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दो साल से जीपीएफ भुगतान के लिए भटक रहे सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक
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सरधना। राजस्व विभाग में तैनात रहे सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक जगभूषण जैन दो वर्षों से सामान्य भविष्य निधि का शेष 10 प्रतिशत भुगतान प्राप्त करने के लिए लगातार विभागीय कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। बार-बार के पत्राचार और निर्देशों के बावजूद भुगतान नहीं हो पाने से वह मानसिक, आर्थिक और शारीरिक तनाव में हैं। मामले को लेकर पीड़ित ने जिलाधिकारी से कार्रवाई की गुहार लगाई है।
जगभूषण जैन ने बताया कि वह 31 जुलाई 2013 को सेवा निवृत्त हुए थे। उनके जीपीएफ खाते में जमा राशि का 90 प्रतिशत भुगतान पहले ही किया जा चुका है। शेष 10 प्रतिशत भुगतान के लिए महालेखाकार इलाहाबाद द्वारा मेरठ कार्यालय से दोनों खातों की पासबुक उपलब्ध कराने को कहा गया था।
पीड़ित का कहना है कि उन्होंने स्वयं मेरठ भूलेख कार्यालय पहुंचकर पासबुक की प्रविष्टियां पूरी करवाईं और फरवरी 2025 में संबंधित अधिकारी को पासबुक भी सौंप दी थी। बावजूद इसके उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि उनके सेवा काल से संबंधित लेजर और बिल बुक उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण पासबुक पूर्ण नहीं की जा सकती। इसके बाद उन्होंने सूचना का अधिकार के तहत सूचना मांगी, लेकिन विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। जगभूषण जैन ने आरोप लगाया कि विभागीय उदासीनता और लापरवाही के कारण उन्हें अब तक अंतिम भुगतान नहीं मिल सका है, जिससे वे लगातार आर्थिक संकट झेल रहे हैं। उन्होंने उच्चाधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर शीघ्र समाधान की मांग की है।
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जगभूषण जैन ने बताया कि वह 31 जुलाई 2013 को सेवा निवृत्त हुए थे। उनके जीपीएफ खाते में जमा राशि का 90 प्रतिशत भुगतान पहले ही किया जा चुका है। शेष 10 प्रतिशत भुगतान के लिए महालेखाकार इलाहाबाद द्वारा मेरठ कार्यालय से दोनों खातों की पासबुक उपलब्ध कराने को कहा गया था।
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पीड़ित का कहना है कि उन्होंने स्वयं मेरठ भूलेख कार्यालय पहुंचकर पासबुक की प्रविष्टियां पूरी करवाईं और फरवरी 2025 में संबंधित अधिकारी को पासबुक भी सौंप दी थी। बावजूद इसके उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि उनके सेवा काल से संबंधित लेजर और बिल बुक उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण पासबुक पूर्ण नहीं की जा सकती। इसके बाद उन्होंने सूचना का अधिकार के तहत सूचना मांगी, लेकिन विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। जगभूषण जैन ने आरोप लगाया कि विभागीय उदासीनता और लापरवाही के कारण उन्हें अब तक अंतिम भुगतान नहीं मिल सका है, जिससे वे लगातार आर्थिक संकट झेल रहे हैं। उन्होंने उच्चाधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर शीघ्र समाधान की मांग की है।
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