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Meerut News: सुम्बुल के लिए जाटों पर डोरे डालने लगे कादिर रानाा
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अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद बिखरे समीकरण और सियासत को सपा ने फिर नए सिरे से जोड़ना शुरू किया है। दंगे के आरोपी पूर्व सांसद कादिर राना के बजाए उनकी पुत्रवधू सुम्बुल राना को टिकट देकर विरोध शांत करने की कोशिश हुई। अब खुद राना ने मुस्लिमों के साथ जाटों को जोड़ने की पहल की है। राना ने पहले टिकैत बंधुओं से मुलाकात की। इसके बाद सियासी गिले-शिकवे भुलाने के लिए सपा सांसद हरेंद्र मलिक के आवास पर भी पहुंच गए थे।
सरकार के खिलाफ लामबंदी रखने वाले विपक्ष के बड़े जाट चेहरों से मुलाकात कर पूर्व सांसद राना मीरापुर के लिए स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं। पीडीए सपा का फार्मला है। लेकिन मीरापुर उपचुनाव में सपा का बेस वोट बैंक मुस्लिम ही दिख रहा है। ऐसे में पूर्व सांसद ने सबसे पहले जाटों पर डोरे डालने के लिए चाल चली है।इसकी वजह यह है कि विधानसभा के करीब 50 गांव में जाटों के 35 हजार से ज्यादा वोट हैं। सपा अगर सेंधमारी करने में कामयाब रही तो इसका सीधा नुकसान भाजपा- रालोद को होगा। भोकरहेड़ी पर टिकी सबकी निगाह : मीरापुर विधानसभा में कसबा भोकरहेड़ी जाट सियासत के केंद्रों में से एक है। कसबे के कई नेता अलग-अलग दलों में टिकट के दावेदार भी थे। टिकट की दौड़ में सब पिछड़ गए। ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि कसबे की क्या रणनीति रहती है।
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मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद बिखरे समीकरण और सियासत को सपा ने फिर नए सिरे से जोड़ना शुरू किया है। दंगे के आरोपी पूर्व सांसद कादिर राना के बजाए उनकी पुत्रवधू सुम्बुल राना को टिकट देकर विरोध शांत करने की कोशिश हुई। अब खुद राना ने मुस्लिमों के साथ जाटों को जोड़ने की पहल की है। राना ने पहले टिकैत बंधुओं से मुलाकात की। इसके बाद सियासी गिले-शिकवे भुलाने के लिए सपा सांसद हरेंद्र मलिक के आवास पर भी पहुंच गए थे।
सरकार के खिलाफ लामबंदी रखने वाले विपक्ष के बड़े जाट चेहरों से मुलाकात कर पूर्व सांसद राना मीरापुर के लिए स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं। पीडीए सपा का फार्मला है। लेकिन मीरापुर उपचुनाव में सपा का बेस वोट बैंक मुस्लिम ही दिख रहा है। ऐसे में पूर्व सांसद ने सबसे पहले जाटों पर डोरे डालने के लिए चाल चली है।इसकी वजह यह है कि विधानसभा के करीब 50 गांव में जाटों के 35 हजार से ज्यादा वोट हैं। सपा अगर सेंधमारी करने में कामयाब रही तो इसका सीधा नुकसान भाजपा- रालोद को होगा। भोकरहेड़ी पर टिकी सबकी निगाह : मीरापुर विधानसभा में कसबा भोकरहेड़ी जाट सियासत के केंद्रों में से एक है। कसबे के कई नेता अलग-अलग दलों में टिकट के दावेदार भी थे। टिकट की दौड़ में सब पिछड़ गए। ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि कसबे की क्या रणनीति रहती है।
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