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कार के परखच्चे उड़े, 3 की मौत
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Wed, 22 Jun 2016 01:25 AM IST
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हादसे के बाद मौके पर खड़ी क्षतिग्रस्त कार।
- फोटो : अमर उजाला
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हापुड़ रोड पर मंगलवार सुबह एक कार की किसी वाहन से भिड़ंत हो गई। इससे कार सवार तीन लोगों की मौत हो गई जबकि एक गंभीर रूप से घायल है। हादसे के बाद कार में फंसे लोगों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। जानी कलां गांव निवासी साजिद अली उर्फ राशिद अली (32) पुत्र अमजद अली, आबिद अली (35) पुत्र अल्ताफ अली, इरफान (48) पुत्र जमीरूद्दीन और यूसुफ उर्फ इसूब पुत्र मुशर्रफ अली टॉवर और दूध प्लांटों की चिमनी आदि बनाने का काम करते थे।
इसी सिलसिले में मंगलवार तड़के वे ऑल्टो कार से अलीगढ़ जा रहे थे। सुबह करीब छह बजे हापुड़ रोड पर खरखौदा क्षेत्र में कैली गांव के पास उनकी कार की एक वाहन से भिड़ंत हो गई। हादसा इतना जबरदस्त था कि कार के परखच्चे उड़ गए। कार में सवार लोगों की चीख पुकार मची तो कैली गांव के लोग मौके पर पहुंचे और कंट्रोल रूम को घटना की सूचना दी। ग्रामीणों ने घायलों को कार से निकालने की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे। सूचना पर खरखौदा एसओ विध्यांचल तिवारी मौके पहुंचे और और लोगों की मदद से कार को काटकर चारों को बाहर निकाला।
कार चालक साजिद अली की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि आबिद और इरफान ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। खरखौदा सीएचसी से घायल यूसुफ को मेडिकल कॉलेज के लिए भेज दिया। बाद में परिजनों ने घायल को केएमसी में भर्ती कराया है। मृतक साजिद की जेब से मिले मोबाइल और कागजात के आधार पर परिजनों को हादसे की जानकारी दी गई। पुलिस ने शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एसओ खरखौदा विंध्याचल तिवारी का कहना है कि किस वाहन से कार भिड़ी है इसका पता नहीं लग सका है। मृतक इरफान के भतीजे शादाब पुत्र बुंदू ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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सीएचसी पर ही छोड़ दिए शव
पुलिस ने 108 नंबर को कॉल कर एंबुलेंस को मौके पर बुलाया। एंबुलेंस घायलों को लेकर सीएचसी पहुंची, लेकिन रास्ते में ही दो की मौत हो गई थी। थाना पुलिस ने एंबुलेंस चालक से शवों को मोर्चरी छोड़ने की बात कही तो एंबुलेंस पर मौजूद कर्मचारी ने शव ले जाने से इनकार कर दिया। कहा, एंबुलेंस से शव को नहीं ले जाया जाता। इसके बाद शवों को वहीं छोड़कर एंबुलेंस लेकर कर्मचारी चले गए। बाद में पुलिस ने शवों को मोर्चरी भिजवाया। वहीं एसओ विंध्याचल तिवारी ने बताया कि नियम है कि यदि किसी घायल को एंबुलेंस से भेजा जाता है और उसकी रास्ते ही मौत हो जाती है तो एंबुलेंस को मोर्चरी तक जाना चाहिए।
गांव में नहीं जले चूल्हे
इरफान, आबिद और साजिद के शव जैसे ही पोस्टमार्टम के बाद जानीकलां गांव में पहुंचे को कोहराम मच गया। महिलाएं शवों से लिपटकर रोने लगीं। गांव में भी मृतकों के घरों पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। महिलाओं और बच्चों का रो रोकर बुरा हाल था। गांव में चूल्हे भी नहीं जले। तीनों मृतक एक ही परिवार के थे।
तीनों पर थी परिवार की जिम्मेदारी
साजिद अली पत्नी और एक बेटी तथा दो बेटों के साथ रहता था। साजिद का एक बेटा विकलांग है। वहीं आबिद अली पत्नी आसमां, दो बेटी और दो बेटों के साथ रहता था। इरफान पत्नी नोमान, दो बेटों और पांच बेटियों के साथ रहता था। उसकी दो बेटियों की शादी हो चुकी है। इरफान का भी एक बेटा विकलांग है। तीनों के कंधों पर परिवार की भरण-पोषण की जिम्मेदारी थी।
