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शिक्षक से कर्नल तक ने दी परीक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 May 2016 02:52 AM IST
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मेरठ के इस्माईल कॉलेज से परीक्षा देकर निकलतीं छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला
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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने सोमवार को पीएचडी के लिए एंट्रेंस सीईटी (कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट) कराया। मेरठ, बुलंदशहर, गाजियाबाद, बागपत और सहारनपुर में छात्रों ने परीक्षा दी। पीएचडी करने के लिए शिक्षक से लेकर कर्मचारी और कर्नल तक लाइन में लगे नजर आए। दो पालियों में परीक्षा हुई। करीब 15 फीसदी ने परीक्षा छोड़ दी। इसी महीने विवि रिजल्ट जारी कर देगा। मेरठ और सहारनपुर मंडल में 11 परीक्षा केंद्रों पर 32 विषयों में 9997 परीक्षार्थी थे।
पहला पेपर कॉमन था जो सुबह नौ से 11 बजे तक हुआ। दूसरा विषय का पेपर दोपहर दो से शाम तीन बजे तक चला। मेरठ में पांच सेंटरों पर परीक्षा हुई। पहली पाली में सेंटरों का कुलपति प्रो. एनके तनेजा और प्रति कुलपति प्रो. एचएस सिंह ने निरीक्षण किया। दूसरी पाली में छात्रों को इंतजार भारी पड़ा। 100 आब्जेक्टिव सवालों के लिए तीन घंटे निर्धारित किए गए थे। करीब एक घंटा ज्यादातर अभ्यर्थियों ने इंतजार किया।
पहला पेपर में भी 100 सवाल थे, लेकिन वक्त दो घंटे था। एंट्रेंस देने वालों में उम्र का बंधन आड़े नहीं आया। शिक्षक से लेकर कर्मचारी और कर्नल तक कैंडीडेट थे। 40 साल को पार करने वाले भी कैंडीडेट थे। कई सेंटरों पर तो लड़कियों की संख्या ज्यादा थी।
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सेटिंग फेल करने में कामयाब नहीं हुआ सिस्टम
सूत्रों के मुताबिक पेपर को लेकर कई केंद्रों पर पहले से सेटिंग हो रखी थी। इसमें कुछ छात्र नेता और पूर्व छात्र शामिल रहे। कई पीएचडी कर चुके छात्र भी एंट्रेंस में बैठे। वह दूसरे कैंडीडेट के लिए परीक्षा में शामिल हुए। विवि को इसकी सूचना मिल चुकी थी। इसलिए केंद्र अध्यक्षों को कड़े निर्देश थे कि स्थायी शिक्षकों की ही ड्यूटी लगाई जाएगी। लेकिन सेटिंग करने वाले अपनी हरकतों से बाज नहीं आए। सूत्रों के मुताबिक पहली और दूसरी पाली में गड़बड़ी की गई।
मेरठ कॉलेज सेंटर की शिकायत पर वीसी और प्रोवीसी वहां खुद निरीक्षण करने पहुंचे थे। कुछ विषयों के सॉल्वर बुलाने की भी जानकारी सामने आई है। पेपर सेटिंग से बाहर पहुंचा और सॉल्वर से जवाब अंदर आए। दो-तीन विषय की शिकायत विवि के पास पहुंची है। विवि इसकी जांच कराएगा।
दूसरी पाली में नहीं हुआ निरीक्षण
पहली पाली में तो विवि की टीम अलर्ट थी। सेंटरों का निरीक्षण हुआ, लेकिन दूसरी पाली में निरीक्षण नहीं हुआ। इसका फायदा सेटिंग करने वालों ने उठाया। हालांकि विवि ने ऑब्जर्वर्स को आगाह किया था। एक ऑब्जर्वर का कहना है नकल की कोशिश की गई, इसमें कॉलेज के लोग शामिल थे। वह इसकी रिपोर्ट विवि को देंगे। सेंटर तय करने में लापरवाही रही।
इसी महीने आएगा रिजल्ट
