए नियोजन कर रहा है। आठ अप्रैल 2013 को फैसला दिया था कि भू अधिग्रहण एक्ट 1984 के तहत एमडीए ने इस जमीन का सही अधिग्रहण किया है। लिहाजा इस पर नया भू अधिग्रहण एक्ट लागू नहीं होता है।
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पिछली सरकार ने किया करम
11 मार्च 2017 को विधानसभा चुनाव की मतगणना थी। इससे एक दिन पहले यानी दस मार्च को उप्र शासन आवास एवं शहरी नियोजन के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव सदाकांत ने पत्र जारी करते हुए इस जमीन को अर्जन मुक्त कर दिया। इसी पर सवाल खड़े हुए थे कि मतगणना से ठीक एक दिन पहले ही यह निर्णय क्याें लिया गया।
आपत्तियां कर दीं खारिज
इस बाबत वीसी एमडीए योगेेेंद्र यादव ने 28 मार्च को अपर मुख्य सचिव को दो पत्र लिखकर अपनी तरफ से आपत्तियां दर्ज कराई थीं। कहा कि यह जमीनें गलत तरीके से अर्जन मुक्त की गई हैं। यहां एमडीए विकास के लिए 21 करोड़ खर्च कर चुका है। किसानों का प्रतिकर भी जारी कर चुका है। कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भी अवमानना है। ऐसे में अर्जन मुक्त करने के आदेश को निरस्त करें। बावजूद इसके अब योगी सरकार ने एमडीए की आपत्तियां खारिज करते हुए दोनों ही प्रकरणों में पुराने निर्णय को ही बरकरार रखा है। ऐसे में एमडीए को तगड़ा झटका लगा है और अदालत में इसे ले जाने की फिर से तैयारी है।
किसान बोले, हमारा पक्ष सही
इस मामले में किसानों का कहना है कि एमडीए गलत तथ्य पेश कर उनकी जमीन को हड़पना चाहता है। इस जमीन से जुड़े किसान मोहित जैन, त्रिलोक राम आहुजा, राहुल आहुजा आदि के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में जाने वाला पक्ष दूसरा था। हम तो शासन में गए थे, सुप्रीम कोर्ट नहीं गए थे। शासन ने हमारी बात सुनी। एमडीए गलत तथ्य पेश कर रहा है इसलिए एमडीए का रिव्यू भी शासन में खारिज हुआ है।