बिजनौर: पहाड़ पर बरसे पानी ने खादर में मचाई तबाही, कटान कर गांवों की ओर बढ़ रही गंगा की धारा
- कटान रोकने को बनाए चार स्टड धंसे
- मालन नदी के रपटे पर बह रहा डेढ़ फीट पानी, खादर के गांवों में खौफ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पहाड़ों से बहकर आए गंगा के पानी ने खादर में तबाही मचानी शुरू कर दी है। गंगा कई जगह कटान करते हुए गांवों की ओर बढ़ रही है। गंगा का पानी भी कई गांवों के खेतों में हजारों बीघा फसल में भर गया है।
गंगा और मालन का जलस्तर अब भी लगातार बढ़ रहा है। कटान रोकने के लिए बनाए गए चार स्टड भी बैठ गए हैं। जलस्तर बढ़ने से गंगा के किनारे के गांवों में बसे लोग खौफ के साये में हैं। गांव वालों ने कटान को रोकने की मांग की है।
मंगलवार को गंगा का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया था। गंगा में पानी और पानी की धार भी पहले से ज्यादा तेज रही। मंगलवार को गंगा के पानी ने कहीं कटान नहीं किया था लेकिन बुधवार को गंगा ने कटान भी करना शुरू कर दिया है। गांव फतेहपुर और सेफपुर के बीच में गंगा खेतों में कटान करते हुए गांवों की ओर आगे बढ़ रही है। कटान वाली जगह से दोनों गांवों की दूूरी बस 500 मीटर तक ही है।
पहाड़ों पर बारिश के पानी के साथ चीड़ के सूखे पेड़ भी बहकर गंगा की धारा में आ रहे हैं। गांव टीप के पास गांव वाले इन्हें नाव के सहारे निकाल रहे हैं। बालावाली घाट पर सड़क पर गंगा का पानी बह रहा है।
यह भी पढ़ें: यूपी: गंगा उफान पर... 10 घंटे ठप रहा वाहनों का आवागमन, कई गांवों पर मंडराया खतरा, तस्वीरें
रावली क्षेत्र में कटान को रोकने के लिए पिछले साल और इस साल भी स्टड बनाए गए हैं। गंगा के तेज बहाव के आगे चार स्टड रातों रात बैठ गए हैं। इसे गांव वाले कटान की संभावना के चलते खौफ में आ गए हैं।
इनमें से दो स्टड तो महीना भर पहले ही बनाए गए थे। गंगा रावली क्षेत्र में भी दो किलोमीटर बैराज की ओर खेतों में कटान कर रही है। गंगा व मालन का पानी गांव ब्रह्मपुरी में भर जाता है लेकिन अभी तक गंगा का पानी गांव में नहीं आया है।
अब भी गंगा के बीच टापू पर रह रहे वन गुर्जर
गंगा के बढ़े जलस्तर और विकराल रूप को देखकर हर कोई खौफजदा है लेकिन वन गुजर्रों के परिवार अब भी गंगा की धारा के बीच टापू पर रह रहे हैं।
गांव रावली से शुक्रताल की ओर गंगा के बीच बने टापू पर चार परिवार में 12 सदस्य अपने सैकड़ों पशुओं के साथ रह रहे हैं। अभी टापू पर गंगा का पानी नहीं चढ़ा है। ये वन गुर्जर दूध बेचकर गुजारा करते हैं। अब भी ये नाव से रोज तीन क्विंटल दूध बिजनौर की ओर बेचने के लिए ला रहे हैं।
नया पुल बनने से मिली राहत
मंडावर में मालन नदी का नया बनने से राहगीरों को बहुत राहत मिली है। पहले रपटे पर पानी आने से यहां से आवागमन एकदम बाधित कर हो जाता था। लेकिन अब रपटे की बराबर में पुल काफी ऊंचा करके बनाया गया है। इस पुल पर पानी नहीं आता है और वाहनों को यहीं से गुजारा जाता है।