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शोध: 16 प्रतिशत लोग नहीं जानते अंगदान के बारे में
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शोध: 16 प्रतिशत लोग नहीं जानते अंगदान के बारे में
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्र उमेश शर्मा ने नेत्र एवं अंगदान विषय पर शोध किया। उन्हें शोध के दौरान पता चला कि करीब 16 प्रतिशत लोगों को अंगदान के बारे में जानकारी ही नहीं है, 48.21 प्रतिशत लोग इसे गैर कानूनी मानते हैं। इसके लिए छात्र को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) नई दिल्ली में स्कॉलरशिप और प्रशस्तिपत्र से सम्मानित किया गया।
शोधकर्ता उमेश शर्मा ने बताया कि शोध का विषय था नेत्र एवं अंगदान शहरी और ग्रामीण परिप्रेक्ष्य। इसमें मेरठ के शहरी एवं ग्रामीण इलाकों के 212 प्रतिभागियों को चुना गया। उनसे नेत्र एवं अंगदान से संबंधित प्रश्न पूछे गए। साथ ही उनका इस विषय पर दृष्टिकोण जाना। शोध में सामने आया की शहरी क्षेत्र में 4.7 प्रतिशत एवं ग्रामीण क्षेत्र के 11.32 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कभी भी नेत्र और अंगदान के बारे में सुना ही नहीं था। 48.21 प्रतिशत प्रतिभागी किसी भी तरह के नेत्र और अंगदान को गैर कानूनी मानते हैं, जिससे सरकार द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान की विफलता एवं ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एंड टिश्यूज एक्ट की अनभिज्ञता पता चलती है। 18.16 प्रतिशत प्रतिभागियों ने धार्मिक कारणों से नेत्र एवं अंगदान न करने की बात कही। शोध में सामने आया की 36.7 प्रतिशत ग्रामीण और 46.23 प्रतिशत शहरी नेत्र और अंगदान के इच्छुक हैं, लेकिन सिर्फ 1.89 प्रतिशत ग्रामीण प्रतिभागियों ने नेत्र और अंगदान का संकल्प लिया हुआ है, जबकि यह आंकड़ा शहरी प्रतिभागियों में शून्य रहा। जिस से पता चलता है कि इच्छुक व्यक्ति को ये नहीं पता कि वह कैसे नेत्र एवं अंगदान का संकल्प ले सकता है। 37 प्रतिशत प्रतिभागियों में यह भ्रम पाया गया कि यदि नेत्र या अंगदान संकल्पकर्ता या उसका परिवार नेत्र या अंगदान को राजी हो गए तो डॉक्टर फिर जरूरत पर रोगी की जान बचाने की कोशिश नहीं करेंगे। सामुदायिक चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष एवं आचार्य डा. एस के गर्ग ने बताया कि ऐसा पहली बार है कि विभाग द्वारा किसी स्नातक चिकित्सा छात्र के शोध को आईसीएमआर नई दिल्ली परियोजना में चयनित होने का सम्मान प्राप्त हुआ हो।
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मेरठ। मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्र उमेश शर्मा ने नेत्र एवं अंगदान विषय पर शोध किया। उन्हें शोध के दौरान पता चला कि करीब 16 प्रतिशत लोगों को अंगदान के बारे में जानकारी ही नहीं है, 48.21 प्रतिशत लोग इसे गैर कानूनी मानते हैं। इसके लिए छात्र को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) नई दिल्ली में स्कॉलरशिप और प्रशस्तिपत्र से सम्मानित किया गया।
शोधकर्ता उमेश शर्मा ने बताया कि शोध का विषय था नेत्र एवं अंगदान शहरी और ग्रामीण परिप्रेक्ष्य। इसमें मेरठ के शहरी एवं ग्रामीण इलाकों के 212 प्रतिभागियों को चुना गया। उनसे नेत्र एवं अंगदान से संबंधित प्रश्न पूछे गए। साथ ही उनका इस विषय पर दृष्टिकोण जाना। शोध में सामने आया की शहरी क्षेत्र में 4.7 प्रतिशत एवं ग्रामीण क्षेत्र के 11.32 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कभी भी नेत्र और अंगदान के बारे में सुना ही नहीं था। 48.21 प्रतिशत प्रतिभागी किसी भी तरह के नेत्र और अंगदान को गैर कानूनी मानते हैं, जिससे सरकार द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान की विफलता एवं ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एंड टिश्यूज एक्ट की अनभिज्ञता पता चलती है। 18.16 प्रतिशत प्रतिभागियों ने धार्मिक कारणों से नेत्र एवं अंगदान न करने की बात कही। शोध में सामने आया की 36.7 प्रतिशत ग्रामीण और 46.23 प्रतिशत शहरी नेत्र और अंगदान के इच्छुक हैं, लेकिन सिर्फ 1.89 प्रतिशत ग्रामीण प्रतिभागियों ने नेत्र और अंगदान का संकल्प लिया हुआ है, जबकि यह आंकड़ा शहरी प्रतिभागियों में शून्य रहा। जिस से पता चलता है कि इच्छुक व्यक्ति को ये नहीं पता कि वह कैसे नेत्र एवं अंगदान का संकल्प ले सकता है। 37 प्रतिशत प्रतिभागियों में यह भ्रम पाया गया कि यदि नेत्र या अंगदान संकल्पकर्ता या उसका परिवार नेत्र या अंगदान को राजी हो गए तो डॉक्टर फिर जरूरत पर रोगी की जान बचाने की कोशिश नहीं करेंगे। सामुदायिक चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष एवं आचार्य डा. एस के गर्ग ने बताया कि ऐसा पहली बार है कि विभाग द्वारा किसी स्नातक चिकित्सा छात्र के शोध को आईसीएमआर नई दिल्ली परियोजना में चयनित होने का सम्मान प्राप्त हुआ हो।
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