भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के चलते दोनों देशों में रहने वाले रिश्तेदारों के बीच भी दूरियां बढ़ गई हैं। बीते 10 सालों में अपने रिश्तेदारों से मिलने मेरठ आने वाले पाकिस्तानी नागरिकों की संख्या में तेजी से कमी आई है।
भारत-पाकिस्तान तनाव से दोनों देशों की रिश्तेदारियों में आईं दूरियां, ये है पिछले दस साल की रिपोर्ट
एक अधिकारी के अनुसार, 2009-10 में पाकिस्तान से मेरठ आने वाले नागरिकों की संख्या 48 से 50 के बीच थी। 2011-12 में यह संख्या घटकर 45 रह गई।
2015-16 में संख्या फिर से 48 पहुंची, लेकिन 2017 के बाद लगातार कमी आई। 2018 में सिर्फ 19 पाक नागरिक ही मेरठ आए। इस साल यह संख्या 13 पर ठहर गई है। इनमें से एक महिला को छोड़कर सभी लौट चुके हैं। इस महिला की लिसाड़ीगेट में रिश्तेदारी है।
अधिकतम 90 दिन का वीजा
पाकिस्तान से आने वाले लोगों को अधिकतम 90 दिन का वीजा मिलता है। इसके बाद उन्हें अपने मुुुल्क लौटना पड़ता है। पूर्व में पश्चिमी यूपी में आए पाकिस्तान नागरिक गायब भी हुए है।
18 अगस्त 2018 को यूपी पुलिस ने पाकिस्तान के दो मूल नागरिकों को इंदौर से गिरफ्तार किया था। दोनों युवक कई साल से मोदीपुरम में रह रहे थे। दोनों पर वीजा नियमों के उल्लंघन में केस भी दर्ज किया गया था।
खुफिया विभाग रखता है नजर
पाकिस्तान से आने वाले नागरिकों का जिस जिले में आना होता है, वहां पाक सेक्शन में पंजीकरण होता है। इसके बाद खुफिया विभाग की टीम उन पर पैनी नजर रखती है।
पश्चिमी यूपी में मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और शामली ऐसे जिले हैं, जहां सबसे अधिक महिलाएं और पुरुष पाकिस्तान से आते हैं।
एयर स्ट्राइक के बार्द आई कमी
26 फरवरी को हुई एयर स्ट्राइक के तीन माह बाद तक मेरठ में किसी भी पाकिस्तानी नागरिक का पंजीकरण नहीं हुआ।
खुफिया विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एयर स्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान से आने वाले नागरिकों की संख्या में मेरठ और अन्य जिलों में कमी आई है।