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मेरठ साउथ नमो भारत स्टेशन पर लगा रूफटॉप सोलर पॉवर प्लांट
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मेरठ साउथ स्टेशन पर रूफ टॉप सोलर सिस्टम लगाया गया।फोटो : सौजन्य से एनसीआरटीसी
मेरठ। एनसीआरटीसी ने सोमवार को मेरठ साउथ नमो भारत स्टेशन पर सोलर रूफटॉप प्लांट स्थापित किया। इससे बिजली की खपत कम होगी और ग्रीन ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। इस संयंत्र की इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 717 किलोवाट पीक है। दरअसल, किलोवाट पीक किसी सिस्टम की अधिकतम शक्ति क्षमता का एक माप है। यह बिजली उत्पादन, ऊर्जा भंडारण या उपकरण के संदर्भ में उपयोग होता है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सिस्टम की अधिकतम कार्य क्षमता को दर्शाता है।
मेरठ साउथ स्टेशन की छत पर 1304 सोलर पैनल स्थापित किए गए हैं। प्रत्येक पैनल की कैपेसिटी 550 वाट पीक है। यह ऊर्जा संयंत्र अनुमानित तौर पर प्रतिवर्ष लगभग 8,15,000 यूनिट सौर ऊर्जा उत्पन्न करेगा। मेरठ साउथ स्टेशन के सोलर प्लांट से अनुमानित तौर पर सालाना 750 टन कार्बन उत्सर्जन कम होने की उम्मीद है।
सौर ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को अपनाते हुए स्टेशनों, डिपो और रिसीविंग सब-स्टेशनों की छतों पर सौर पैनल स्थापित किए गए हैं। दिल्ली-मेरठ के बीच 82 किमी लंबे संपूर्ण नमो भारत कॉरिडोर पर इससे 11 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन करने का लक्ष्य है। इससे सालाना 11,500 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने की उम्मीद है।
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एनसीआरटीसी के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पुनीत वत्स ने बताया कि सभी विद्युत सब स्टेशनों, नमो भारत स्टेशनों एवं डिपो में रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, हरित क्षेत्र, एलईडी बल्ब, प्राकृतिक रोशनी का प्रयोग भी सुनिश्चित कर रहा है। साहिबाबाद, गाज़ियाबाद, गुलधर, दुहाई और मेरठ साउथ ये सभी स्टेशन कार्बन न्यूट्रल हैं और इन स्टेशनों पर बिजली आपूर्ति इन पर लगे सोलर प्लांट से ही हो रही है।
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मेरठ साउथ स्टेशन की छत पर 1304 सोलर पैनल स्थापित किए गए हैं। प्रत्येक पैनल की कैपेसिटी 550 वाट पीक है। यह ऊर्जा संयंत्र अनुमानित तौर पर प्रतिवर्ष लगभग 8,15,000 यूनिट सौर ऊर्जा उत्पन्न करेगा। मेरठ साउथ स्टेशन के सोलर प्लांट से अनुमानित तौर पर सालाना 750 टन कार्बन उत्सर्जन कम होने की उम्मीद है।
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सौर ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को अपनाते हुए स्टेशनों, डिपो और रिसीविंग सब-स्टेशनों की छतों पर सौर पैनल स्थापित किए गए हैं। दिल्ली-मेरठ के बीच 82 किमी लंबे संपूर्ण नमो भारत कॉरिडोर पर इससे 11 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन करने का लक्ष्य है। इससे सालाना 11,500 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने की उम्मीद है।
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एनसीआरटीसी के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पुनीत वत्स ने बताया कि सभी विद्युत सब स्टेशनों, नमो भारत स्टेशनों एवं डिपो में रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, हरित क्षेत्र, एलईडी बल्ब, प्राकृतिक रोशनी का प्रयोग भी सुनिश्चित कर रहा है। साहिबाबाद, गाज़ियाबाद, गुलधर, दुहाई और मेरठ साउथ ये सभी स्टेशन कार्बन न्यूट्रल हैं और इन स्टेशनों पर बिजली आपूर्ति इन पर लगे सोलर प्लांट से ही हो रही है।