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Meerut News: मां सिद्धिदात्री की पूजा से होती है मोक्ष की प्राप्ति
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हस्तिनापुर। कस्बे के पांडव टीले पर स्थित प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में नवरात्रों के अवसर पर चल रही दुर्गा पूजा के नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की विधिविधान से पूजा-अर्चना की गई। हवन यज्ञ और कन्या पूजन के बाद भंडारे का आयोजन किया गया।
मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सुदेश कुमार ने बताया कि शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना कर कन्या पूजन किया गया। मां के इस स्वरूप की पूजा-अर्चना करने से सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं। इसलिए इनकी पूजा सभी देव, ऋषि-मुनि, असुर, किन्नर और गृहस्थ आश्रम वाले करते हैं।
आचार्य मुकेश शांडिल्य ने माता की कथा सुनाते हुए कहा कि नवरात्रि के नौवें दिन मां दुर्गा की नौवीं शक्ति माता सिद्धिदात्री की विधिविधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। माता दुर्गा का यह स्वरूप सिद्धि और मोक्ष देने वाला है। इसलिए माता को मां सिद्धिदात्री कहा जाता है। इनकी पूजा-अर्चना करने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। देवी पुराण के मुताबिक, भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही सिद्धियों को प्राप्त किया था। इन्ही देवी की कृपा से भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। यह देवी मां लक्ष्मी के समान कमल के आसन पर विराजमान हैं। नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा करने के लिए प्रसाद और नवरस युक्त भोजन और नौ प्रकार के फल फूल आदि का अर्पण कर नवरात्र का समापन किया गया। शनिवार को मूर्ति विसर्जन किया जाएगा। मंदिर प्रांगण में भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुकेश ठाकुर, जेपी बैंसला, राजीव चौधरी, ज्योति शर्मा, दिनेश शर्मा, कृष्ण सैनी, रामपाल, चंद्र प्रकाश शुक्ला, पंडित रोहित शर्मा, विशु शर्मा आदि मौजूद रहे।
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मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सुदेश कुमार ने बताया कि शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना कर कन्या पूजन किया गया। मां के इस स्वरूप की पूजा-अर्चना करने से सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं। इसलिए इनकी पूजा सभी देव, ऋषि-मुनि, असुर, किन्नर और गृहस्थ आश्रम वाले करते हैं।
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आचार्य मुकेश शांडिल्य ने माता की कथा सुनाते हुए कहा कि नवरात्रि के नौवें दिन मां दुर्गा की नौवीं शक्ति माता सिद्धिदात्री की विधिविधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। माता दुर्गा का यह स्वरूप सिद्धि और मोक्ष देने वाला है। इसलिए माता को मां सिद्धिदात्री कहा जाता है। इनकी पूजा-अर्चना करने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। देवी पुराण के मुताबिक, भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही सिद्धियों को प्राप्त किया था। इन्ही देवी की कृपा से भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। यह देवी मां लक्ष्मी के समान कमल के आसन पर विराजमान हैं। नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा करने के लिए प्रसाद और नवरस युक्त भोजन और नौ प्रकार के फल फूल आदि का अर्पण कर नवरात्र का समापन किया गया। शनिवार को मूर्ति विसर्जन किया जाएगा। मंदिर प्रांगण में भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुकेश ठाकुर, जेपी बैंसला, राजीव चौधरी, ज्योति शर्मा, दिनेश शर्मा, कृष्ण सैनी, रामपाल, चंद्र प्रकाश शुक्ला, पंडित रोहित शर्मा, विशु शर्मा आदि मौजूद रहे।
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