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रूट डायवर्जन प्लान... पहले दिन ही धड़ाम
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रूट डायवर्जन प्लान... पहले दिन ही धड़ाम
मेरठ। कांवड़ यात्रा को लेकर लागू किया गया रूट डायवर्जन प्लान बृहस्पतिवार को पहले दिन ही धड़ाम हो गया। एनएच-58 से भारी वाहनों का डायवर्जन किया गया था, लेकिन हाईवे पर बेरोकटोक भारी वाहन दौड़ते नजर आए। पुलिस ने 40 स्थानों पर 24 घंटे के लिए ड्यूटी तो लगाई, लेकिन पुलिसकर्मी यातायात व्यवस्था को बना नहीं सके। वहीं शहर में भी लोग जाम से जूझते रहे। हाईवे पर वाहनों के दौड़ने का एक कारण उत्तराखंड और पड़ोसी जिलों से समन्वय का न होना भी माना जा रहा है।
शहर में दिनभर ट्रैफिक व्यवस्था का बुरा हाल रहा। बेरिकेडिंग के कारण लोग दिनभर जाम से जूझते रहे। कई जगह तो बेरिकेडिंग की बल्लियां खुलकर आड़ी-तिरछी होकर बीच सड़क पर आ गईं, जिससे हादसे की आशंका बढ़ गई है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सिर्फ एनएच-58 और और कांवड़ पटरी मार्ग पर निरीक्षण करते रहे, लेकिन शहर जाम की चपेट में रहा। अफसरों ने कागजों पर तो प्लान लागू कर दिया, लेकिन वास्तविकता इससे अलग रही। उनका दबी जुबान में कहना है कि अभी कांवड़ियों की संख्या कम है। इसलिए धीरे-धीरे रूट डायवर्जन प्लान को लागू किया जा रहा है। वहीं उनको यह भी डर है कि यदि किसी कांवड़िये के साथ कोई दुर्घटना हो जाती है, तो जिम्मेदार कौन होगा। उधर, पुलिस अधिकारी 23 जुलाई से एनएच-58 पर वनवे व्यवस्था और 26 जुलाई से हाईवे को बंद करने का दावा कर रहे हैं।
- रूट डायवर्जन प्लान तैयार है। सभी स्थानों पर ड्यूटी लगाई गई है। उत्तराखंड और मुजफ्फरनगर की तरफ से हाईवे पर भारी वाहन अभी नहीं रोके गए हैं। कांवड़ियों की संख्या देखकर जल्द ही प्लान को पूरी तरह लागू कराया जाएगा।
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- संजीव वाजपेयी, एसपी ट्रैफिक
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मेरठ। कांवड़ यात्रा को लेकर लागू किया गया रूट डायवर्जन प्लान बृहस्पतिवार को पहले दिन ही धड़ाम हो गया। एनएच-58 से भारी वाहनों का डायवर्जन किया गया था, लेकिन हाईवे पर बेरोकटोक भारी वाहन दौड़ते नजर आए। पुलिस ने 40 स्थानों पर 24 घंटे के लिए ड्यूटी तो लगाई, लेकिन पुलिसकर्मी यातायात व्यवस्था को बना नहीं सके। वहीं शहर में भी लोग जाम से जूझते रहे। हाईवे पर वाहनों के दौड़ने का एक कारण उत्तराखंड और पड़ोसी जिलों से समन्वय का न होना भी माना जा रहा है।
शहर में दिनभर ट्रैफिक व्यवस्था का बुरा हाल रहा। बेरिकेडिंग के कारण लोग दिनभर जाम से जूझते रहे। कई जगह तो बेरिकेडिंग की बल्लियां खुलकर आड़ी-तिरछी होकर बीच सड़क पर आ गईं, जिससे हादसे की आशंका बढ़ गई है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सिर्फ एनएच-58 और और कांवड़ पटरी मार्ग पर निरीक्षण करते रहे, लेकिन शहर जाम की चपेट में रहा। अफसरों ने कागजों पर तो प्लान लागू कर दिया, लेकिन वास्तविकता इससे अलग रही। उनका दबी जुबान में कहना है कि अभी कांवड़ियों की संख्या कम है। इसलिए धीरे-धीरे रूट डायवर्जन प्लान को लागू किया जा रहा है। वहीं उनको यह भी डर है कि यदि किसी कांवड़िये के साथ कोई दुर्घटना हो जाती है, तो जिम्मेदार कौन होगा। उधर, पुलिस अधिकारी 23 जुलाई से एनएच-58 पर वनवे व्यवस्था और 26 जुलाई से हाईवे को बंद करने का दावा कर रहे हैं।
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- रूट डायवर्जन प्लान तैयार है। सभी स्थानों पर ड्यूटी लगाई गई है। उत्तराखंड और मुजफ्फरनगर की तरफ से हाईवे पर भारी वाहन अभी नहीं रोके गए हैं। कांवड़ियों की संख्या देखकर जल्द ही प्लान को पूरी तरह लागू कराया जाएगा।
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- संजीव वाजपेयी, एसपी ट्रैफिक