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रक्षाबंधन पर 324 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, इस मुहूर्त में भाइयों को राखी बांधें बहनें

Sun, 02 Aug 2020 01:23 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 02 Aug 2020 01:23 PM IST
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Rakshabandhan 2020 subh Muhurt: rare yog on the day of Rakshabandhan after three hundred years
रक्षाबंधन पर्व - फोटो : social media
रक्षाबंधन पर्व पर इस बार ग्रह गोचर एवं ब्रह्मांड में राहु और शुक्र के संयोग के कारण धनपति योग बन रहा है। मेरठ में ज्योतिष डॉ. विभोर भारद्वाज ने बताया कि यह योग 324 वर्ष बाद बन रहा है। जब शुक्र अपनी मूल राशि वृष से दूसरे स्थान अर्थात मिथुन राशि पर बाल्य अवस्था में होता है एवं शुक्र के साथ राहु भी अपनी बाल्यावस्था में चल रहा होता है।
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ऐसी स्थिति यदि पूर्णमासी एवं सावन में बन जाए तो यह धनपति-योग बना देती है, क्योंकि काल पुरुष की दूसरी राशि वृष होती है जो संग्रह, संचय एवं हर प्रकार के धन को बढ़ाने वाली होती है। सावन में भगवान शिव के आशीर्वाद से जहां एक और राहु अचानक धन योग का कारक हो जाता है, वहीं ऐसी स्थिति में उसे मां भगवती की कृपा भी प्राप्त होने लगती है। यह बड़ा ही दुर्लभ संयोग होता है।
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यह समय रहेगा शुभ
तीन अगस्त को पूर्णमासी तिथि रात 9:27 बजे तक रहेगी अत: सूर्य उदय से लेकर रात 9:27 तक राखी बांधने एवं बंधवाने का समय शुभ रहेगा। ज्योतिष विभोर भारद्वाज ने बताया कि इस दिन जब बहन भाई की कलाई पर राखी बांधे तो भाई एक सफेद कागज पर अपनी बहन के दोनों पैरों की छाप ले लें तथा उस कागज को घर के दक्षिण पश्चिम कोने में लगा दें।
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घर के दक्षिण पश्चिम कोने का स्वामी राहु होता है जो अचानक में धन प्राप्ति का कारक ज्योतिष में है, ऐसा करने से वर्षभर धन संग्रह होता रहेगा। वहीं सबसे शुद्ध एवं श्रेष्ठ कलावा राखी के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। छोटे भाई के लिए कलावे में 5 गांठ लगाकर बांधें, जबकि बड़े भाई के लिए 7 गांठें लगाकर दाहिने हाथ में बांधें। छोटी भाभी के कलावे में 4 गांठे और बड़ी भाभी के लिए 6 गांठे लगाकर बाएं हाथ में बांधें।

सुबह साढ़े नौ बजे तक रहेगा भद्रा काल
बिबिया मंदिर के पुजारी कृष्णा संजय महाराज ने रक्षाबंधन के बारे में बताया है। उनके मुताबिक रक्षाबंधन सामाजिक, पौराणिक, धार्मिक तथा ऐतिहासिक भावना के धागे से बना एक ऐसा पवित्र बंधन है। जिसे जनमानस में रक्षाबंधन के नाम से जाना जाता है। 

उन्होंने बताया पुरातन काल में रक्षा की भावना का उद्देश्य लिए ब्राह्मण क्षत्रिय राजाओं को रक्षा सूत्र बांधते थे। जहां राजा और जमींदार जैसे शक्तिवान एवं धनवान लोग उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के साथ जीवन उपयोगी वस्तुएं भी उपहार में दिया करते थे।

उन्होंने बताया एक बार राजा बली अपने यज्ञ तप की शक्ति से स्वर्ग पर आक्रमण करके सभी देवताओं को परास्त कर देते हैं, तो इंद्र सहित सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में जाते हैं और राजा बली से अपनी रक्षा की प्रार्थना करते हैं। तब विष्णु जी वामन अवतार में ब्राह्मण के रूप में राजा बली से भिक्षा मांगने जाते हैं और तीन पग भूमि दान में मांगते हैं।

राजा बली उन्हें भूमि देने का वचन देते हैं, तभी वामन रूपी विष्णु जी तीन पग में सारा आकाश, पाताल और धरती नापकर राजा बली को रसातल में भेज देते हैं। रसातल में राजा बली अपनी भक्ती से भगवान विष्णु को प्रसन्न करके उनसे वचन ले लेते हैं कि भगवान विष्णु दिन-रात उनके सामने रहेंगे। श्री विष्णु के वापस विष्णुलोक न आने पर परेशान लक्ष्मी जी को नारद जी सलाह देते हैं कि, आप राजा बली को भाई बनाकर उसको रक्षासूत्र बांधिये।

नारद जी की सलाह अनुसार माता लक्ष्मी बली को रक्षासूत्र बांधती हैं और उपहार में भगवान विष्णु को मांगकर अपने साथ ले जाती हैं। ये संयोग ही है कि इस दिन भी श्रावण मास की पूर्णिमा थी। आज भी सभी धार्मिक अनुष्ठानों  में ब्राह्मण यजमान को इस मंत्र से रक्षा सूत्र बांधते है। उन्होंने राखी बांधने का मुहूर्त के बारे में बताया कि राखी बांधने के समय भद्रा नहीं होनी चाहिए।

कहते हैं कि रावण की बहन ने उसे भद्रा काल में ही राखी बांध दी थी इस लिए रावण का विनाश हो गया था।  बताया कि 3 अगस्त को भद्रा सुबह 9 बजकर 29 मिनट तक है। राखी का त्योहार सुबह 9 बजकर 30 मिनट से शुरू हो जाएगा। दोपहर को 1.35 मिनट से लेकर शाम 4.35 मिनट तक सबसे अच्छा समय है। शाम 7.30 मिनट से लेकर रात 9.30 के बीच अच्छा मुहूर्त है।

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