मुआवजे की मांग
प्रदेेश सरकार में मनोनीत प्रशासनिक सलाहकार शकील भारती ने एसडीएम से मिलकर पीड़ितों के लिए मुआवजे की मांग की है। एसडीएम ने शासन स्तर से मुआवजा देने का आश्वासन दिया। शकील भारती के अनुसार वह इस संबंध में मुख्यमंत्री से मिलकर मुआवजा दिलवाने का प्रयास करेंगे।
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इसी सिलसिले में मंगलवार तड़के वे ऑल्टो कार से अलीगढ़ जा रहे थे। सुबह करीब छह बजे हापुड़ रोड पर खरखौदा क्षेत्र में कैली गांव के पास उनकी कार की एक वाहन से भिड़ंत हो गई। हादसा इतना जबरदस्त था कि कार के परखच्चे उड़ गए। कार में सवार लोगों की चीख पुकार मची तो कैली गांव के लोग मौके पर पहुंचे और कंट्रोल रूम को घटना की सूचना दी। ग्रामीणों ने घायलों को कार से निकालने की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे। सूचना पर खरखौदा एसओ विध्यांचल तिवारी मौके पहुंचे और और लोगों की मदद से कार को काटकर चारों को बाहर निकाला।
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कार चालक साजिद अली की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि आबिद और इरफान ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। खरखौदा सीएचसी से घायल यूसुफ को मेडिकल कॉलेज के लिए भेज दिया। बाद में परिजनों ने घायल को केएमसी में भर्ती कराया है। मृतक साजिद की जेब से मिले मोबाइल और कागजात के आधार पर परिजनों को हादसे की जानकारी दी गई। पुलिस ने शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एसओ खरखौदा विंध्याचल तिवारी का कहना है कि किस वाहन से कार भिड़ी है इसका पता नहीं लग सका है। मृतक इरफान के भतीजे शादाब पुत्र बुंदू ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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सीएचसी पर ही छोड़ दिए शव
पुलिस ने 108 नंबर को कॉल कर एंबुलेंस को मौके पर बुलाया। एंबुलेंस घायलों को लेकर सीएचसी पहुंची, लेकिन रास्ते में ही दो की मौत हो गई थी। थाना पुलिस ने एंबुलेंस चालक से शवों को मोर्चरी छोड़ने की बात कही तो एंबुलेंस पर मौजूद कर्मचारी ने शव ले जाने से इनकार कर दिया। कहा, एंबुलेंस से शव को नहीं ले जाया जाता। इसके बाद शवों को वहीं छोड़कर एंबुलेंस लेकर कर्मचारी चले गए। बाद में पुलिस ने शवों को मोर्चरी भिजवाया। वहीं एसओ विंध्याचल तिवारी ने बताया कि नियम है कि यदि किसी घायल को एंबुलेंस से भेजा जाता है और उसकी रास्ते ही मौत हो जाती है तो एंबुलेंस को मोर्चरी तक जाना चाहिए।
गांव में नहीं जले चूल्हे
इरफान, आबिद और साजिद के शव जैसे ही पोस्टमार्टम के बाद जानीकलां गांव में पहुंचे को कोहराम मच गया। महिलाएं शवों से लिपटकर रोने लगीं। गांव में भी मृतकों के घरों पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। महिलाओं और बच्चों का रो रोकर बुरा हाल था। गांव में चूल्हे भी नहीं जले। तीनों मृतक एक ही परिवार के थे।
तीनों पर थी परिवार की जिम्मेदारी
साजिद अली पत्नी और एक बेटी तथा दो बेटों के साथ रहता था। साजिद का एक बेटा विकलांग है। वहीं आबिद अली पत्नी आसमां, दो बेटी और दो बेटों के साथ रहता था। इरफान पत्नी नोमान, दो बेटों और पांच बेटियों के साथ रहता था। उसकी दो बेटियों की शादी हो चुकी है। इरफान का भी एक बेटा विकलांग है। तीनों के कंधों पर परिवार की भरण-पोषण की जिम्मेदारी थी।
मुआवजे की मांग
प्रदेेश सरकार में मनोनीत प्रशासनिक सलाहकार शकील भारती ने एसडीएम से मिलकर पीड़ितों के लिए मुआवजे की मांग की है। एसडीएम ने शासन स्तर से मुआवजा देने का आश्वासन दिया। शकील भारती के अनुसार वह इस संबंध में मुख्यमंत्री से मिलकर मुआवजा दिलवाने का प्रयास करेंगे।