रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, बिजली विभाग से 500 करोड़ के भुगतान का रिकॉर्ड गायब
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यूपी के सहारनपुर में विद्युत निगम में एक और बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। जिले में एकमुश्त समाधान योजना के तहत वसूल किए गए भुगतान का समायोजन उपभोक्ताओं के खातों में नहीं किया गया। बकाया बढ़ता गया तो रिकॉर्ड खंगाला गया, लेकिन विद्युत निगम में इसका रिकॉर्ड ही नहीं मिल सका। 15 साल से अधिक का रिकॉर्ड ही निगम से गुम बताया जा रहा है। उपभोक्ताओं पर पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक का अभी भी बकाया दिखाया जा रहा है।
जिले में कई वर्ष से एकमुश्त समाधान योजना चलाकर नलकूप, घरेलू बत्ती पंखा एवं अन्य व्यवसायिक उपभोक्ताओं से बकाया वसूली की जाती रही। अधिकारियों के अनुसार 15 साल से अधिक समय से इस योजना के तहत उपभोक्ताओं से वसूली की गई, लेकिन इन वर्षों में उपभोक्ताओं के खातों में माफ किए गए सरचार्ज की धनराशि एवं उपभोक्ताओं द्वारा जमा की गई मूल धनराशि का समायोजन नहीं किया गया। यही नहीं उपभोक्ताओं द्वारा बिलों के किए नियमित एवं आंशिक भुगतान भी उनके खातों में पोस्ट नहीं किया गया। मामला सामने आया तो सभी बिजलीघरों से संबधित रिकॉर्ड खंगाला गया, लेकिन उपभोक्ताओं द्वारा जमा किए गए बिल पासबुक व उनको दी गई राजस्व रसीदों का सत्यापन करने के लिए विद्युत निगम के पास न तो राजस्व चालान मिल रहा है और न ही रसीद बुक मिल सकीं। जिस कारण इस दौरान का पांच सौ करोड़ से अधिक का बकाया किसके खाते में गया इसका किसी को पता नहीं है।
मुश्किल में वे उपभोक्ता, जिनकी रसीद हो गई गुम
विद्युत निगम ने जब इस अवधि के दौरान उपभोक्ताओं द्वारा जमा कराए गए बिल भुगतान की रसीदों की जांच करानी शुरू की तो कुछ उपभोक्ताओं ने रसीदें संभालकर रखीं थीं उन्होंने दिखा दीं, लेकिन जिन उपभोक्ताओं की पुरानी रसीदें गुम हो गईं। उनका कोई रिकॉर्ड ही नहीं रहा। ऐसे में यह भी पता नहीं चल पा रहा है कि किसने कितने पैसे जमा कराए।
खुर्द-बुर्द हो गए अधिकांश रिकॉर्ड
विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता देहात वीके शर्मा ने बताया कि जब विद्युत खंडों में रिकॉर्ड की जांच कराई गई तो अधिकांश रिकॉर्ड खुर्द-बुर्द किए हुए एवं गुम पाए गए, जबकि कुछ रिकॉर्ड सील्ड मिला। जिस कारण उपभोक्ताओं के खातों में बकाए की सही स्थिति नहीं पता चल पा रही है।
चल रही है कर्मचारियों पर कार्रवाई
विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता वीके शर्मा का कहना है कि कुछ कर्मचारियों, कार्यालय सहायकों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई चल रही है, लेकिन सत्यापन के लिए रसीदों के अभाव में कोई भी अधिकारी एवं कर्मचारी जांच के लिए तैयार नहीं है। इसी के चलते उपभोक्ताओं के न तो बिल ठीक हो पा रहे हैं और न ही खातों में समायोजन हो पा रहा है। जिस कारण बकाया बढ़ता जा रहा है।
निगम के चेयरमैन को भेजी गई रिपोर्ट
विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता देहात वीके शर्मा का कहना है कि मूल बकाया तो दोनों सर्किलों का मिलाकर अधिकतम दो सौ से तीन सौ करोड़ ही होगा, लेकिन पिछला बकाया समायोजित न हो पाने के कारण इस समय 1058 करोड़ से अधिक का बकाया हो गया है। पूरे प्रकरण की रिपोर्ट विद्युत निगम के चेयरमैन को भी भेजी जा चुकी है। प्रयास किया जा रहा है कि जिन उपभोक्ताओं के पास पुरानी रसीदें हैं उनका भुगतान उनके खातों में समायोजित करा दिया जाए।
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