फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   raise voice against repist

#kabtaknirbhaya: नहीं डरेंगे, अब अपराजिता बनकर हैवानियत के खिलाफ उठाएंगे आवाज

Mon, 02 Dec 2019 01:27 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Mon, 02 Dec 2019 01:27 AM IST
विज्ञापन
raise voice against repist
आखिर कबतक निर्भया अमर उजाला कार्यालय में हुए संवाद में विचार रखतीं पूर्वा कपूर।

#आखिरकबतकनिर्भया। अब निर्भया नहीं अपराजिता बनने की बारी है। कब तक हमारी बेटियां हैवानियत का शिकार होती रहेंगी। गली, मोहल्लों में घूम रहे लुटेरे कब तक हमारी बेटियों की आबरू से खिलवाड़ करते रहेंगे और पुलिस प्रशासन खामोश बना रहेगा। अब हम खुद अपनी बेटियों की सुरक्षा क रेंगे। उनके हक की लड़ाई लड़ेंगे।

विज्ञापन


हैदराबाद में हुए एक और निर्भया कांड से शहर की महिलाओं में जबरदस्त आक्रोश है। रविवार को अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत अमर उजाला के मोहकमपुर स्थित कार्यालय पर संवाद का आयोजन हुआ। इसमें प्रबुद्ध वर्ग की महिलाओं ने हैदराबाद की घटना पर रोष जताया। महिलाओं ने कहा कि अब निर्भया बनकर सहेंगे नहीं बल्कि अपराजिता बनकर इस हैवानों के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे।

विज्ञापन

इस्लामी देशों की तरह तुरंत मिले सजा
जब भी किसी बेटी का अपमान होता है तो हमारा कानून मुकदमा लिखवाने का इंतजार क्यों करता है। तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए और ऐसी सजा दी जाए कि कोई इस तरह का अपराध करने की हिम्मत न जुटा पाए। इस्लामी देशों क ी तरह ऐसे आरोपियों को सरेआम सजा दी जानी चाहिए। सरकार इसके लिए अलग से कानून बनाए। -सुनीता वर्मा, महापौर

आज भी सोया है समाज
हमारा समाज आज भी सोया हुआ है। एक बेटी जब रात में भी घर से निकले तो उसे लगे कि वह सुरक्षित है। उसे महसूस होना चाहिए कि उसकी सुरक्षा में कोई मुस्तैद है। पुलिस-प्रशासन क ो अपनी जवाबदेही समझनी होगी। समाज को भी जिम्मेदारी निभानी होगी। -अतुल शर्मा, अध्यक्ष संकल्प संस्था

सजा मिलना जरूरी
अपराधियों को जब तक सजा नहीं मिलेगी, कोई न कोई बेटी निर्भया बनती रहेगी। जुर्माना लगाने से इस देश में कुछ नहीं होता, यहां लोगों को सजा चाहिए। ऐसे अपराधियों को सिर्फ फांसी की सजा मिलनी चाहिए, वो भी सार्वजनिक स्थल पर। जो कि लोगों के लिए एक नजीर बने। कोई भी ऐसा अपराध करने से पहले सौ बार सोचे। -निधी मित्तल, प्रिंसिपल चड्डा पब्लिक स्कूल

सामाजिक बहिष्कार और सजा मिले
हमारे समाज में एक दुष्कर्म पीड़िता को समाज से बहिष्कृत कर देते हैं, लेकिन दुष्कर्मी को समाज स्वीकार कर लेता है। ऐसे अपराधियों को सामाजिक बहिष्कार के साथ सजा भी मिलनी चाहिए। जब तक गंदी सोच के लोग समाज में हैं, ये वारदात होती रहेंगी। बेटियां खौफ में रहेंगी। हमें समाज में गंदी सोच रखने वाले लोगों को भी बदलना होगा। -डॉ. अरुणा यादव, पीएल शर्मा जिला अस्पताल

परिवार से ही बदलें सोच
निर्भया, कभी कठुआ तो हैदराबाद जैसी घटनाएं हर रोज समाज में घटती रहेंगी। इन घटनाओं के पीछे सबसे बड़ा कारण गंदी सोच है। उनके लिए महिला की उम्र कोई मायने नहीं रखती। हमें उस सोच को बदलना होगा। इसकी जिम्मेदारी परिवार से ही शुरू होती है। परिवार के सदस्य जब भी घर के पुरुषों क ो किसी गलत हरकत या गंदी मानसिकता में देखें तो उसका विरोध करें। -पायल जैन, समाजसेवी

सोशल मीडिया पर बैन लगे
महिलाओं, बेटियों का जीवन खतरे में है। ये गंदी सोच समाज ही नहीं चरित्र की भी हानि है। इसके लिए मुख्य रूप से सोशल मीडिया जिम्मेदार है। सोशल मीडिया पर सैकड़ों गलत वीडियो साझा हो रहे हैं। उन्हें हर उम्र और वर्ग का इंसान देख रहा है। ये सामग्री ही लोगों की मानसिकता में दरिंदगी भर रही है। ये वीडियो ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया भी बैन हो जाना चाहिए। -सीमा अदलखा, अध्यक्ष योग संस्कृति क्लब