एक सप्ताह के अंदर विवि आंसर की जारी करेगा। सूत्रों के मुताबिक आंसर की जारी कर ऑब्जेक्शन मांगा जाएगा। महीने के आखिर तक रिजल्ट देने की तैयारी है।
पीएचडी में रिसर्च करने के लिए लोग रिवर्स गियर लगा रहे हैं। पढ़ाई छोड़ चुके और नौकरी करने वाले लाइन में हैं। पीएचडी के नियम बदलने से तस्वीर बदल-बदली नजर आ रही है। चार साल बाद एंट्रेंस हुआ। अहम बात यह है कि जितने एंट्रेंस में गैरहाजिर रहे, इससे ज्यादा नौकरी के एग्जाम में गैरहाजिर रहते हैं।
पीएचडी एंट्रेंस में करीब 15 फीसदी ने ही परीक्षा छोड़ी है। किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में इससे ज्यादा गैरहाजिर रहते हैं। एंट्रेंस देने वालों में जोश और उत्साह था। ग्रेजुएशन फाइनल ईयर से लेकर 40 साल को पार कर चुके परीक्षार्थी थे।
शादीशुदा पुरुष और महिला परीक्षार्थियों की खासी संख्या बीएड परीक्षा में नजर आती है। पीएचडी एंट्रेंस में कहीं ज्यादा थी। महिलाओं की संख्या खासी रही। कई विषयों में तो वह पुरुषों से अधिक हैं।
जब से पीएचडी में यूजीसी रेग्युलेशन 2009 लागू हुआ है, पीएचडी करना कठिन हो गया है। बिना एंट्रेंस पास किए एडमिशन नहीं हो सकता। जेआरएफ और नेट को छूट है। छह महीने का कोर्स वर्क है। उसे पास करने के बाद आरडीसी होती है। एक से डेढ़ साल की अवधि सुपरवाइज एलॉट होने में लग जाती है। आखिरी पीएचडी एंट्रेंस 2012 में हुआ था।
नेट पास करने वालों ने भी दिया एग्जाम
विवि ने नेट पास करने वालों को एंट्रेंस से छूट दे रखी है, लेकिन कुछ विषयों में नेट पास करने वाले भी बैठे। वह फर्जीवाड़े की वजह से शामिल हुए। दूसरे छात्रों को पेपर कराने की मकसद से वह बैठे और अपने मंसूबे में कामयाब भी रहे।
मेरठ कॉलेज में डिफेंस स्टडी विषय की शिकायत मिली। इसमें कई नेट पास परीक्षार्थी शामिल हुए हैं। उनका इनपुट विवि को मिल चुका है। विवि कार्रवाई कर सकता है। मेरठ कॉलेज की शिकायत मिलने पर विवि ने तीन ऑब्जर्वर तैनात किए थे। इनमें प्रो. राकेश कुमार, प्रो. विकास शर्मा, डॉ. योगेश कुमार शामिल हैं।
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पहला पेपर कॉमन था जो सुबह नौ से 11 बजे तक हुआ। दूसरा विषय का पेपर दोपहर दो से शाम तीन बजे तक चला। मेरठ में पांच सेंटरों पर परीक्षा हुई। पहली पाली में सेंटरों का कुलपति प्रो. एनके तनेजा और प्रति कुलपति प्रो. एचएस सिंह ने निरीक्षण किया। दूसरी पाली में छात्रों को इंतजार भारी पड़ा। 100 आब्जेक्टिव सवालों के लिए तीन घंटे निर्धारित किए गए थे। करीब एक घंटा ज्यादातर अभ्यर्थियों ने इंतजार किया।
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पहला पेपर में भी 100 सवाल थे, लेकिन वक्त दो घंटे था। एंट्रेंस देने वालों में उम्र का बंधन आड़े नहीं आया। शिक्षक से लेकर कर्मचारी और कर्नल तक कैंडीडेट थे। 40 साल को पार करने वाले भी कैंडीडेट थे। कई सेंटरों पर तो लड़कियों की संख्या ज्यादा थी।
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सेटिंग फेल करने में कामयाब नहीं हुआ सिस्टम
