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सेंट्रल मार्केट मामले में शासन को भेजी रिपोर्ट
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मेरठ। सेंट्रल मार्केट मामले में आवास एवं विकास परिषद ने शासन को रिपोर्ट भेज दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर 2024 को 661/6 के मामले में सुनवाई करते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश दिए हैं। इसके लिए विभाग की ओर से टेंडर भी जारी किए गए थे। एक ही बोली आने पर शासन की कमेटी की ओर से इसे निरस्त कर दिया गया। ऐसे में कार्रवाई के लिए राय मांगी गई है। वहीं इस मामले में 16 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका पर सुनवाई होनी है।
सेंट्रल मार्केट स्थित अवैध कॉम्पलेक्स 661/6 के साथ ही 31 अन्य निर्माण भी ध्वस्तीकरण की जद में हैं, जिनके लिए एक करोड़ 67 लाख का टेंडर हुआ था। एडिफिस इंजीनियरिंग कंपनी का चयन हुआ था, जिसे बाद में शासन की कंपनी ने निरस्त कर दिया। आवास एवं विकास परिषद की शास्त्रीनगर स्कीम संख्या 7 के तहत ही सेंट्रल मार्केट आता है। सुप्रीम कोर्ट ने 661/6 मामले में ध्वस्तीकरण के आदेश दिए हैं। व्यापारियों की सुप्रीम कोर्ट में दाखिल सभी याचिकाएं भी रद्द की जा चुकी हैं। इसमें सेक्टर-2 व सेक्टर-6 का मुख्य मार्ग मुख्य रूप से सेंट्रल मार्केट माना जाता है। आवास विकास की रिपोर्ट के मुताबिक इस स्कीम में 6379 स्वीकृत आवासीय संपत्तियां हैं।
इनमें से 860 संपत्ति ऐसी हैं, जिनमें व्यावसायिक प्रयोग हो रहा है। सेंट्रल मार्केट में आवासीय भवनों में कॉम्पलेक्स बन गए हैं और सराफा, डेयरी, रेडीमेड गारमेंट्स, मर्चेंट स्टोर आदि हैं। कई लोगों ने क्षेत्र में निचले तल पर शोरूम बना लिए हैं और ऊपरी तल पर रिहाइश हो रही है। अफसरों की सांठगांठ से बड़े पैमाने पर गली-गली में भी दुकानें, शोरूम बने हैं। आवास विकास ने ध्वस्तीकरण के लिए 1.66 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया था। इसमें कंपनियों के रुझान न दिखा पाने के कारण तीन बार जारी किया गया। एक कंपनी की ओर से बिड आने पर विभाग ने इसे शासन को भेज दिया। वहां से स्वीकृति मिल गई लेकिन बाद में कमेटी ने इसे निरस्त कर दिया।
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आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के ध्वस्तीकरण के आदेश के बावजूद आवास एवं विकास परिषद के अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे। ऐसे में अधिकारियों को नोटिस देने के साथ ही 7 मई को अवमानना याचिका दाखिल की थी। इस पर 2 जुलाई को हाइकोर्ट ने निरस्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट में ही याचिका दायर करने के निर्देश दिए थे। अब 16 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका पर सुनवाई होगी। वहीं ध्वस्तीकरण का टेंडर निरस्त होने से अफसर भी असमंजस में हैं, उन पर अवमानना की तलवार लटकी हुई है।
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सेंट्रल मार्केट स्थित अवैध कॉम्पलेक्स 661/6 के साथ ही 31 अन्य निर्माण भी ध्वस्तीकरण की जद में हैं, जिनके लिए एक करोड़ 67 लाख का टेंडर हुआ था। एडिफिस इंजीनियरिंग कंपनी का चयन हुआ था, जिसे बाद में शासन की कंपनी ने निरस्त कर दिया। आवास एवं विकास परिषद की शास्त्रीनगर स्कीम संख्या 7 के तहत ही सेंट्रल मार्केट आता है। सुप्रीम कोर्ट ने 661/6 मामले में ध्वस्तीकरण के आदेश दिए हैं। व्यापारियों की सुप्रीम कोर्ट में दाखिल सभी याचिकाएं भी रद्द की जा चुकी हैं। इसमें सेक्टर-2 व सेक्टर-6 का मुख्य मार्ग मुख्य रूप से सेंट्रल मार्केट माना जाता है। आवास विकास की रिपोर्ट के मुताबिक इस स्कीम में 6379 स्वीकृत आवासीय संपत्तियां हैं।
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इनमें से 860 संपत्ति ऐसी हैं, जिनमें व्यावसायिक प्रयोग हो रहा है। सेंट्रल मार्केट में आवासीय भवनों में कॉम्पलेक्स बन गए हैं और सराफा, डेयरी, रेडीमेड गारमेंट्स, मर्चेंट स्टोर आदि हैं। कई लोगों ने क्षेत्र में निचले तल पर शोरूम बना लिए हैं और ऊपरी तल पर रिहाइश हो रही है। अफसरों की सांठगांठ से बड़े पैमाने पर गली-गली में भी दुकानें, शोरूम बने हैं। आवास विकास ने ध्वस्तीकरण के लिए 1.66 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया था। इसमें कंपनियों के रुझान न दिखा पाने के कारण तीन बार जारी किया गया। एक कंपनी की ओर से बिड आने पर विभाग ने इसे शासन को भेज दिया। वहां से स्वीकृति मिल गई लेकिन बाद में कमेटी ने इसे निरस्त कर दिया।
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आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के ध्वस्तीकरण के आदेश के बावजूद आवास एवं विकास परिषद के अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे। ऐसे में अधिकारियों को नोटिस देने के साथ ही 7 मई को अवमानना याचिका दाखिल की थी। इस पर 2 जुलाई को हाइकोर्ट ने निरस्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट में ही याचिका दायर करने के निर्देश दिए थे। अब 16 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका पर सुनवाई होगी। वहीं ध्वस्तीकरण का टेंडर निरस्त होने से अफसर भी असमंजस में हैं, उन पर अवमानना की तलवार लटकी हुई है।