विज्ञापन

जूस से ज्यादा शराब की दुकानें
जो लोग इस तरह की वारदात को अंजाम देते हैं वो अशिक्षित लोग हैं। हमारे शहरों में जूस से ज्यादा शराब की दुकानें हैं। हर उम्र के व्यक्ति को आसानी से शराब मिल जाती है। सोशल मीडिया पर गलत वीडियो देखकर, शराब पीकर ये लोग वही कृत्य करना चाहते हैं जो वो वीडियो में देखते हैं। इसका शिकार नन्हीं बच्चियां और बेटियां होती हैं। -निशा, समाजसेविका

हैवानियत नहीं ये मानसिक बीमारी है
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ नहीं सब पढ़ें सब बढ़ें की आज समाज को जरूरत है। दूसरी बात पैरेंट्स को बच्चों की मानसिकता समझनी होगी। अगर बच्चे में कोई मानसिक कमी देखते हैं तो उसका इलाज कराएं। मनोवैज्ञानिक की सलाह लें। क्योंकि ये हैवानियत कोई सीखने वाली चीज नहीं बल्कि एक मानसिक बीमारी है। अभिभावकों को बचपन में बच्चे की हरकतों से पता चल जाता है कि उनका बच्चा किस दिशा में जा रहा है। वहीं हमारे समाज में आज भी ये सोच है कि अगर हम मनोवैज्ञानिक के पास जा रहे हैं तो हम पागल हैं। इस सोच से हटकर बच्चे ही नहीं घर के पुरुषों का भी इलाज कराएं। संस्कार, शिक्षा नहीं बल्कि इलाज इन मानसिक रोगियों की जरू रत है। सजा से पहले इन लोगों की मानसिक जांच होनी चाहिए। अभिभावकों को अपने घर से ही इस कदम की शुरूआत करनी होगी। -डॉ. कंचन मलिक, महिला एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ

कोर्ट में न भेजे जाएं ऐसे मुकदमे
ऐसे मुकदमों को तो कोर्ट में भेजना ही नहीं चाहिए। अगर मुकदमा कोर्ट में जाएगा तो कोई न कोई वकील उन मुजरिमों को बचाने की कोशिश करेगा। ऐसे लोगों को पब्लिक के हवाले करके सजा दी जानी चाहिए। शिक्षकों की भी जिम्मेदारी है कि जब वो अपने छात्रों में कोई गलत हरकत देखें तो तुरंत माता पिता को बताएं। इस बीमारी का इलाज होना चाहिए। -राजरानी शर्मा शिक्षिका

जागरूकता के साथ सजा भी जरूरी
समाज में जागरूकता, शिक्षा और संस्कारों के अलावा ऐसे आरोपियों को सजा मिलना जरूरी है। कोई सुनवाई या मुकदमा नहीं होना चाहिए, बल्कि सीधे सजा मिलनी चाहिए। ऐसे लोगों को न जमानत मिलनी चाहिए न ही उनके लिए जुवेनाइल सिस्टम होना चाहिए। जब इस देश में चुनाव जैसे मसले पर कभी भी कोर्ट लग सकती है तो एक बेटी के साथ हुए अन्याय पर न्याय मिलने में इतनी देर क्यों लगती है। -मीनाक्षी, शिक्षिका

सख्त कानून के साथ तुरंत मिले न्याय
देश की लचर कानून व्यवस्था का डर समाज में नहीं है। कानून का सख्त होना जरूरी है। ताकि जब भी कोई व्यक्ति गलत हरकत के बारे में सोचे तो उसे इतना डर हो कि अब वो बचेगा नहीं। बेटियों को हम सशक्त बना लें, शिक्षित बना लें, लेकिन जब हम उन्हें सुरक्षित समाज नहीं दे पाएंगे तो उन्हें दुनिया में लाने का क्या फायदा। -कल्पना पांडे, अध्यक्ष सारथी संस्था

प्रशासनिक तंत्र की निगरानी हो मजबूत
समाज का निगरानी तंत्र ऐसा बना दें जहां ये पता चले कि हमारा बच्चा अगर गलत कर रहा है तो उसकी तुरंत सूचना मिले। वैधानिक निगरानी के साथ सामाजिक निगरानी भी जरूरी है। पुलिस, प्रशासन की निगरानी ऐसी हो कि जहां भी लगे कि चार लड़के खड़े होकर बात कर रहे हैं तो उन्हें डर महसूस हो। उन्हें भय रहे कि उनकी गलत हरकत उनका जीवन बर्बाद कर सकती है। -डॉ. लता कुमार, प्रवक्ता शहीद मंगल पांडे महिला डिग्री कॉलेज

बेटियों को भरोसा मिले, वो सुरक्षित हैं
लड़की के साथ जब ऐसी घटना होती है तो उसे सोचना पड़ता है कि वो किसके पास जाए। हम एकदम से जादू की छड़ी तो नहीं दे सकते, लेकिन उन्हें ये बता सकते हैं कि आपके आसपास पुलिस खड़ी है। हर चौराहे पर उन्हें सुरक्षा मिल रही है। ऐसे अपराधियों को जमानत तो बिल्कुल नहीं मिलनी चाहिए। अपराधियों का सामाजिक विरोध होना चाहिए। पुलिस मजबूती से कानून का पालन कराए।-पूर्वा कपूर, एंटरप्रेन्योर

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed