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सलीम कुत्ता और कदीर ने बरसाई थीं मुंबई के जेजे अस्पताल में गोलियां

Wed, 12 Jul 2017 03:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/ बिजनौर Updated Wed, 12 Jul 2017 03:09 PM IST
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Salim kutta and Kadir were rushed to Mumbais JJ hospital firing
कदीर

गुजरात एटीएस के हत्थे चढ़े कदीर ने सलीम कुत्ता के साथ मिलकर अंडरवर्ल्ड डान दाऊद इब्राहीम के गैंग के लिए काम किया था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मुंबई के जेजे अस्पताल में हुए गोलीकांड में कदीर और सलीम कुत्ता दोनों शामिल थे। दोनों ने वहां जमकर गोलियां बरसाई थीं। 

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गौरतलब है कि 12 जुलाई 1992 को मुंबई के जेजे अस्पताल में दाऊद इब्राहीम के गैंग ने एक वार्ड में घुसकर जमकर गोलियां बरसाई थीं। यहां दाऊद के गिरोह ने अरुण गवली गैंग के शैलेश हलदकर को मार डाला था। गिरोह ने दाऊद के भाई इस्माइल की हत्या का बदला लेने के लिए जेजे अस्पताल पर हमला बोला था। यह पहले मौका था, जब अंडरवर्ल्ड ने एके-47 रायफल का इस्तेमाल किया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस कांड में पहले कदीर की पहचान नहीं हो पाई थी। सलीम कुत्ता की पहचान होने के बाद कदीर के होने का पता चला था। बाद में कदीर इस मामले से बच गया था। इस कांड के बाद से पुलिस सलीम कुत्ता के पीछे पड़ गई थी।

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Salim kutta and Kadir were rushed to Mumbais JJ hospital firing
कदीर

सलीम कुत्ता दाऊद इब्राहीम गैंग का मुख्य शूटर बन गया। कई बड़ी वारदात में वह शामिल रहा। दाऊद का दाहिना हाथ माने जाने वाले छोटा शकील के साथ सलीम कुत्ता वारदात करता था। मुंबई में पुलिस की सख्ती बढ़ती तो वह नजीबाबाद में आकर छिप जाता था। कई वारदात में सलीम कुत्ता के साथ कदीर भी शामिल रहा। मुंबई में उसे कम लोग पहचानते थे, इसलिए वह बचता रहा। 1994 में सुरक्षा एजेंसियों के साथ पुलिस ने सलीम कुत्ता को पकड़ने के लिए नजीबाबाद इलाके में घेराबंदी की थी। सलीम इस इलाके से भाग निकाला था। पुलिस ने कदीर की  घेराबंदी की तो वह अपना स्कूटर छोड़कर जंगल के रास्ते भाग गया था।

कल्हेडी गांव में बनी कदीर की आलीशान कोठी देखकर कई लोग अंदाजा लगाते थे कि कदीर के भी अंडरवर्ल्ड से रिश्ते हैं। मुंबई में अंडरवर्ल्ड गैंग के साथ जुड़ने के बाद भी कदीर नजीबाबाद आना नहीं भूलता था। उस जमाने में कदीर की नजीबाबाद रेलवे स्टेशन के पास एक पान के खोखे पर खूब उठ-बैठ रही थी। कदीर खोखे पर आता तो दोस्तों पर खूब पैसा लुटाता था। कदीर के दोस्त भी हैरत में रहते कि उसके पास इतना पैसा कहां से आता है। दोस्त कदीर से इस बारे में अक्सर पूछते, लेकिन उसने कभी मुंह नहीं खोला। खुलकर पैसा लूटने के चलते दोस्त कदीर के मुंबई से लौटने का इंतजार करते थे। वक्त के साथ कदीर ने अब शराफत को चोला पहन लिया था। उसके आसपास रहने वालों का कहना है कि उन्हें कदीर के इतना बड़ा अपराधी होने का अंदाजा नहीं था।

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