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विकास की जंग: हाईकोर्ट पहुंचीं मेरठ की जनसमस्याएं, 22 फरवरी को सुनवाई
Fri, 15 Jan 2021 12:04 AM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Fri, 15 Jan 2021 12:04 AM IST
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शहर में जगह जगह लगा है कूड़े और गंदगी का अंबार
- फोटो : अमर उजाला
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मेरठ में गंदगी, जल निकासी, शुद्ध पेयजल आपूर्ति आदि समस्याएं हाईकोर्ट पहुंच गई हैं। पीठ ने मेरठ सिटीजन फोरम की जनहित याचिका स्वीकार कर ली है। इस मामले की सुनवाई 22 फरवरी को करेगी। याचिका में प्रदेश शासन समेत आठ विभागों को पार्टी बनाया है।
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मेरठ सिटीजन फोरम शहर की मूलभूत जरूरतों के साथ व्यवस्थित विकास की लड़ाई लड़ रहा है। संबंधित विभागों द्वारा जनसमस्याओं पर सुनवाई नहीं करने पर फोरम ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह जानकारी फोरम के पदाधिकारियों ने साकेत स्थित कार्यालय पर प्रेस कांफ्रेंस में दी।
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इंजीनियर रामपाल सिंह वर्मा और डॉ. अशोक त्यागी ने बताया कि फोरम ने शहर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, वर्षा जल निकासी, नाले व सीवर प्रणाली चोक होने, एसटीपी की क्षमता कम होने, कचरे का उचित नियंत्रण और निस्तारण नहीं होने के साथ भूजल दोहन जैसी समस्याओं को लेकर बीती छह दिसंबर को जनहित याचिका दायर की थी।
बीती 11 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने याचिका को स्वीकार कर टिप्पणी की कि मेरठ सूबे का प्रमुख शहर है। इसके बावजूद सुनियोजित विकास नहीं हो पा रहा है।
इस वाद में प्रदेश शासन, मंडलायुक्त, नगर निगम, एमडीए, आवास विकास परिषद, जल निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भूगर्भ जल विभाग आदि को प्रतिवादी बनाया। इंजीनियर डीके सिंह ने बताया कि फोरम ने समस्याओं के समाधान के सुझाव भी दिए हैं।
जलापूर्ति के लिए शहर के सभी भूमिगत जलाशयों को जोड़ा जाए। बेतरतीब भूजल दोहन कर रहे उद्योगों से जल संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाए जाएं। शहर की मॉनिटरिंग जीआईएस से कराने, भूमिगत सीवर, पानी की लाइन आदि की मॉनिटरिंग रडार सिस्टम से कराने आदि के सुझाव दिए हैं। यहां फोरम अध्यक्ष विवेक सिंघल और सचिव गौरांग संगल भी मौजूद रहे।