सूत्रों के मुताबिक पेपर को लेकर कई केंद्रों पर पहले से सेटिंग हो रखी थी। इसमें कुछ छात्र नेता और पूर्व छात्र शामिल रहे। कई पीएचडी कर चुके छात्र भी एंट्रेंस में बैठे। वह दूसरे कैंडीडेट के लिए परीक्षा में शामिल हुए। विवि को इसकी सूचना मिल चुकी थी। इसलिए केंद्र अध्यक्षों को कड़े निर्देश थे कि स्थायी शिक्षकों की ही ड्यूटी लगाई जाएगी। लेकिन सेटिंग करने वाले अपनी हरकतों से बाज नहीं आए। सूत्रों के मुताबिक पहली और दूसरी पाली में गड़बड़ी की गई।
मेरठ कॉलेज सेंटर की शिकायत पर वीसी और प्रोवीसी वहां खुद निरीक्षण करने पहुंचे थे। कुछ विषयों के सॉल्वर बुलाने की भी जानकारी सामने आई है। पेपर सेटिंग से बाहर पहुंचा और सॉल्वर से जवाब अंदर आए। दो-तीन विषय की शिकायत विवि के पास पहुंची है। विवि इसकी जांच कराएगा।
दूसरी पाली में नहीं हुआ निरीक्षण
पहली पाली में तो विवि की टीम अलर्ट थी। सेंटरों का निरीक्षण हुआ, लेकिन दूसरी पाली में निरीक्षण नहीं हुआ। इसका फायदा सेटिंग करने वालों ने उठाया। हालांकि विवि ने ऑब्जर्वर्स को आगाह किया था। एक ऑब्जर्वर का कहना है नकल की कोशिश की गई, इसमें कॉलेज के लोग शामिल थे। वह इसकी रिपोर्ट विवि को देंगे। सेंटर तय करने में लापरवाही रही।
इसी महीने आएगा रिजल्ट
एक सप्ताह के अंदर विवि आंसर की जारी करेगा। सूत्रों के मुताबिक आंसर की जारी कर ऑब्जेक्शन मांगा जाएगा। महीने के आखिर तक रिजल्ट देने की तैयारी है।
पीएचडी में रिसर्च करने के लिए लोग रिवर्स गियर लगा रहे हैं। पढ़ाई छोड़ चुके और नौकरी करने वाले लाइन में हैं। पीएचडी के नियम बदलने से तस्वीर बदल-बदली नजर आ रही है। चार साल बाद एंट्रेंस हुआ। अहम बात यह है कि जितने एंट्रेंस में गैरहाजिर रहे, इससे ज्यादा नौकरी के एग्जाम में गैरहाजिर रहते हैं।
पीएचडी एंट्रेंस में करीब 15 फीसदी ने ही परीक्षा छोड़ी है। किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में इससे ज्यादा गैरहाजिर रहते हैं। एंट्रेंस देने वालों में जोश और उत्साह था। ग्रेजुएशन फाइनल ईयर से लेकर 40 साल को पार कर चुके परीक्षार्थी थे।
शादीशुदा पुरुष और महिला परीक्षार्थियों की खासी संख्या बीएड परीक्षा में नजर आती है। पीएचडी एंट्रेंस में कहीं ज्यादा थी। महिलाओं की संख्या खासी रही। कई विषयों में तो वह पुरुषों से अधिक हैं।
जब से पीएचडी में यूजीसी रेग्युलेशन 2009 लागू हुआ है, पीएचडी करना कठिन हो गया है। बिना एंट्रेंस पास किए एडमिशन नहीं हो सकता। जेआरएफ और नेट को छूट है। छह महीने का कोर्स वर्क है। उसे पास करने के बाद आरडीसी होती है। एक से डेढ़ साल की अवधि सुपरवाइज एलॉट होने में लग जाती है। आखिरी पीएचडी एंट्रेंस 2012 में हुआ था।
नेट पास करने वालों ने भी दिया एग्जाम
विवि ने नेट पास करने वालों को एंट्रेंस से छूट दे रखी है, लेकिन कुछ विषयों में नेट पास करने वाले भी बैठे। वह फर्जीवाड़े की वजह से शामिल हुए। दूसरे छात्रों को पेपर कराने की मकसद से वह बैठे और अपने मंसूबे में कामयाब भी रहे।
मेरठ कॉलेज में डिफेंस स्टडी विषय की शिकायत मिली। इसमें कई नेट पास परीक्षार्थी शामिल हुए हैं। उनका इनपुट विवि को मिल चुका है। विवि कार्रवाई कर सकता है। मेरठ कॉलेज की शिकायत मिलने पर विवि ने तीन ऑब्जर्वर तैनात किए थे। इनमें प्रो. राकेश कुमार, प्रो. विकास शर्मा, डॉ. योगेश कुमार शामिल हैं।